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तीन साल के अंदर खनन पर दूसरी बड़ी कार्रवाई
fatehpur
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:26 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जिले में मौरंग व पीली मिट्टी के अवैध खनन का मामला अमर उजाला लंबे समय से उठा रहा था। ऐरई घाट पर अवैध खनन को लेकर कई बार सवाल उठाए गए। इसके बाद अधिकारी आंखें बंद किए रहे। यमुना नदी में प्रशासनिक मिलीभगत से अवैध खनन होने का मामला पहली बार 12 दिसंबर को सदर विधायक विक्रम सिंह ने जाफरगंज इलाके में सात ओवरलोड ट्रक पकड़कर किया था। इसे अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद सिलसिलेवार कई खबरों ने खनन के इस खेल को खोल दिया। धाता ब्लाक के ऐरई घाट पर अवैध खनन की गहरी जड़ों का खुलासा लगातार हो रहा था। इससे तय था कि कभी भी इस खेल पर शासन की गाज गिर सकती है।
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जिले में अवैध खनन के प्रकरण पर शासन ने तीन साल के अंदर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई की है। खागा के एसडीएम अमित कुमार भट्ट, सीओ सुरेंद्र कुमार, धाता थाना के एसएचओ राजेश कुमार सिंह और खान अधिकारी अजय कुमार यादव को निलंबित करने और फतेहपुर के जिलाधिकारी कुमार प्रशांत और पुलिस अधीक्षक श्रीपर्णा गांगुली से भी स्पष्टीकरण मांगने से सनसनी फैल गई है। पहली बार सपा सरकार के कार्यकाल में बहुआ ब्लाक में अवैध खनन को लेकर शासन ने जिले के डीएम व खान अफसर सहित इलाहाबाद के कमिशभनर को संस्पेड कर दिया था। अब यही कार्रवाई भाजपा सरकार में होने से यह साफ हो गया कि अवैध खनन की जड़ें काफी गहरें हैं। छह जून 2015 में तत्कालीन सीएम अखिलेश सिंह यादव जिले में सपा नेता वीरन यादव के परिवार के एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। सपा नेताओं ने हेलीपैड में सीएम से अढ़ौली क्षेत्र में होने वाले अवैध खनन की जानकारी के साथ यमुना की बीच धारा में पुल बनाने की शिकायत की थी। सीएम ने इस मामले में कार्रवाई के संकेत दे दिए थे। अवैध खनन के मामले में जिले के डीएम राकेश कुमार व खनन अफसर सुरेंद्र कुमार सिंह के साथ तत्कालीन मंडलायुक्त को निलंबित कर दिया गया था। इस कार्रवाई के बाद खनन बंद हो गया था। जिस प्रकार इस साल भी खनन चल रहा था। हाल ही में सीएम योगी आदित्यनाथ ने ऐरई घाट के मामले में जिस प्रकार विधायकों से फीडबैक मांगते हुए रिपोर्ट देने का जिम्मा सौंपा। उससे यह तय था कि ऐसी ही कार्रवाई आगे भी होगी। जद में आने वाले अफसरों का बचना मुमकिन नहीं।
एक अफसर के जमीन खरीद की हो सकती है जांच
फतेहपुर। करोड़ों रुपये कीमत की जमीन करीब 22 लाख में खरीदने वाले एक अफसर की जांच भी हो सकती है। इस अफसर ने नवंबर महीने में परिवार की एक महिला के नाम नेशनल हाईवे पर जमीन खरीदी है। अफसर ने जमीन में एक और अधिकारी को पार्टनर बनाया है। एक ढाबे के पास का यह ढाई बीघे काभूखंड विवादित चल रहा था। अफसर ने इस पर हाथ लगाया और करोड़ों की जमीन लाखों में खरीद ली गई। इस बैनामे में एक स्कूल शिक्षक को गवाह बनाया गया है। खास बात तो यह है कि शिक्षक और अफसर में चोली-दामन का साथ इलाके में चर्चा का विषय भी है। ऐरई तुलसीपुर घाट में मौरंग खनन का मामले का पर्दाफाश होने के बाद जमीन खरीद का मामला भी सुर्खी बटोर रहा है। पर, यह माना जा रहा है कि अब इसकी भी जांच हो सकती है। जांच में रसूख का असर होगा या निष्पक्ष जांच यह तो समय की गर्त में है।
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विधायकों ने बुधवार को ही सीएम को सौंपे साक्ष्य
फतेहपुर। मौरंग खनन की शिकायत के मामले में बुधवार को जिले के दो विधायक सीएम आदित्यनाथ योगी से मिले। इन्हें पूरी रिपोर्ट के साथ बुलाया भी गया था। दोनों ने सीएम को अवैध खनन के साक्ष्यों का पुलिंदा सौंपा। साक्ष्य देखने के बाद सीएम ने मामले में बड़ी कार्रवाई का अंजाम किया। एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अवैध खनन में प्रमुख दोषी दो अधिकारी बचे हैं। अगला निशाना यह भी हो सकते हैं।
इतने बेपरवाह थे अफसर
फतेहपुर। 17 करोड़ के खनन का मामला सामने आने के बावजूद जिले के अफसरों का खनन माफियाओं से गठजोड़ नहीं टूटा। खनन प्रकरण पर 20 दिसंबर को कार्रवाई होने के महज चार दिन बाद ही अफसरों ने रात मेें मौरंग से लदे ट्रकों और पोकलैंड को जिले से बाहर करने में मदद की थी। गठजोड़ कितना तगड़ा था इसका अहसास अफसरों के हाईवे आकर वाहन पास कराने को लेकर किया जा सकता था। अमर उजाला ने इस प्रकरण को 24 दिसंबर के अंक में प्रकाशित भी किया था।
