{"_id":"6408101f45641923f90489b4","slug":"story-of-minnu-mani-being-cricketer-from-an-aboriginal-family-2023-03-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Minnu Mani: आदिवासी बेटी के क्रिकेटर बनने की कहानी, माता-पिता से झूठ बोला, घर बाढ़ में बहा लेकिन नहीं मानी हार","category":{"title":"Cricket News","title_hn":"क्रिकेट न्यूज़","slug":"cricket-news"}}
Minnu Mani: आदिवासी बेटी के क्रिकेटर बनने की कहानी, माता-पिता से झूठ बोला, घर बाढ़ में बहा लेकिन नहीं मानी हार
Wed, 08 Mar 2023 10:03 AM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Wed, 08 Mar 2023 10:03 AM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
मिन्नू मानी
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
केरल के वायनाड जिले की आदिवासी बेटी मिन्नू मानी की राह में एक के बाद एक बाधाएं आईं, लेकिन उन्होंने संघर्ष नहीं छोड़ा। क्रिकेटर बनने के लिए उन्होंने माता-पिता से झूठ बोला, रोजाना चार बसों को बदलकर 80 किलोमीटर का सफर तय किया। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने क्रिकेट छोडऩे की सोची, लेकिन उनकी ऊर्जा ने हताशा को हावी नहीं होने दिया। बेहद गरीब परिवेश से आने वाली आज वही मिन्नू 30 लाख रुपये में महिला प्रीमियर लीग के लिए दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा हैं।ताने मिलते थे ये लड़कों का खेल है
मिन्नू डब्ल्यूपीएल में केरल की एकमात्र क्रिकेटर हैं। मिन्नू बताती हैं कि जब उन्होंने क्रिकेट शुरू किया था तब उनके परिवार में उनकी किसी ने भी सहायता नहीं की। माता-पिता यही कहते थे कि ये लड़कों का खेल है, तुम इसे नहीं खेल सकतीं। उन्होंने आठवीं कक्षा में क्रिकेट की कोचिंग शुरू की। इसके बाद ही उन्होंने क्रिकेट खेलने केलिए अपने घर पर झूठ बोलना शुरू किया। वह घर पर कहती थीं कि उनकी स्कूल में अतिरिक्त कक्षाएं लगनी हैं। मैदान उनके घर से 42 किलोमीटर दूर था। उन्हें वहां तक पहुंचने में डेढ़ घंटा लगता था। इसके लिए वह चार बसों को बदलती थीं। इससे उन्हें काफी थकान होती थी। वह सुबह चार बजे उठकर मां के साथ खाना बनाती थीं और पौने सात बजे घर छोड़कर नौ बजे मैदान पर पहुंचती थीं। दो बजे तक अभ्यास करने के बाद वह वापस घर लौटती थीं।
कुली की बेटी हैं मिन्नू
बाएं हाथ की बल्लेबाज और दाएं हाथ की ऑफ स्पिनर मिन्नू बताती हैं कि उन्हें सिर्फ रविवार को आराम का मौका मिलता था, लेकिन जब उन्हें स्थानीय स्तर पर कुछ सफलता मिलने लगी तो उनके माता-पिता ने उन्हें प्रोत्साहित किया और उन्हें खिलाने के लिए लोन लिया। मिन्नू के पिता कुली हैं और मां घर का काम देखती हैं। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। अब मिन्नू अपने माता-पिता की मदद करना चाहती हैं। वह कहती हैं उन्होंने बेहद गरीबी के दिन देखे हैं।
बाढ़ में बह गया घर
मिन्नू का सपना देश के लिए खेलना है। वह भारत ए के लिए बांग्लादेश के खिलाफ खेल चुकी हैं। यहां से उन्हें पांच लाख रुपये की मैच फीस भी मिली। शुरुआती मैचों से मिली फीस से उन्होंने उन्होंने गांव में माता-पिता केलिए घर बनवाना शुरू किया। लेकिन 2018-19 में आई बाढ़ ने इसे खत्म कर दिया। बांग्लादेश के खिलाफ मिली मैच फीस से उन्होंने इसे दोबारा बनवाया है।