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Amar Ujala Samvad 2023: वीरेंद्र सहवाग ने बताया- टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल क्यों हारा भारत? रोहित ने क्या गलती की
Mon, 19 Jun 2023 11:31 AM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Mon, 19 Jun 2023 11:31 AM IST
सार
अमर उजाला संवाद 2023 के मन की जीत सत्र में वीरेंद्र सहवाग ने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भारतीय टीम की हार के कारण बताए। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे टीम इंडिया इसी साल होने वाले विश्व कप के लिए तैयारी कर सकती है।
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वीरेंद्र सहवाग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमर उजाला संवाद 2023 के मन की जीत सत्र में वीरेंद्र सहवाग ने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में भारतीय टीम की हार की वजह बताई। उन्होंने कहा कि हमारे बल्लेबाजों ने उतने रन नहीं बनाए। अश्विन का नहीं खेलना भी इसकी बड़ी वजह रही। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि 2011 विश्व कप जीतने के लिए भारतीय टीम ने कैसी तैयारी की थी और उससे मौजूदा टीम इंडिया क्या सीख ले सकती है। सहवाग ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों से जुड़े कुछ मजेदार किस्से भी सुनाए। वहीं, युवा खिलाड़ियों को लेकर उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। आपको मेहनत करनी पड़ेगी, तभी आप सफल होंगे। अमर उजाला के साथ बातचीत के कुछ खास अंश...
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सुमित अवस्थी: नजफगढ़ के नवाब आजकल ट्विटर के बादशाह हैं। ट्वीट खुद करते हैं या किसी से करवाते है?
वीरेंद्र सहवाग: कुछ मैं करता हूं, कुछ मेरे फैन्स भेज देते हैं। मुझे लगता नहीं था कि मैं इतना फनी हूं। कभी लगा नहीं था कि मैं कुछ लिखूंगा तो लोगों को पसंद आएगा। मेरी अंग्रेजी अच्छी नहीं है। हिंदी से अंग्रेजी में मैं अच्छे से अनुवाद नहीं कर सकता। जब मैंने क्रिकेट छोड़ा तो मैंने सोचा कि हम एक ही क्रिकेटर का जन्मदिन शौक से मनाते हैं, वो हैं सचिन तेंदुलकर। तो मैंने सोचा कि सबके मनाने चाहिए। तो मेरा पहला ट्वीट था कि जब रोहित शर्मा पैदा हुए होंगे तो डॉक्टर ने कहा होगा कि लड़का नहीं, हिटमैन पैदा हुआ है। ये बातें हम ड्रेसिंग रूम में भी करते थे।
सुमित अवस्थी: हम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल हारे, तो लगा कि आखिर टीम में अश्विन क्यों नहीं थे? दिक्कत कहां पर हुई?
वीरेंद्र सहवाग: हम इसलिए हारे क्योंकि हमारे बल्लेबाजों ने उतने रन बनाए ही नहीं। अगर अश्विन वर्ल्ड के नंबर वन टेस्ट गेंदबाज हैं तो उन्हें खिलाया जाना चाहिए था। नैथन लॉयन ने काफी विकेट लिए। हमारे बल्लेबाज पंद्रह-बीस, तीस-चालीस रन बनाकर आउट हुए। आपको वर्ल्ड कप जीतना है तो बड़े स्कोर बनाने होंगे। पहली पारी में चार-पांच सौ रन बनाने पड़ते हैं। अगर ऑस्ट्रेलिया ने 450 रन बनाए थे तो भारत को उसके आसपास रहना था। मैं बल्लेबाजी की ज्यादा गलती मानूंगा। यह डिबेट का मुद्दा है कि कप्तान को ऑफ स्पिनर पसंद है या नहीं। कभी मैनेजमेंट फैसले करता है कि हम जडेजा के साथ जाएंगे, अश्विन के साथ नहीं। कहीं न कहीं वह चूक हुई है टीम मैनेजमेंट से।
सुमित अवस्थी: कप्तान खुद बल्लेबाज हैं। क्यों भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी नहीं की। क्या आपको लगता है कि हम डर गए बल्लेबाजी चुनने में?
