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पहाड़ के हस्तशिल्प से रूबरू होंगे श्रद्धालु
Updated Tue, 20 Jun 2017 10:24 PM IST
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रुद्रप्रयाग। बाबा केदार के दर्शन के लिए धाम आने वाले श्रद्धालु अब पहाड़ के हस्तशिल्प से भी रूबरू होंगे। मंदाकिनी और सरस्वती पर बने स्नानघाट पर बनाए चेंजिंग रूम के बाहर देवदार की लकड़ी की खोली, मोरी और जंगला देखने को मिलेंगे। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान द्वारा देहरादून और टिहरी के काष्ठ हस्तशिल्पयों की मदद से सोन प्रयाग में देवदार की लकड़ी से इन धरोहरों की नक्काशी कराई जा रही है।
16/17 जून 2013 की आपदा के बाद से केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण में जुटे निम द्वारा जहां धाम की सुरक्षा के लिए कार्य किए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए कॉटेज और स्नानघाट का निर्माण भी किया गया है। अब कार्यदायी संस्था पहाड़ के घर, गांवों की शान कही जाने वाली तुन, देवदार, जामुन की लकड़ी से बनी खोली, मोरी, जंगला और छज्जे को केदारनाथ में स्थापित करने के प्रयास कर रही है। धाम में संगम पर बने दो सौ मीटर लंबे स्नानघाट के फर्श पर निर्माणाधीन चेंजिंग रूम के बाहर लकड़ी की इन पारंपरिक धरोहरों की कृतियों को स्थापित किया जाएगा, जहां पर श्रद्धालुओं को बैठने के लिए बेंच लगाई जाएंगी। इससे बाबा केदार के दर्शन के लिए धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु पहाड़ के काष्ठ हस्तशिल्प से रूबरू हो सकेंगे। निम द्वारा चार दिन पूर्व करीब एक टन (10 क्विंटल) देवदार की लकड़ी सोनप्रयाग पहुंचाई गई है। यहां टिहरी के तीन व देहरादून के दो कारीगर तीन दिन से लकड़ी पर अपने हस्तशिल्प के जरिए एक से बढ़कर एक बेहतरीन आकृतियां उकेर रहे हैं। निम के पदाधिकारियों के अनुसार एक-डेढ़ माह में कार्य पूरा हो जाएगा। संभवत: जुलाई के तीसरे सप्ताह में लकड़ी की इन कृतियों को धाम पहुंचाकर चेंजिंग रूम की फर्श पर अलग-अलग दूरी पर स्थापित कर दिया जाएगा।
इनका कहना है --
केदारनाथ में स्नानघाट पर चेंजिंग रूम के बाहर देवदार की लकड़ी से बनी खोली, मोरी, जंगला व छज्जे के ढांचे स्थापित किए जाएंगे। पहाड़ के हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के साथ ही देश-विदेश से पहुंच रहे लोगों को यहां की संस्कृति से अवगत कराना मुख्य उद्देश्य है।
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- मनोज सेमवाल, प्रभारी निम, सोनप्रयाग
16/17 जून 2013 की आपदा के बाद से केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण में जुटे निम द्वारा जहां धाम की सुरक्षा के लिए कार्य किए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए कॉटेज और स्नानघाट का निर्माण भी किया गया है। अब कार्यदायी संस्था पहाड़ के घर, गांवों की शान कही जाने वाली तुन, देवदार, जामुन की लकड़ी से बनी खोली, मोरी, जंगला और छज्जे को केदारनाथ में स्थापित करने के प्रयास कर रही है। धाम में संगम पर बने दो सौ मीटर लंबे स्नानघाट के फर्श पर निर्माणाधीन चेंजिंग रूम के बाहर लकड़ी की इन पारंपरिक धरोहरों की कृतियों को स्थापित किया जाएगा, जहां पर श्रद्धालुओं को बैठने के लिए बेंच लगाई जाएंगी। इससे बाबा केदार के दर्शन के लिए धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु पहाड़ के काष्ठ हस्तशिल्प से रूबरू हो सकेंगे। निम द्वारा चार दिन पूर्व करीब एक टन (10 क्विंटल) देवदार की लकड़ी सोनप्रयाग पहुंचाई गई है। यहां टिहरी के तीन व देहरादून के दो कारीगर तीन दिन से लकड़ी पर अपने हस्तशिल्प के जरिए एक से बढ़कर एक बेहतरीन आकृतियां उकेर रहे हैं। निम के पदाधिकारियों के अनुसार एक-डेढ़ माह में कार्य पूरा हो जाएगा। संभवत: जुलाई के तीसरे सप्ताह में लकड़ी की इन कृतियों को धाम पहुंचाकर चेंजिंग रूम की फर्श पर अलग-अलग दूरी पर स्थापित कर दिया जाएगा।
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इनका कहना है --
केदारनाथ में स्नानघाट पर चेंजिंग रूम के बाहर देवदार की लकड़ी से बनी खोली, मोरी, जंगला व छज्जे के ढांचे स्थापित किए जाएंगे। पहाड़ के हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के साथ ही देश-विदेश से पहुंच रहे लोगों को यहां की संस्कृति से अवगत कराना मुख्य उद्देश्य है।
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- मनोज सेमवाल, प्रभारी निम, सोनप्रयाग