टीम इंडिया के ओपनर ने कहा- सिर्फ गोरे दिखने वाले ही प्यारे या खूबसूरत नहीं होते
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टीम इंडिया के ओपनर अभिनव मुकुंद ने एक बेहद भावुक ट्वीट करते हुए नस्लवाद के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया और कहा कि सिर्फ गोरे दिखने वाले ही प्यारे या खूबसूरत नहीं होते। स्पोर्ट्स जगत में हमेशा से नस्लवाद हावी रहा, जिसने कई खिलाड़ियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित भी किया।
ये कहना गलत नहीं होगा कि खेल एक ऐसी विधा मानी गई है जहां नस्लवाद के खत्म होने की उम्मीद जागती है, लेकिन अभी भी इस पर विराम नहीं लगता दिख रहा है। लंबे समय से क्रिकेट या किसी भी अन्य खेल में नस्लवाद के कई उदाहरण जानने को मिल चुके हैं। एथलीट्स और कई खिलाड़ी इसकी खासी आलोचना कर चुके हैं।
अब टीम इंडिया के ओपनर अभिनव मुकुंद ने नस्लवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एक बेहद भावुक ट्वीट करते हुए कहा, 'मैं 10 साल की उम्र से क्रिकेट खेल रहा हूं और मैंने धीरे-धीरे सफलता की ऊंचाई छुईं और वहां पहुंचा, जहां मैं आज हूं। उच्च स्तर पर देश के लिए खेलना एक गर्व की बात है। मैं आज किसी की सहानुभूति और ध्यान खींचने के लिए नहीं ऐसा नहीं लिख रहा हूं बल्कि इस उम्मीद से लिख रहा हूं कि नस्लवाद के मुद्दे पर लोगों की सोच बदल पाऊं, जिसके बारे में मैं सबसे ज्यादा सोचता हूं।'
मुकुंद को अपने आप पर है इस बात का नाज
— Abhinav mukund (@mukundabhinav) August 9, 2017
मुकुंद ने ये भी बताया कि कैसे लोग बचपन से उनके शारीरिक रंग को लेकर उन्मादी थे। उन्होंने कहा, 'मैं 15 साल की उम्र से देश के बाहर और देश में बहुत घूमा हूं। मैंने पाया कि लोगों ने मेरे रंग पर काफी तंज कसे हैं। मेरी स्किन को लेकर लोगों का बेइज्जती करना मेरे लिए हमेशा से राज रहा है। जो कोई क्रिकेट को फॉलो करता है वह इसे समझेगा। मैंने धूप में काफी क्रिकेट खेली है। मगर मुझे एक बार भी इस बात पर कभी पछतावा नहीं हुआ कि मैं काला पड़ रहा हूं। वह इसलिए क्योंकि जो मैं करता हूं, वो मुझे पसंद है। और मैं कुछ चीजों को सिर्फ इसलिए हासिल किया क्योंकि उसे पाने के लिए मैंने कई घंटे घर से बाहर कड़ी धूप में बिताए। मैं चेन्नई से आता हूं जो शायद हमारे देश की सबसे गर्म जगह है और मैंने खुशी- खुशी अपनी ज्यादातर युवा उम्र क्रिकेट मैदान पर गुजारी है।'
कई बार लोगों की गालियों का शिकार बन चुका है टीम इंडिया का ओपनर
मुकुंद ने इस बात का खुलासा भी किया कि उन्हें कई बार लोगों की गालियों का सामना करना पड़ा है। बाएं हाथ के बल्लेबाज ने कहा, 'मैं इन बातों पर हंसा और आगे बढ़ गया क्योंकि मेरा लक्ष्य बड़ा था। एक नकारात्मक तरीके से प्रभावित होने के बाद मैं कठोर हो गया क्योंकि ये मुझे नीचे नहीं ले जाने वाला था। कई बार ऐसा हुआ जब मैंने इन बेइज्जती पर कुछ न बोलने की ठान ली।'
27 वर्षीय मुकुंद ने आगे कहा कि वह आज सिर्फ अपने लिए नहीं बोल रहे हैं बल्कि अन्य कई लोगों के लिए बोल रहे हैं, जो इस समस्या से गुजर रहे हैं। बकौल मुकुंद, 'सोशल मीडिया के आने से, यह बात बहुत बढ़ गई है कि लोग अक्सर गालियां देने लगते हैं, यह कुछ ऐसा है जिसमें मेरा कोई नियंत्रण नहीं है। गोरे लोग ही सिर्फ हैंडसम नहीं होते। सच्चे बनो, ध्यान रखो, और अपनी स्किन में आरामदेह रहो।'