वीरेंद्र सहवाग: मुझे लगता है कि वह अकेले रोहित शर्मा का फैसला नहीं होगा। कोच, बल्लेबाज जाते हैं, वो देखते हैं। वे मौसम देखते हैं। लेकिन वह बड़ा हिम्मत वाला फैसले वाला होता कि हम घास देखकर भी बल्लेबाजी चुनें। अगर मैं वहां होता तो बतौर कप्तान मैं भी यही फैसला लेता कि टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनता। अगर कुछ होना था तो पहले दिन के पहले सत्र में ही होना था।
सुमित अवस्थी: हमने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी होती तो क्या टीम वही होती?
वीरेंद्र सहवाग: एक स्पिनर ही खेल सकता था। वह फैसला शायद टीम ने पहले ही कर लिया होगा। मुझे लगता है कि हम एक ही स्पिनर के साथ जाएंगे। और एक ऑलराउंडर बैट्समैन को मौका देंगे। शार्दूल ठाकुर को मौका देने का फैसला तो सही था। अब यह चर्चा का विषय है कि जडेजा सही रहते या अश्विन।
सुमित अवस्थी: बार-बार कहा जा रहा है कि आईपीएल की वजह से दिक्कत हो रही है। हमारी टीम के ज्यादातर खिलाड़ी आखिरी मैच तक आईपीएल खेलते रहे।
वीरेंद्र सहवाग: मेरे हिसाब से मैच प्रैक्टिस ही बेस्ट प्रैक्टिस होती है। भले ही वह 20 ओवर का मैच हो। वहां स्किल्स की प्रैक्टिस होती है। शुभमन गिल, मोहम्मद शमी, रवींद्र जडेजा आईपीएल फाइनल खेल रहे थे। बाकी टीम तो इंग्लैंड पहुंच चुकी थी। तीन खिलाड़ियों को आठ दिन मिल गए थे। ये जरूर हो सकता कि ज्यादा दिन मिलते या प्रैक्टिस मैच होता तो टीम को फायदा होता। जब टीम विदेश जाती है तो प्रैक्टिस मैच खेलती है। फिर टेस्ट या वनडे शुरू होते हैं।
सुमित अवस्थी: शुभमन गिल बहुत चल रहे थे। आईपीएल में शतक बनाए। वहां जाकर दोनों ही पारी में नहीं चले। क्या इन फॉर्म बल्लेबाज की रिदम टूट गई?
वीरेंद्र सहवाग: आईपीएल अलग टूर्नामेंट है। टेस्ट मैच अलग होता है। वहां सब्र का टेस्ट होता है। हालांकि, खिलाड़ियों को इसकी आदत रहती है। वे भी युवा खिलाड़ी हैं। वे भी गलतियों से सीखेंगे। ऐसा नहीं है कि वे खराब खिलाड़ी हैं। आप किसी भी खिलाड़ी का रिकॉर्ड देखेंगे तो पता चलेगा कि कोई भी इतना कजिस्टेंट नहीं है। वहां सिर्फ अजिंक्य रहाणे ने रन बनाए। वहां कन्वर्ट नहीं कर पाए बड़े स्कोर में। मैं नहीं मानता कि रेड बॉल या व्हाइट बॉल की वजह से कोई दिक्कत है।
सुमित अवस्थी: अगर आप चीफ सिलेक्टर होते तो किस खिलाड़ी पर गाज गिरती? कप्तान से कुछ कहते?
वीरेंद्र सहवाग: एक टेस्ट के लिए किसी को सजा नहीं दे सकते। मैं यह जरूर पूछता कि हुआ क्या। क्यों प्रदर्शन खराब हुआ। हम सीनियर्स को इसलिए रखते हैं ताकि मुश्किल हालात में वे रन बनाएं। युवा खिलाड़ी को तो समय लगता है। सीनियर का शॉट सिलेक्शन क्यों खराब हुआ। यह जरूर पूछता। एक टेस्ट की वजह से कप्तान को कुछ कहना गलत होता। हमने बाकी टीमों को हराया था। जब भारत में टीमें आती हैं तो वे हमें हरा नहीं पातीं आसानी से। जब हम बाहर जाते हैं तो हमारे साथ भी यही होता है। हालांकि, हमने दूसरे देशों को उनकी जमीन पर हराया है। हमने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराया था। यह एक टेस्ट था, जिसे हमें भूल जाना चाहिए। हम कोई पहली और आखिरी बार नहीं हारे। हार-जीत खेल का हिस्सा है। हम बेहतर तैयारी के साथ जा सकते हैं, बेहतर कोशिश कर सकते हैं। हम भारतीय प्रशंसक हैं, मैं भी निराश हुआ हूं। जब टीम हारती है, तभी आपको सपोर्ट चाहिए होता है।
सुमित अवस्थी: आईसीसी टूर्नामेंट में भारत के साथ क्या दिक्कत होती है?
वीरेंद्र सहवाग: एक ही मैच है, जिसमें हम हार जाते हैं, वह है नॉकआउट मैच। प्रेशर गेम शायद इतना ज्यादा होता है कि हम वह दबाव नहीं ले पाते हैं। हमारा बोर्ड अमीर जरूरत है, लेकिन अगर पैसे से सबकुछ खरीदा जाता तो हम बहुत सारी ट्र्रॉफियों का ढेर लगा देते। अगर किसी भी खिलाड़ी से पूछेंगे कि पैसे चाहते हो या देश के लिए खेलना चाहते हो तो वह देश को चुनेगा। नॉकआउट मैच से उबरना जरूरी है। यह इस साल की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी उम्मीद यही है। 2011 में किसी भी होटल या मैदान पर लोग यही कहता था कि इस बार तो जीतना ही है। यह स्थिति फिर आएगी। हमने 2008 से 2011 के विश्व कप तैयारी की थी। तब कोच गैरी कस्टर्न ने कहा था कि अब हम जो भी मैच खेलेंगे, वह नॉकआउट मैच होगा। हर नॉकआउट मैच हमें जीतना है। तभी हम तैयारी कर पाए।
सुमित अवस्थी: गैरी कस्टर्न बेहतरी कोच थे। आजकल राहुल द्रविड़ कोच कर रहे हैं। उन्हें कैसे देखते हैं?
वीरेंद्र सहवाग: मुझे लगता है कि राहुल तो गैरी कस्टर्न के अंडर खेले हैं, लेकिन कोच आपको विश्व कप नहीं जिताते। गैरी कस्टर्न ने सिर्फ दोस्त की तरह मुझे समझाया कि आपका रोल क्या है। वे कहते थे कि चार ओवर खेलो और तीस रन बना दो। वे जानते थे कि चार ओवर में मेरे तीस रन से आने वाले बल्लेबाजों के लिए मैच अच्छा होगा। राहुल द्रविड़ को भी यह टीम ही बेहतर कोच बनाएगी। राहुल जो कर सकते हैं, वो कर रहे हैं। आखिर में परफॉर्म तो खिलाड़ियों को करना है। ऐसा नहीं है कि गैरी कस्टर्न जहां-जहां गए, वहां उन्होंने टीम को जीत दिलाई। भारत के बाद वे जहां गए, वहां टीमें हारी भी हैं। वे कोच कम, दोस्त ज्यादा थे। वे जानते थे कि वीरेंद्र सहवाग को कौन सा गाना पसंद है, वह गाना वे ड्रेसिंग रूम में बजवाते थे।
सुमित अवस्थी: बच्चों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
वीरेंद्र सहवाग: आठवीं क्लास से आप सीधे कॉलेज नहीं जा सकते। स्पोर्ट्स में भी बहुत साल लगते हैं। आज विराट कोहली भी परफेक्ट नहीं हुए। वे भी गलती करके आउट हो जाते हैं। मेहनत आपके हाथ में है, स्किल सुधारना आपके हाथ में है। मैं अंडर-14, 15, 16, 17 कुछ नहीं खेला। बाद में मुझे मौके मिले और मैं रन बनाते चला गया। मैं एक स्कूल चलाता हूं। उसमें मैं सिर्फ सुविधा दे सकता हूं।
सुमित अवस्थी: कोई खिलाड़ी कैसे वीरेंद्र सहवाग बनता है। कितनी देर प्रैक्टिस करते थे?
वीरेंद्र सहवाग: मैंने प्रैक्टिस कम की, मैंने बसों में धक्के ज्यादा खाए हैं। ढाई घंटे बस में बैठकर 12 मिनट की बैटिंग करने को मिलती थी। मैं फील्डिंग की प्रैक्टिस करता था। मेहनत तो मैदान पर दूसरों से ज्यादा ही करता था। जिस दिन आपका दिन हो, उस दिन आपको आउट नहीं होना है। चेन्नई में जब मैच था, उस दिन मैंने कहा कि भगवान आज अगर मेरा दिन है तो दक्षिण अफ्रीका टीम तो गई। उस दिन मैंने 309 रन बनाए। मैं बच्चों से भी कहता हूं कि ऐसी नौबत न आए कि बाप को सिफारिश करनी पड़े। मेरे दो बेटे हैं।
वीरेंद्र सहवाग: कुछ मैं करता हूं, कुछ मेरे फैन्स भेज देते हैं। मुझे लगता नहीं था कि मैं इतना फनी हूं। कभी लगा नहीं था कि मैं कुछ लिखूंगा तो लोगों को पसंद आएगा। मेरी अंग्रेजी अच्छी नहीं है। हिंदी से अंग्रेजी में मैं अच्छे से अनुवाद नहीं कर सकता। जब मैंने क्रिकेट छोड़ा तो मैंने सोचा कि हम एक ही क्रिकेटर का जन्मदिन शौक से मनाते हैं, वो हैं सचिन तेंदुलकर। तो मैंने सोचा कि सबके मनाने चाहिए। तो मेरा पहला ट्वीट था कि जब रोहित शर्मा पैदा हुए होंगे तो डॉक्टर ने कहा होगा कि लड़का नहीं, हिटमैन पैदा हुआ है। ये बातें हम ड्रेसिंग रूम में भी करते थे।
सुमित अवस्थी: हम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल हारे, तो लगा कि आखिर टीम में अश्विन क्यों नहीं थे? दिक्कत कहां पर हुई?
वीरेंद्र सहवाग: हम इसलिए हारे क्योंकि हमारे बल्लेबाजों ने उतने रन बनाए ही नहीं। अगर अश्विन वर्ल्ड के नंबर वन टेस्ट गेंदबाज हैं तो उन्हें खिलाया जाना चाहिए था। नैथन लॉयन ने काफी विकेट लिए। हमारे बल्लेबाज पंद्रह-बीस, तीस-चालीस रन बनाकर आउट हुए। आपको वर्ल्ड कप जीतना है तो बड़े स्कोर बनाने होंगे। पहली पारी में चार-पांच सौ रन बनाने पड़ते हैं। अगर ऑस्ट्रेलिया ने 450 रन बनाए थे तो भारत को उसके आसपास रहना था। मैं बल्लेबाजी की ज्यादा गलती मानूंगा। यह डिबेट का मुद्दा है कि कप्तान को ऑफ स्पिनर पसंद है या नहीं। कभी मैनेजमेंट फैसले करता है कि हम जडेजा के साथ जाएंगे, अश्विन के साथ नहीं। कहीं न कहीं वह चूक हुई है टीम मैनेजमेंट से।
सुमित अवस्थी: कप्तान खुद बल्लेबाज हैं। क्यों भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी नहीं की। क्या आपको लगता है कि हम डर गए बल्लेबाजी चुनने में?
वीरेंद्र सहवाग: मुझे लगता है कि वह अकेले रोहित शर्मा का फैसला नहीं होगा। कोच, बल्लेबाज जाते हैं, वो देखते हैं। वे मौसम देखते हैं। लेकिन वह बड़ा हिम्मत वाला फैसले वाला होता कि हम घास देखकर भी बल्लेबाजी चुनें। अगर मैं वहां होता तो बतौर कप्तान मैं भी यही फैसला लेता कि टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनता। अगर कुछ होना था तो पहले दिन के पहले सत्र में ही होना था।
सुमित अवस्थी: हमने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी होती तो क्या टीम वही होती?
वीरेंद्र सहवाग: एक स्पिनर ही खेल सकता था। वह फैसला शायद टीम ने पहले ही कर लिया होगा। मुझे लगता है कि हम एक ही स्पिनर के साथ जाएंगे। और एक ऑलराउंडर बैट्समैन को मौका देंगे। शार्दूल ठाकुर को मौका देने का फैसला तो सही था। अब यह चर्चा का विषय है कि जडेजा सही रहते या अश्विन।
सुमित अवस्थी: बार-बार कहा जा रहा है कि आईपीएल की वजह से दिक्कत हो रही है। हमारी टीम के ज्यादातर खिलाड़ी आखिरी मैच तक आईपीएल खेलते रहे।
वीरेंद्र सहवाग: मेरे हिसाब से मैच प्रैक्टिस ही बेस्ट प्रैक्टिस होती है। भले ही वह 20 ओवर का मैच हो। वहां स्किल्स की प्रैक्टिस होती है। शुभमन गिल, मोहम्मद शमी, रवींद्र जडेजा आईपीएल फाइनल खेल रहे थे। बाकी टीम तो इंग्लैंड पहुंच चुकी थी। तीन खिलाड़ियों को आठ दिन मिल गए थे। ये जरूर हो सकता कि ज्यादा दिन मिलते या प्रैक्टिस मैच होता तो टीम को फायदा होता। जब टीम विदेश जाती है तो प्रैक्टिस मैच खेलती है। फिर टेस्ट या वनडे शुरू होते हैं।
सुमित अवस्थी: शुभमन गिल बहुत चल रहे थे। आईपीएल में शतक बनाए। वहां जाकर दोनों ही पारी में नहीं चले। क्या इन फॉर्म बल्लेबाज की रिदम टूट गई?
वीरेंद्र सहवाग: आईपीएल अलग टूर्नामेंट है। टेस्ट मैच अलग होता है। वहां सब्र का टेस्ट होता है। हालांकि, खिलाड़ियों को इसकी आदत रहती है। वे भी युवा खिलाड़ी हैं। वे भी गलतियों से सीखेंगे। ऐसा नहीं है कि वे खराब खिलाड़ी हैं। आप किसी भी खिलाड़ी का रिकॉर्ड देखेंगे तो पता चलेगा कि कोई भी इतना कजिस्टेंट नहीं है। वहां सिर्फ अजिंक्य रहाणे ने रन बनाए। वहां कन्वर्ट नहीं कर पाए बड़े स्कोर में। मैं नहीं मानता कि रेड बॉल या व्हाइट बॉल की वजह से कोई दिक्कत है।
सुमित अवस्थी: अगर आप चीफ सिलेक्टर होते तो किस खिलाड़ी पर गाज गिरती? कप्तान से कुछ कहते?
वीरेंद्र सहवाग: एक टेस्ट के लिए किसी को सजा नहीं दे सकते। मैं यह जरूर पूछता कि हुआ क्या। क्यों प्रदर्शन खराब हुआ। हम सीनियर्स को इसलिए रखते हैं ताकि मुश्किल हालात में वे रन बनाएं। युवा खिलाड़ी को तो समय लगता है। सीनियर का शॉट सिलेक्शन क्यों खराब हुआ। यह जरूर पूछता। एक टेस्ट की वजह से कप्तान को कुछ कहना गलत होता। हमने बाकी टीमों को हराया था। जब भारत में टीमें आती हैं तो वे हमें हरा नहीं पातीं आसानी से। जब हम बाहर जाते हैं तो हमारे साथ भी यही होता है। हालांकि, हमने दूसरे देशों को उनकी जमीन पर हराया है। हमने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराया था। यह एक टेस्ट था, जिसे हमें भूल जाना चाहिए। हम कोई पहली और आखिरी बार नहीं हारे। हार-जीत खेल का हिस्सा है। हम बेहतर तैयारी के साथ जा सकते हैं, बेहतर कोशिश कर सकते हैं। हम भारतीय प्रशंसक हैं, मैं भी निराश हुआ हूं। जब टीम हारती है, तभी आपको सपोर्ट चाहिए होता है।
सुमित अवस्थी: आईसीसी टूर्नामेंट में भारत के साथ क्या दिक्कत होती है?