फतेहपुर। जिले में मौरंग व पीली मिट्टी के अवैध खनन का मामला अमर उजाला लंबे समय से उठा रहा था। ऐरई घाट पर अवैध खनन को लेकर कई बार सवाल उठाए गए। इसके बाद अधिकारी आंखें बंद किए रहे। यमुना नदी में प्रशासनिक मिलीभगत से अवैध खनन होने का मामला पहली बार 12 दिसंबर को सदर विधायक विक्रम सिंह ने जाफरगंज इलाके में सात ओवरलोड ट्रक पकड़कर किया था। इसे अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद सिलसिलेवार कई खबरों ने खनन के इस खेल को खोल दिया। धाता ब्लाक के ऐरई घाट पर अवैध खनन की गहरी जड़ों का खुलासा लगातार हो रहा था। इससे तय था कि कभी भी इस खेल पर शासन की गाज गिर सकती है।
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जिले में अवैध खनन के प्रकरण पर शासन ने तीन साल के अंदर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई की है। खागा के एसडीएम अमित कुमार भट्ट, सीओ सुरेंद्र कुमार, धाता थाना के एसएचओ राजेश कुमार सिंह और खान अधिकारी अजय कुमार यादव को निलंबित करने और फतेहपुर के जिलाधिकारी कुमार प्रशांत और पुलिस अधीक्षक श्रीपर्णा गांगुली से भी स्पष्टीकरण मांगने से सनसनी फैल गई है। पहली बार सपा सरकार के कार्यकाल में बहुआ ब्लाक में अवैध खनन को लेकर शासन ने जिले के डीएम व खान अफसर सहित इलाहाबाद के कमिशभनर को संस्पेड कर दिया था। अब यही कार्रवाई भाजपा सरकार में होने से यह साफ हो गया कि अवैध खनन की जड़ें काफी गहरें हैं। छह जून 2015 में तत्कालीन सीएम अखिलेश सिंह यादव जिले में सपा नेता वीरन यादव के परिवार के एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। सपा नेताओं ने हेलीपैड में सीएम से अढ़ौली क्षेत्र में होने वाले अवैध खनन की जानकारी के साथ यमुना की बीच धारा में पुल बनाने की शिकायत की थी। सीएम ने इस मामले में कार्रवाई के संकेत दे दिए थे। अवैध खनन के मामले में जिले के डीएम राकेश कुमार व खनन अफसर सुरेंद्र कुमार सिंह के साथ तत्कालीन मंडलायुक्त को निलंबित कर दिया गया था। इस कार्रवाई के बाद खनन बंद हो गया था। जिस प्रकार इस साल भी खनन चल रहा था। हाल ही में सीएम योगी आदित्यनाथ ने ऐरई घाट के मामले में जिस प्रकार विधायकों से फीडबैक मांगते हुए रिपोर्ट देने का जिम्मा सौंपा। उससे यह तय था कि ऐसी ही कार्रवाई आगे भी होगी। जद में आने वाले अफसरों का बचना मुमकिन नहीं।
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एक अफसर के जमीन खरीद की हो सकती है जांच
फतेहपुर। करोड़ों रुपये कीमत की जमीन करीब 22 लाख में खरीदने वाले एक अफसर की जांच भी हो सकती है। इस अफसर ने नवंबर महीने में परिवार की एक महिला के नाम नेशनल हाईवे पर जमीन खरीदी है। अफसर ने जमीन में एक और अधिकारी को पार्टनर बनाया है। एक ढाबे के पास का यह ढाई बीघे काभूखंड विवादित चल रहा था। अफसर ने इस पर हाथ लगाया और करोड़ों की जमीन लाखों में खरीद ली गई। इस बैनामे में एक स्कूल शिक्षक को गवाह बनाया गया है। खास बात तो यह है कि शिक्षक और अफसर में चोली-दामन का साथ इलाके में चर्चा का विषय भी है। ऐरई तुलसीपुर घाट में मौरंग खनन का मामले का पर्दाफाश होने के बाद जमीन खरीद का मामला भी सुर्खी बटोर रहा है। पर, यह माना जा रहा है कि अब इसकी भी जांच हो सकती है। जांच में रसूख का असर होगा या निष्पक्ष जांच यह तो समय की गर्त में है।
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विधायकों ने बुधवार को ही सीएम को सौंपे साक्ष्य
फतेहपुर। मौरंग खनन की शिकायत के मामले में बुधवार को जिले के दो विधायक सीएम आदित्यनाथ योगी से मिले। इन्हें पूरी रिपोर्ट के साथ बुलाया भी गया था। दोनों ने सीएम को अवैध खनन के साक्ष्यों का पुलिंदा सौंपा। साक्ष्य देखने के बाद सीएम ने मामले में बड़ी कार्रवाई का अंजाम किया। एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अवैध खनन में प्रमुख दोषी दो अधिकारी बचे हैं। अगला निशाना यह भी हो सकते हैं।
इतने बेपरवाह थे अफसर
फतेहपुर। 17 करोड़ के खनन का मामला सामने आने के बावजूद जिले के अफसरों का खनन माफियाओं से गठजोड़ नहीं टूटा। खनन प्रकरण पर 20 दिसंबर को कार्रवाई होने के महज चार दिन बाद ही अफसरों ने रात मेें मौरंग से लदे ट्रकों और पोकलैंड को जिले से बाहर करने में मदद की थी। गठजोड़ कितना तगड़ा था इसका अहसास अफसरों के हाईवे आकर वाहन पास कराने को लेकर किया जा सकता था। अमर उजाला ने इस प्रकरण को 24 दिसंबर के अंक में प्रकाशित भी किया था।