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परिश्रम की भट्ठी से निकले चैंपियन की कहानी: अभिज्ञान कुंडू ने लिखा स्वर्णिम इतिहास, मेहनत ऐसी कि किस्मत झुक गई
Sat, 07 Feb 2026 09:14 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sat, 07 Feb 2026 09:14 AM IST
सार
अभिज्ञान कुंडू की कहानी पांच हजार गेंदों, एक कोच के वादे और माता-पिता के भरोसे से बनी है। नन्ही उम्र से असाधारण मेहनत, दर्द से समझौता और हर हालात में ट्रेनिंग ने उन्हें भारत अंडर-19 का मजबूत स्तंभ बनाया। यह सफर साबित करता है कि सपने मेहनत से ही सच होते हैं।
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अभिज्ञान कुंडू
- फोटो : EspnCricinfo
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विस्तार
भारत अंडर-19 टीम ने इंग्लैंड को हराकर विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया है, और इस ऐतिहासिक जीत में अभिज्ञान कुंडू की भूमिका बेहद अहम रही। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने सात मैचों में पांच पारियां खेलीं, 239 रन बनाए, औसत 59.75 और स्ट्राइक रेट 87.54 रहा। उनके बल्ले से दो अर्धशतक निकले, लेकिन आंकड़ों से ज्यादा प्रभाव उनकी पारियों के समय ने डाला।
बांग्लादेश के खिलाफ जब टीम 53 रन पर तीन विकेट गंवाकर संकट में थी, तब कुंडू ने 80 रन बनाकर पारी को संभाला। इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ 61 रन और अमेरिका के खिलाफ नाबाद 40 रन की पारी खेली। ये सिर्फ रन नहीं थे, बल्कि इस बात का सबूत थे कि कम उम्र में भी वह हालात को पढ़ना और जिम्मेदारी लेना जानते हैं। उनकी बल्लेबाजी में दिखी यह मैच्योरिटी ही उन्हें टीम का भरोसेमंद खिलाड़ी बनाती है।
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बांग्लादेश के खिलाफ जब टीम 53 रन पर तीन विकेट गंवाकर संकट में थी, तब कुंडू ने 80 रन बनाकर पारी को संभाला। इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ 61 रन और अमेरिका के खिलाफ नाबाद 40 रन की पारी खेली। ये सिर्फ रन नहीं थे, बल्कि इस बात का सबूत थे कि कम उम्र में भी वह हालात को पढ़ना और जिम्मेदारी लेना जानते हैं। उनकी बल्लेबाजी में दिखी यह मैच्योरिटी ही उन्हें टीम का भरोसेमंद खिलाड़ी बनाती है।
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अभिज्ञान कुंडू और उनके कोच जाधव
- फोटो : ICC
क्रिकेट का जुनून
नवी मुंबई के वाशी इलाके में पले-बढ़े अभिज्ञान कुंडू बचपन से ही बेहद ऊर्जावान थे। दिन भर भागते-दौड़ते रहना, सोसायटी में खेलना उनकी दिनचर्या थी। स्कूल शिक्षकों ने उनके माता-पिता को सलाह दी कि इस ऊर्जा को किसी खेल में ढाला जाए। यहीं से अभिज्ञान की जिंदगी ने क्रिकेट की दिशा पकड़ ली और वह चेतन जाधव क्रिकेट अकादमी पहुंच गए, जहां एक बच्चे और एक कोच, दोनों के सपनों ने साथ उड़ान भरी।
नवी मुंबई के वाशी इलाके में पले-बढ़े अभिज्ञान कुंडू बचपन से ही बेहद ऊर्जावान थे। दिन भर भागते-दौड़ते रहना, सोसायटी में खेलना उनकी दिनचर्या थी। स्कूल शिक्षकों ने उनके माता-पिता को सलाह दी कि इस ऊर्जा को किसी खेल में ढाला जाए। यहीं से अभिज्ञान की जिंदगी ने क्रिकेट की दिशा पकड़ ली और वह चेतन जाधव क्रिकेट अकादमी पहुंच गए, जहां एक बच्चे और एक कोच, दोनों के सपनों ने साथ उड़ान भरी।
चेतन जाधव का अधूरा सपना
