फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Now engineering's age over

इंजीनियरिंग का जमाना खत्म

Tue, 11 Jun 2013 11:13 AM IST
देहरादून/आफताब अजमत
देहरादून/आफताब अजमत Updated Tue, 11 Jun 2013 11:13 AM IST
विज्ञापन
Now engineering's age over

इंजीनियरिंग कोर्सेज के लिहाज से वक्त भारी उलटफेर वाला गुजर रहा है। कोर ब्रांचेज के समन्वय से तैयार की गई विस्तारित ब्रांचेज जितनी तेजी से ऊपर चढ़ीं, उतनी ही जल्दी इनका जमाना भी खत्म होने के कगार पर जा पहुंचा है। यही वजह है कि छात्रों के लिए तरस रही इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन (ईसी) और एप्लाइड इलेक्ट्रानिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन (एईआई) समेत कुछ विस्तारित इंजीनियरिंग ब्रांच को प्रदेश के पांच कालेजों ने नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में सरेंडर कर दिया है।

विज्ञापन


पर कोर ब्रांच का जलवा कायम
विस्तारित नई ब्रांचेज को लेकर छात्रों का रुझान भले तेजी से घट रहा हो, लेकिन एवरग्रीन मानी जाने वाली कोर (मुख्य) ब्रांचेज में दाखिले का क्रेज अब भी कायम है। इंजीनियरिंग की इन मूल ब्रांचों में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रानिक्स, कंप्यूटर साइंस शामिल हैं।
विज्ञापन

 
इन कालेजों ने छोड़ी ब्रांच
जीआरडी राजपुर रोड, देहरादून: एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन (एईआई) और इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी)
एमआईईटी कुमाऊं: इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ईसीई)
डीबीआईटी देहरादून: एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन( एईआई)
आम्रपाली इंस्टीट्यूट हल्द्वानी: इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन (ईआई)
शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून: आटोमोबाइल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

घाटे से उबरने की कवायद
इंजीनियरिंग कालेज में बीटेक की एक ब्रांच चलाने में चार साल में एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च आता है। छात्रों की बेहद कम संख्या के चलते कालेज संचालकों को भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। गत वर्ष एक कालेज अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मान्यता हासिल करने के बावजूद अपने यहां कोर्स इसलिए शुरू नहीं कर सका कि उसे छात्र नहीं मिले। ऐसी स्थिति इस वर्ष भी कुछ कालेजों के सामने आ गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे में घाटे से उबरने के लिए उन्होंने कोर्स बंद करने का फैसला किया है। कम छात्र संख्या और कोर्स संचालन में होने वाले अत्यधिक खर्च के चलते पांच कालेजों ने ब्रांच को सरेंडर किया है।

कुछ समय पूर्व कुछ कालेजों ने इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) ब्रांच छोड़ दी थी।
-डा. आशीष उनियाल, कुलसचिव, यूटीयू

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed