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Yashasvi Jaiaswal: कभी ग्लूकोज बिस्किट खाकर जिंदा रहा यह क्रिकेटर, करोड़पति बनने के बाद बोला- मैं अभी भी नहीं बदला
Tue, 14 Jun 2022 10:22 AM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Tue, 14 Jun 2022 10:22 AM IST
सार
यशस्वी जायसवाल का कहना है कि वो मानसिक रूप से बहुत मजबूत हैं कि क्योंकि अपने शुरुआती जीवन में उन्हें हमेशा ही किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना पड़ता था। इस वजह से वो कभी भी कुछ खोने की चिंता नहीं करते।
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यशस्वी जायसवाल
- फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
रणजी ट्रॉफी 2022 में मुंबई की टीम सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है। इस टीम के लिए पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी 21 साल के यशस्वी जायसवाल के ऊपर है। यशस्वी छोटी उम्र में ही भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। अंडर 19 विश्व कप से लेकर रणजी ट्रॉफी और आईपीएल में भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी का जलवा दिखाया है। वह अपने संघर्ष की वजह से भी काफी चर्चा में रहे हैं। रणजी ट्रॉफी में उनकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद एक बार फिर यशस्वी ने अपने पुराने दिनों को याद किया है।
यशस्वी ने बताया है कि वो करियर के शुरुआती दिनों में काफी मुश्किलों में रहे थे। उनके लिए सब कुछ बहुत अनिश्चित था। ऐसा लगता था कि कभी भी सब कुछ खत्म हो सकता है और उनका भारत के लिए खेलने का सपना टूट जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने संघर्ष जारी रखा और पहले अंडर 19 फिर आईपीएल में अपनी बल्लेबाजी का जलवा दिखाया। अपने शुरुआती संघर्ष की वजह से यशस्वी मानसिक रूप से बहुत मजबूत हो चुके हैं और अब उन्हें किसी चीज को खोने का डर नहीं लगता।
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यशस्वी ने बताया है कि वो करियर के शुरुआती दिनों में काफी मुश्किलों में रहे थे। उनके लिए सब कुछ बहुत अनिश्चित था। ऐसा लगता था कि कभी भी सब कुछ खत्म हो सकता है और उनका भारत के लिए खेलने का सपना टूट जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने संघर्ष जारी रखा और पहले अंडर 19 फिर आईपीएल में अपनी बल्लेबाजी का जलवा दिखाया। अपने शुरुआती संघर्ष की वजह से यशस्वी मानसिक रूप से बहुत मजबूत हो चुके हैं और अब उन्हें किसी चीज को खोने का डर नहीं लगता।
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छोटी उम्र में पहुंचे मुंबई
यशस्वी जायसवाल लगभग 11 साल की उम्र में क्रिकेटर बनने के लिए यूपी के भदोही से निकलकर मुंबई आ गए थे। उनके पास रहने के लिए घर नहीं था। खाने के लिए पैसे नहीं होते थे। किराये पर घर लेने के लिए पैसे भी नहीं थे। ऐसे में वो टेंट में सोते थे। कई बार तो सिर्फ ग्लूकोज बिस्किट खाकर पूरा दिन गुजारना पड़ता था। पेट पालने के लिए वो मैदान के पास पानी पूरी बेचते थे। अब यशस्वी के पास पैसे की समस्या नहीं है। उनका मानना है कि उन्होंने अपने परिवार को गरीबी के दलदल से बाहर निकाला है और यह उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। अब उनके माता-पिता आरामदायक जीवन जी रहे हैं।
यशस्वी जायसवाल लगभग 11 साल की उम्र में क्रिकेटर बनने के लिए यूपी के भदोही से निकलकर मुंबई आ गए थे। उनके पास रहने के लिए घर नहीं था। खाने के लिए पैसे नहीं होते थे। किराये पर घर लेने के लिए पैसे भी नहीं थे। ऐसे में वो टेंट में सोते थे। कई बार तो सिर्फ ग्लूकोज बिस्किट खाकर पूरा दिन गुजारना पड़ता था। पेट पालने के लिए वो मैदान के पास पानी पूरी बेचते थे। अब यशस्वी के पास पैसे की समस्या नहीं है। उनका मानना है कि उन्होंने अपने परिवार को गरीबी के दलदल से बाहर निकाला है और यह उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। अब उनके माता-पिता आरामदायक जीवन जी रहे हैं।
यशस्वी जायसवाल
- फोटो : सोशल मीडिया
अभी भी नहीं बदले हैं यशस्वी
यशस्वी जायसवाल ने बताया कि उनके संघर्ष के दिन हमेशा ही उन्हें प्रेरणा देंगे। अब उनके सामने कोई अर्थिक समस्या नहीं है, लेकिन उनके सोचने का तरीका नहीं बदला है। उन्हें पता है कि कितनी मेहनत और लगन के बाद सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि वो जैसे पहले थे, वैसे ही आज भी हैं और न ही कभी बदलेंगे। वो अब तक जैसे सोचते आए हैं, आगे भी वैसे ही सोचेंगे।
अंडर 19 विश्व कम में कमाल कर चमके
यशस्वी ने 2020 अंडर 19 विश्व कप में कमाल का प्रदर्शन किया था। उन्होंने छह मैचों में 400 रन बनाए थे और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे। विस्फोटक अंदाज में पारी की शुरुआत करने वाले पृथ्वी लंबी पारियां खेलने में भी माहिर हैं। इसके अलावा वो उपयोगी स्पिन गेंदबाजी भी कर लेते हैं। अंडर 19 विश्व कप के दौरान उनकी कवर ड्राइव और कट शॉट काफी चर्चा में रहा था। आईपीएल के इस सीजन उन्होंने जोस बटलर के साथ मिलकर कई बेहतरीन साझेदारियां की और राजस्थान की टीम को फाइनल तक पहुंचाने में योगदान दिया। हालांकि, उनकी टीम फाइनल नहीं जीत सकी, लेकिन जायसवाल धीरे-धीरे टीम इंडिया में अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।
यशस्वी जायसवाल ने बताया कि उनके संघर्ष के दिन हमेशा ही उन्हें प्रेरणा देंगे। अब उनके सामने कोई अर्थिक समस्या नहीं है, लेकिन उनके सोचने का तरीका नहीं बदला है। उन्हें पता है कि कितनी मेहनत और लगन के बाद सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि वो जैसे पहले थे, वैसे ही आज भी हैं और न ही कभी बदलेंगे। वो अब तक जैसे सोचते आए हैं, आगे भी वैसे ही सोचेंगे।
अंडर 19 विश्व कम में कमाल कर चमके
यशस्वी ने 2020 अंडर 19 विश्व कप में कमाल का प्रदर्शन किया था। उन्होंने छह मैचों में 400 रन बनाए थे और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे। विस्फोटक अंदाज में पारी की शुरुआत करने वाले पृथ्वी लंबी पारियां खेलने में भी माहिर हैं। इसके अलावा वो उपयोगी स्पिन गेंदबाजी भी कर लेते हैं। अंडर 19 विश्व कप के दौरान उनकी कवर ड्राइव और कट शॉट काफी चर्चा में रहा था। आईपीएल के इस सीजन उन्होंने जोस बटलर के साथ मिलकर कई बेहतरीन साझेदारियां की और राजस्थान की टीम को फाइनल तक पहुंचाने में योगदान दिया। हालांकि, उनकी टीम फाइनल नहीं जीत सकी, लेकिन जायसवाल धीरे-धीरे टीम इंडिया में अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।