अकादमी संचालक चेतन जाधव पिछले दो दशकों से एक ही सपना देख रहे थे, 'भारत के लिए खेलना।' नवी मुंबई में उनके पास कई खिलाड़ी आए, लेकिन ज्यादातर इंजीनियरिंग या मेडिकल की राह पकड़कर क्रिकेट से दूर हो गए। खुद जाधव कहते हैं, 'मेरे पास कभी 44 इंजीनियर और पांच डॉक्टर ऐसे थे जो कभी मेरे खिलाड़ी थे।' ऐसे माहौल में जब अभिज्ञान उनके पास आए, तो जाधव को पहली बार लगा कि कोई बच्चा सच में क्रिकेट सीखना चाहता है।
अकादमी संचालक चेतन जाधव पिछले दो दशकों से एक ही सपना देख रहे थे, 'भारत के लिए खेलना।' नवी मुंबई में उनके पास कई खिलाड़ी आए, लेकिन ज्यादातर इंजीनियरिंग या मेडिकल की राह पकड़कर क्रिकेट से दूर हो गए। खुद जाधव कहते हैं, 'मेरे पास कभी 44 इंजीनियर और पांच डॉक्टर ऐसे थे जो कभी मेरे खिलाड़ी थे।' ऐसे माहौल में जब अभिज्ञान उनके पास आए, तो जाधव को पहली बार लगा कि कोई बच्चा सच में क्रिकेट सीखना चाहता है।
अभिज्ञान कुंडू और वेदांत त्रिवेदी
- फोटो : ICC
माता-पिता का भरोसा, कोच को आजादी
अभिज्ञान के माता-पिता, दोनों इंजीनियर, जाधव के पास आए और साफ कहा, 'आप इन्हें जैसे चाहें वैसे गढ़िए, हम दखल नहीं देंगे।' जाधव के शब्दों में, 'हां, दिला मला… त्यांनी मला दिला (उन्होंने मुझे बच्चा सौंप दिया)।' यही वह पल था जब एक कोच को अपने सपने की पहली मजबूत नींव दिखी।
अभिज्ञान के माता-पिता, दोनों इंजीनियर, जाधव के पास आए और साफ कहा, 'आप इन्हें जैसे चाहें वैसे गढ़िए, हम दखल नहीं देंगे।' जाधव के शब्दों में, 'हां, दिला मला… त्यांनी मला दिला (उन्होंने मुझे बच्चा सौंप दिया)।' यही वह पल था जब एक कोच को अपने सपने की पहली मजबूत नींव दिखी।
पांच साल की उम्र से रोज की तपस्या
अभिज्ञान महज पांच साल के थे, लेकिन हर दिन अकादमी पहुंचते। आठ साल की उम्र में जाधव ने माता-पिता को साफ कहा कि अगर क्रिकेट को प्रोफेशन बनाना है तो सामान्य ट्रेनिंग से आगे जाना होगा। इसके बाद अभिज्ञान का दिन 9:30 सुबह से रात 11 बजे तक क्रिकेट के नाम हो गया। अकादमी, फिर घर के नीचे लगाए गए नेट्स और रोज हजारों गेंदें।
अभिज्ञान महज पांच साल के थे, लेकिन हर दिन अकादमी पहुंचते। आठ साल की उम्र में जाधव ने माता-पिता को साफ कहा कि अगर क्रिकेट को प्रोफेशन बनाना है तो सामान्य ट्रेनिंग से आगे जाना होगा। इसके बाद अभिज्ञान का दिन 9:30 सुबह से रात 11 बजे तक क्रिकेट के नाम हो गया। अकादमी, फिर घर के नीचे लगाए गए नेट्स और रोज हजारों गेंदें।
अभिज्ञान कुंडू
- फोटो : ICC
5000 गेंदें और दर्द से दोस्ती
चेतन जाधव ने शुरू से अभिज्ञान को रोज करीब 5000 गेंदें खिलाईं। आज भी वह कम से कम 1000-1500 गेंदें खेले बिना ट्रेनिंग खत्म नहीं करते। पीठ दर्द, कलाई की चोट, यहां तक कि टाइफाइड में भी उन्होंने मैच खेले और दो-दो दोहरे शतक जड़ दिए। जाधव का साफ लक्ष्य था, 'इतना तैयार कर दूं कि बिना किसी सिफारिश के आगे बढ़े।'
चेतन जाधव ने शुरू से अभिज्ञान को रोज करीब 5000 गेंदें खिलाईं। आज भी वह कम से कम 1000-1500 गेंदें खेले बिना ट्रेनिंग खत्म नहीं करते। पीठ दर्द, कलाई की चोट, यहां तक कि टाइफाइड में भी उन्होंने मैच खेले और दो-दो दोहरे शतक जड़ दिए। जाधव का साफ लक्ष्य था, 'इतना तैयार कर दूं कि बिना किसी सिफारिश के आगे बढ़े।'
रिकॉर्ड्स की बारिश
जाधव आज भी अभिज्ञान के हर क्लब मैच का स्कोरकार्ड संभालकर रखते हैं। उनके मुताबिक अभिज्ञान अब तक 125 शतक लगा चुके हैं, जिनमें 15 दोहरे शतक, दो तिहरे शतक और दो 400+ स्कोर शामिल हैं। इंडिया अंडर-19 में आने से पहले वह 722 क्लब मैच खेल चुके थे, जो अपने आप में असाधारण है।
जाधव आज भी अभिज्ञान के हर क्लब मैच का स्कोरकार्ड संभालकर रखते हैं। उनके मुताबिक अभिज्ञान अब तक 125 शतक लगा चुके हैं, जिनमें 15 दोहरे शतक, दो तिहरे शतक और दो 400+ स्कोर शामिल हैं। इंडिया अंडर-19 में आने से पहले वह 722 क्लब मैच खेल चुके थे, जो अपने आप में असाधारण है।
अभिज्ञान कुंडू
- फोटो : BCCI
हर हालात की तैयारी
बारिश हो या चिलचिलाती धूप, कीचड़ भरे मैदान हों या इनडोर की मनाही, अभिज्ञान और उनके कोच ने कभी हालात को बहाना नहीं बनने दिया। जाधव कहते हैं, 'कोई स्थिति नहीं, जिसके लिए हमने ट्रेनिंग न की हो।'
बारिश हो या चिलचिलाती धूप, कीचड़ भरे मैदान हों या इनडोर की मनाही, अभिज्ञान और उनके कोच ने कभी हालात को बहाना नहीं बनने दिया। जाधव कहते हैं, 'कोई स्थिति नहीं, जिसके लिए हमने ट्रेनिंग न की हो।'
उम्र से पहले परिपक्वता
14 साल की उम्र में अभिज्ञान ने मुंबई अंडर-16 के लिए डेब्यू किया और विजय मर्चेंट ट्रॉफी में 690 रन बनाकर शीर्ष स्कोरर रहे। अगले ही सीजन में मुंबई अंडर-19 के साथ खिताब जीता। दिसंबर 2024 में भारत अंडर-19 कॉल आया और दूसरी ही पारी में अर्धशतक, यह सफर रुकने वाला नहीं था।
14 साल की उम्र में अभिज्ञान ने मुंबई अंडर-16 के लिए डेब्यू किया और विजय मर्चेंट ट्रॉफी में 690 रन बनाकर शीर्ष स्कोरर रहे। अगले ही सीजन में मुंबई अंडर-19 के साथ खिताब जीता। दिसंबर 2024 में भारत अंडर-19 कॉल आया और दूसरी ही पारी में अर्धशतक, यह सफर रुकने वाला नहीं था।
अभिज्ञान कुंडू
- फोटो : Twitter
तिरंगे के सामने टूट पड़ा कोच
जब अभिज्ञान इंडिया अंडर-19 के लिए चुने गए, तो जाधव को लगा जैसे सब कुछ सामान्य है। लेकिन जब उन्होंने अपने खिलाड़ी को बीसीसीआई का लोगो पहने सामने देखा, तो भावनाएं टूट पड़ीं। जाधव कहते हैं, 'मैं बस खड़ा रहा और रोता रहा… मेरी पूरी जिंदगी उसी लोगो के लिए थी।'
जब अभिज्ञान इंडिया अंडर-19 के लिए चुने गए, तो जाधव को लगा जैसे सब कुछ सामान्य है। लेकिन जब उन्होंने अपने खिलाड़ी को बीसीसीआई का लोगो पहने सामने देखा, तो भावनाएं टूट पड़ीं। जाधव कहते हैं, 'मैं बस खड़ा रहा और रोता रहा… मेरी पूरी जिंदगी उसी लोगो के लिए थी।'
टीम में शांत योद्धा
जहां वैभव सूर्यवंशी और आयुष म्हात्रे सुर्खियां बटोरते रहे, वहीं अभिज्ञान ने अहम मौकों पर जिम्मेदारी निभाई, ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 87*, बांग्लादेश के खिलाफ मुश्किल हालात में 80 रन, और एशिया कप में नाबाद 209। आज वह भारत अंडर-19 के भरोसेमंद स्तंभ हैं।
जहां वैभव सूर्यवंशी और आयुष म्हात्रे सुर्खियां बटोरते रहे, वहीं अभिज्ञान ने अहम मौकों पर जिम्मेदारी निभाई, ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 87*, बांग्लादेश के खिलाफ मुश्किल हालात में 80 रन, और एशिया कप में नाबाद 209। आज वह भारत अंडर-19 के भरोसेमंद स्तंभ हैं।
एक शहर, एक देश का सपना
वाशी की उस सोसायटी से लेकर देशभर के क्रिकेटप्रेमियों तक, अभिज्ञान कुंडू अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि मेहनत, भरोसे और धैर्य की मिसाल हैं। पिता अभिषेक कहते हैं कि काम में व्यस्त रहते हुए भी सोसायटी के लोग उन्हें हर रन की खबर देते हैं। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं, बल्कि उस सपने की कहानी है जो हर दिन हजारों गेंदों के साथ जिया गया।
वाशी की उस सोसायटी से लेकर देशभर के क्रिकेटप्रेमियों तक, अभिज्ञान कुंडू अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि मेहनत, भरोसे और धैर्य की मिसाल हैं। पिता अभिषेक कहते हैं कि काम में व्यस्त रहते हुए भी सोसायटी के लोग उन्हें हर रन की खबर देते हैं। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं, बल्कि उस सपने की कहानी है जो हर दिन हजारों गेंदों के साथ जिया गया।