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चाचा ने रणजी तो भतीजे ने बनाया विजय मर्चेंट विजेता
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
Updated Mon, 28 Jan 2013 10:05 PM IST
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मुंबई में 15 साल का यह लड़का अभी से स्टार है। हो भी क्यों नहीं आखिर गाइल्स शील्ड में 498 रनों की सबसे बड़ी पारी उनके नाम है। यह बात भी दो साल पुरानी हो चली है लेकिन तब से अरमान जाफर का बल्ला लगातार रन उगल रहा है।
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हाल यह है कि मुंबई के लिए इस साल अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्रॉफी में उन्होंने एक हजार से ऊपर रन स्कोर कर अपनी टीम को आठ साल बाद चैंपियन बनाया। यह इत्तेफाक है कि अरमान ने जहां दिल्ली के खिलाफ 290 रनों की पारी खेल मुंबई को विजय मर्चेंट ट्रॉफी दिलाई। वहीं उनके चाचा वसीम जाफर के शतक ने मुंबई को रणजी चैंपियन बनाने में मुख्य भूमिका अदा की।
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कलीम जाफर वह इंसान हैं जिन्होंने छोटे भाई वसीम को क्रिकेट की बारीकियां सिखा देश के लिए खिलाया। अब यही काम वह अपने बेटे अरमान के लिए कर रहे हैं। सेंट स्टीफंस ग्राउंड पर विजय मर्चेंट इतिहास की सबसे बड़ी पारी खेलने के बावजूद उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे।
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सोमवार को टीम विजेता बनी तो पूरी टीम ने उन्हें गोद में उठा लिया। लेकिन वह शांत रहे। ‘अरमान ऐसा ही है। उस पर भावनाएं हावी नहीं होतीं। परिवार के सदस्य उससे परिपक्व बातें करते हैं। वह क्रिकेट का मजा लूट रहा है। मैंने उससे कहा है जिस दिन क्रिकेट में मजा नहीं आए छोड़ देना। उस पर अभी काम करना है, एसजी गेंद से प्रैक्टिस करानी है।’ शांत अंदाज में कलीम बेटे के बारे में बताते हैं।
रिजवी स्प्रिंगडेल्स स्कूल में नौवीं के छात्र अरमान के मुताबिक उन्होंने सात साल में क्रिकेट शुरू की। सुबह साढ़े छह बजे पापा के साथ उनका तीन घंटे का सत्र शुरू होता है। इसके बाद वह तीन घंटे और लगाते हैं। कलीम खुलासा करते हैं कि अरमान अपने चाचा वसीम से काफी प्रभावित है। लेकिन वसीम ने व्यवस्तताओं के चलते उसे अब तक खेलते नहीं देखा है। अरमान को भी इसका दुख नहीं है।
मुंबई टीम के कोच अरमान मलिक बताते हैं उससे जितनी भी मेहनत करा लो। वह पीछे नहीं हटता है। समय से पहले पहुंचकर प्रैक्टिस करना उसकी आदत है। अरमान तो यहां तक कहते हैं कि यह अरमान जल्द ऊपर की क्रिकेट में धूम मचाएगा।