वीरेंद्र सहवाग: एक ही मैच है, जिसमें हम हार जाते हैं, वह है नॉकआउट मैच। प्रेशर गेम शायद इतना ज्यादा होता है कि हम वह दबाव नहीं ले पाते हैं। हमारा बोर्ड अमीर जरूरत है, लेकिन अगर पैसे से सबकुछ खरीदा जाता तो हम बहुत सारी ट्र्रॉफियों का ढेर लगा देते। अगर किसी भी खिलाड़ी से पूछेंगे कि पैसे चाहते हो या देश के लिए खेलना चाहते हो तो वह देश को चुनेगा। नॉकआउट मैच से उबरना जरूरी है। यह इस साल की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी उम्मीद यही है। 2011 में किसी भी होटल या मैदान पर लोग यही कहता था कि इस बार तो जीतना ही है। यह स्थिति फिर आएगी। हमने 2008 से 2011 के विश्व कप तैयारी की थी। तब कोच गैरी कस्टर्न ने कहा था कि अब हम जो भी मैच खेलेंगे, वह नॉकआउट मैच होगा। हर नॉकआउट मैच हमें जीतना है। तभी हम तैयारी कर पाए।
सुमित अवस्थी: गैरी कस्टर्न बेहतरी कोच थे। आजकल राहुल द्रविड़ कोच कर रहे हैं। उन्हें कैसे देखते हैं?
वीरेंद्र सहवाग: मुझे लगता है कि राहुल तो गैरी कस्टर्न के अंडर खेले हैं, लेकिन कोच आपको विश्व कप नहीं जिताते। गैरी कस्टर्न ने सिर्फ दोस्त की तरह मुझे समझाया कि आपका रोल क्या है। वे कहते थे कि चार ओवर खेलो और तीस रन बना दो। वे जानते थे कि चार ओवर में मेरे तीस रन से आने वाले बल्लेबाजों के लिए मैच अच्छा होगा। राहुल द्रविड़ को भी यह टीम ही बेहतर कोच बनाएगी। राहुल जो कर सकते हैं, वो कर रहे हैं। आखिर में परफॉर्म तो खिलाड़ियों को करना है। ऐसा नहीं है कि गैरी कस्टर्न जहां-जहां गए, वहां उन्होंने टीम को जीत दिलाई। भारत के बाद वे जहां गए, वहां टीमें हारी भी हैं। वे कोच कम, दोस्त ज्यादा थे। वे जानते थे कि वीरेंद्र सहवाग को कौन सा गाना पसंद है, वह गाना वे ड्रेसिंग रूम में बजवाते थे।
सुमित अवस्थी: बच्चों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
वीरेंद्र सहवाग: आठवीं क्लास से आप सीधे कॉलेज नहीं जा सकते। स्पोर्ट्स में भी बहुत साल लगते हैं। आज विराट कोहली भी परफेक्ट नहीं हुए। वे भी गलती करके आउट हो जाते हैं। मेहनत आपके हाथ में है, स्किल सुधारना आपके हाथ में है। मैं अंडर-14, 15, 16, 17 कुछ नहीं खेला। बाद में मुझे मौके मिले और मैं रन बनाते चला गया। मैं एक स्कूल चलाता हूं। उसमें मैं सिर्फ सुविधा दे सकता हूं।
सुमित अवस्थी: कोई खिलाड़ी कैसे वीरेंद्र सहवाग बनता है। कितनी देर प्रैक्टिस करते थे?
वीरेंद्र सहवाग: मैंने प्रैक्टिस कम की, मैंने बसों में धक्के ज्यादा खाए हैं। ढाई घंटे बस में बैठकर 12 मिनट की बैटिंग करने को मिलती थी। मैं फील्डिंग की प्रैक्टिस करता था। मेहनत तो मैदान पर दूसरों से ज्यादा ही करता था। जिस दिन आपका दिन हो, उस दिन आपको आउट नहीं होना है। चेन्नई में जब मैच था, उस दिन मैंने कहा कि भगवान आज अगर मेरा दिन है तो दक्षिण अफ्रीका टीम तो गई। उस दिन मैंने 309 रन बनाए। मैं बच्चों से भी कहता हूं कि ऐसी नौबत न आए कि बाप को सिफारिश करनी पड़े। मेरे दो बेटे हैं।