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बीसीसीआई में दिग्गजों की वापसी के रास्ते बंद, अब होंगे नए चेहरे

Fri, 10 Aug 2018 06:30 AM IST
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Aug 2018 06:30 AM IST
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supreme court order, now new face will be in bcci
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने बीसीसीआई में जमे बैठे सभी दिग्गजों की वापसी के रास्ते बंद कर दिए हैं। सीएबी अध्यक्ष सौरव गांगुली और डीडीसीए अध्यक्ष रजत शर्मा को छोड़ कोई भी नामी बोर्ड का पदाधिकारी फिलहाल बीसीसीआई में नहीं घुस सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने शरद पवार, एन श्रीनिवासन, अनुराग ठाकुर, अमिताभ चौधरी, राजीव शुक्ला, सीके खन्ना जैसों के लिए बोर्ड के दरवाजे बंद कर दिए हैं। छह साल के बाद कूलिंग ऑफ पीरियड लेने का फायदा सौरव गांगुली को हुआ है। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह भी साफ हो गया है कि 30 दिनों के अंदर जिस राज्य ने बोर्ड का नया संविधान नहीं अपनाया तो वह रणजी ट्राफी में खेलने से तो जाएगा ही साथ ही बोर्ड की ओर से दी जा रही वित्तीय सहायता भी बंद हो जाएगी। 
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आदेश से संगठन के रूप में मजबूत हुआ बोर्ड 
अदालत के आदेश में एक राज्य एक वोट को हटाने के बाद बोर्ड की कार्यप्रणाली में मुंबई, सौराष्ट्र, बड़ौदा, विदर्भ जैसों की वापसी से बीसीसीआई संगठन के रूप में मजबूत हुआ है। यही नहीं रेलवे, सेना, ऑल इंडिया यूनिवर्सिटीज को वोटिंग अधिकार दिया गया है, लेकिन इन संगठनों का बोर्ड में प्रतिनिधि कोई सरकारी व्यक्ति नहीं बल्कि खिलाड़ी होगा। इस आदेश से सरकारी संस्थानों में खिलाडिय़ों को जिम्मेदारी मिलने के रास्ते साफ हो गए हैं। अब इन संस्थानों में भी प्लेयर्स एसोसिएशन गठित करनी होगी।  
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कोई भी नया व्यक्ति बन सकेगा बोर्ड अध्यक्ष 
कोर्ट के आदेश के बाद जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी की वह सिफारिश लागू हो गई है जिसमें कहा गया है कि बोर्ड अध्यक्ष बनने के लिए दो एजीएम में शामिल होने की बाध्यता नहीं है। इसका मतलब यह हुआ कि कोई भी नया चेहरा बिना किसी अनुभव के बोर्ड अध्यक्ष पद संभाल सकेगा। इस लिहाज से सौरव गांगुली और रजत शर्मा के बोर्ड अध्यक्ष बनने का भी रास्ता साफ हुआ है। हालांकि इसके लिए दोनों को अपने राज्यों का अध्यक्ष पद त्यागना होगा। वहीं दिग्गजों के पास अपने रिश्तेदारों को बोर्ड में घुसाने का विकल्प जरूर खुला हुआ है। 


सीएबी को अपना लेते तो नहीं देखना पड़ता दिन 
बीसीसीआई को इन हालातों में लाने केलिए जिम्मेदार क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव आदित्य वर्मा का कहना है कि अगर बोर्ड के पदाधिकारी उस दौरान सीएबी को अपना लेते तो उन्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता। सीएबी को अपनाने पर वह कभी अदालत की शरण नहीं लेते और न ही जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू होतीं।

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