विश्व कप के अपने पहले मैच में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को मात दी। इस मुकाबले के बाद टीम की जीत से ज्यादा जो एक बात चर्चाओं में है, वह है एमएस धोनी के विकेटकीपिंग गलव्स। धोनी उस मैच में ऐसे दस्ताने पहनकर उतरे जिसपर भारतीय सेना के प्रतीक चिन्हों में से एक 'बलिदान बैज' नजर आ रहा था। पहले आईसीसी ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन पहले पूरे देश और बाद में धोनी के साथ बीसीसीआई का कड़ा देख अपने तेवर नरम कर लिए।
आइए जानते हैं ऐसे मामलों पर क्या कहता है आईसीसी का नियम
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बलिदान बैज के साथ धोनी
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इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के लोगो और ड्रेस कोड के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी तय ड्रेस या किट से छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। यहां तक कि उस पर किसी प्रकार का दूसरा रंग भी नहीं इस्तेमाल किया जा सकता। ड्रेस पूरी तरह से साफ होनी चाहिए और उसके रंग में भी कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
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बलिदान बैज के साथ एमएस धोनी
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नियमों के मुताबिक किसी भी खिलाड़ी, बोर्ड या फिर संस्थान को किसी विशेष लोगो या बदलाव के लिए पहले से अनुमति मांगनी होगी। आईसीसी से अप्रूवल मिलने के बाद ही ड्रेस में कुछ बदलाव के साथ प्लेयर मैदान में उतर सकता है।
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धोनी ग्लव्स
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आईसीसी के मुताबिक किसी भी प्लेयर को तीन से ज्यादा लोगो अपनी ड्रेस पर इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। ग्लव्स पर सिर्फ मैन्युफैक्चरर का ही लोगो हो सकता है। खिलाड़ी और टीम के अधिकारियों को आर्म बैंड या ड्रेस के जरिए कोई भी निजी मेसेज देने की अनुमति नहीं है। हालांकि आईसीसी के क्रिकेट ऑपरेशंस डिपार्टमेंट से अनुमति लेने के बाद ऐसा किया जा सकता है।
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बलिदान बैज के साथ धोनी
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आईसीसी के नियमों के मुताबिक किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक संदेश को जारी के लिए अनुमति नहीं मिल सकती। संदेह को खत्म करते हुए आईसीसी ने यह भी अपने नियमों में स्पष्ट किया है कि यदि कोई बोर्ड या टीम किसी संदेश को लेकर मंजूरी देती है और आईसीसी असहमत है तो फिर अंतिम निर्णय अंतरराष्ट्रीय संस्था का ही माना जाएगा।