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सुशील दोशी की कलम से: फिलहाल कोहली की बराबरी का कोई खिलाड़ी नहीं, टीम इंडिया में हर एक को अपनी भूमिका पता है
सार
भारत ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर इस विश्व कप में लगातार आठवीं जीत हासिल की। इस जीत के साथ भारत अंक तालिका में शीर्ष पर बना हुई है। विराट कोहली ने बेहतरीन शतक जमाया, जबकि रवींद्र जडेजा ने पांच विकेट लेकर जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मशहूर कमेंटेटर सुशील दोशी ने भारतीय टीम के प्रदर्शन को लेकर अपनी राय रखी है। आइए जानते हैं...
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सुशील दोशी की कलम से
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नमस्कार! मैं सुशील दोशी एक बार फिर से आपका स्वागत करता हूं। विश्व कप मुकाबले में भारत अद्भुत प्रदर्शन कर रहा है और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैं खुद भी कह रहा था कि मुकाबला बहुत ही कड़क होगा, बहुत ही कठिन होगा और बहुत ही जटिल होगा, लेकिन भारतीय जिस तरह से खेल रहे हैं, ऐसा लगता है कि जीत हासिल करने का उन्होंने दृढ़ संकल्प कर लिया है। एक तरह से दक्षिण अफ्रीका को पूरी तरह से निस्तेज कर दिया है।
ऐसा लगा ही नहीं कि दो बराबरी की टीमों के बीच मुकाबला हो रहा है। विराट कोहली ने तो इस मैच में विराट प्रदर्शन करने की ठान ली थी। कल उनका जन्मदिन भी था और पूरा देश उनका जन्मदिन मना रहा था। भारत के इतने बड़े खिलाड़ी, जिसने कितने ही खिलाड़ियों को प्रेरणा दी और विश्व स्तर पर सभी लोग कह रहे हैं कि उनके बराबर का खिलाड़ी आज दुनिया में मौजूद नहीं है।
सचिन तेंदुलकर के 49 शतक की उन्होंने बराबरी कर ली। जिस तरह से उन्होंने शतक लगाया, मुश्किल विकेट था, पिच मुश्किल थी। वहां खेलना आसान नहीं था। गेंद टप्पा खाकर फंस कर आ रही थी और बल्लेबाजों को स्ट्रोक का टाइमिंग करने में कठिनाई पेश हो रही थी। तब लग रहा था कि 300 का लक्ष्य भी एक मुश्किल लक्ष्य होगा, लेकिन विराट कोहली ने जो सेंचुरी बनाई उसके जरिये भारत ने स्कोर 300 के पार पहुंचा दिया और इससे जीत की बुनियाद पड़ गई।
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बाकी का काम हमेशा की तरह भारतीय गेंदबाज कर ही रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे कुशल सर्जन अपना काम पूरी तरह से करते हैं कुशलता के साथ, वही काम भारतीय गेंदबाजों ने किया। कभी शमी विकेट लेते हैं, कभी बुमराह आतंकित करते हैं और कभी सिराज विकेट लेकर बाकी का काम कर देते हैं। इनसे भी काम नहीं बना तो बचा खुचा काम स्पिनर रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव कर देते हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम हर एक खिलाड़ी को अपनी भूमिका के बारे में पता है। वे जानते हैं कि किस मौके पर उन्हें क्या करना है। लगता है भारतीय अश्वमेध यज्ञ पूरी तरह से सफलता के साथ संचालित हो रहा है। इतना एकतरफा मुकाबले भारत जीत रहा है कि आश्चर्य होता है कि क्या दुनिया का क्रिकेट इतना नीचे चला गया है? क्या भारतीय क्रिकेट ऊंचा चला गया है?
हालांकि, फिलहाल जिस तरह के स्वर्णिम फॉर्म में भारतीय टीम चल रही है, उसके विजय रथ को रोकना किसी भी टीम के लिए बहुत ही मुश्किल होगा। आशा करते हैं कि दिपावली पर जिस तरह से खुशियों के पटाखे हम छोड़ते हैं, भारतीय क्रिकेट टीम भी 2011 के बाद फिर से वनडे विश्व कप जीतकर भारतीय लोगों के उम्मीदों पर तो खरा उतरेगी ही, साथ ही खुशियों के पटाखे छोड़ने के लिए भी प्रेरित करेगी। धन्यवाद।
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ऐसा लगा ही नहीं कि दो बराबरी की टीमों के बीच मुकाबला हो रहा है। विराट कोहली ने तो इस मैच में विराट प्रदर्शन करने की ठान ली थी। कल उनका जन्मदिन भी था और पूरा देश उनका जन्मदिन मना रहा था। भारत के इतने बड़े खिलाड़ी, जिसने कितने ही खिलाड़ियों को प्रेरणा दी और विश्व स्तर पर सभी लोग कह रहे हैं कि उनके बराबर का खिलाड़ी आज दुनिया में मौजूद नहीं है।
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सचिन तेंदुलकर के 49 शतक की उन्होंने बराबरी कर ली। जिस तरह से उन्होंने शतक लगाया, मुश्किल विकेट था, पिच मुश्किल थी। वहां खेलना आसान नहीं था। गेंद टप्पा खाकर फंस कर आ रही थी और बल्लेबाजों को स्ट्रोक का टाइमिंग करने में कठिनाई पेश हो रही थी। तब लग रहा था कि 300 का लक्ष्य भी एक मुश्किल लक्ष्य होगा, लेकिन विराट कोहली ने जो सेंचुरी बनाई उसके जरिये भारत ने स्कोर 300 के पार पहुंचा दिया और इससे जीत की बुनियाद पड़ गई।
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बाकी का काम हमेशा की तरह भारतीय गेंदबाज कर ही रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे कुशल सर्जन अपना काम पूरी तरह से करते हैं कुशलता के साथ, वही काम भारतीय गेंदबाजों ने किया। कभी शमी विकेट लेते हैं, कभी बुमराह आतंकित करते हैं और कभी सिराज विकेट लेकर बाकी का काम कर देते हैं। इनसे भी काम नहीं बना तो बचा खुचा काम स्पिनर रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव कर देते हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम हर एक खिलाड़ी को अपनी भूमिका के बारे में पता है। वे जानते हैं कि किस मौके पर उन्हें क्या करना है। लगता है भारतीय अश्वमेध यज्ञ पूरी तरह से सफलता के साथ संचालित हो रहा है। इतना एकतरफा मुकाबले भारत जीत रहा है कि आश्चर्य होता है कि क्या दुनिया का क्रिकेट इतना नीचे चला गया है? क्या भारतीय क्रिकेट ऊंचा चला गया है?
हालांकि, फिलहाल जिस तरह के स्वर्णिम फॉर्म में भारतीय टीम चल रही है, उसके विजय रथ को रोकना किसी भी टीम के लिए बहुत ही मुश्किल होगा। आशा करते हैं कि दिपावली पर जिस तरह से खुशियों के पटाखे हम छोड़ते हैं, भारतीय क्रिकेट टीम भी 2011 के बाद फिर से वनडे विश्व कप जीतकर भारतीय लोगों के उम्मीदों पर तो खरा उतरेगी ही, साथ ही खुशियों के पटाखे छोड़ने के लिए भी प्रेरित करेगी। धन्यवाद।