सौरव गांगुली ने बताया- क्यों नहीं कर पाए लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू
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टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जस्टिस लोढ़ा समिति द्वारा बीसीसीआई में सुधार के लिए लागू की जाने वाली सिफारिशों के अमल को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। इसके लिए गांगुली ने बोर्ड को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है। गांगुली के बाद सौराष्ट्र क्रिकेट संघ के अध्यक्ष मधुकर वोरा ने भी बीसीसीआइ को पत्र लिखकर राज्य संघों के संविधान में संशोधन और लोढ़ा समिति की सभी सिफारिशें लागू करने में आने वाली मुश्किलों के बारे में बताया है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही बीसीसीआई के सचिव अमिताभ चौधरी ने हाल ही में सभी राज्य एसोसिएशनों को मेल लिखकर बोर्ड के संविधान में बदलाव को लेकर यह जानकारी मांगी थी कि अब तक उन्होंने इस बारे में क्या कदम उठाए हैं। चौधरी ने इन एसोसिएशनों को यह जानकारी दी थी कि 13 एसोसिएशनों ने हलफनामा दाखिल कर जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सभी सिफारिशों को जस का तस मान मान लिया है।
पीटीआई के मुताबिक सौरव गांगुली ने बीसीसीआई को पत्राचार माध्यम से यह बताया कि, 'मैं यह बताना चाहता हूं कि कुछ महीने पहले ही कैब की विशेष आम बैठक में सदस्यों के बीच इस बात को लेकर सहमति बनी कि बीसीसीआई के फैसले के संबंध में हलफनामे उच्चतम न्ययायाय को संबोधित करते हुए दायर किये जाएंगे, जिसमें राज्य और बीसीसीआई स्तर पर लागू करने की समस्याओं को बताया जाएगा।'
उन्होंने आगे लिखा, 'विशेष आम बैठक में सदस्यों ने एक फैसला किया और आपने जो मुद्दे मेल में लिखे हैं, उन पर गौर करने के लिये एक और विशेष आम बैठक करनी होगी। हमें पिछले हफ्ते आपकी मेल मिली और तब सदस्यों को इस नए मुद्दे के बारे में अपडेट करने के लिये एक अन्य विशेष आम बैठक बुलाने और इस पर फैसला लेने का समय नहीं था।' गांगुली ने आगे लिखा, 'अभी समय की कमी को देखते हुए हम आपके मेल में जिक्र की गई धाराओं पर समय सीमा के अंदर कोई फैसला नहीं दे पायेंगे क्योंकि यह संघ के संविधान के खिलाफ है।'
बता दें कि बीसीसीआई से जुड़ी ज्यादातर राज्य क्रिकेट एसोसिएशन जस्टिस लोढ़ा की इन सिफारिशों में बड़े स्तर पर बदलाव चाहती हैं। यही कारण है कि इन एसोसिएशनों ने इन सिफारिशों को लागू करने के लिए हलफनामा दायर नहीं किया है।
सौरव गांगुली ने कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट में यह शपथपत्र दायर करेंगे कि हमें इन सिफारिशों को लागू करने में व्यावहारिक मुश्किलें आ रही हैं। हमने इस बारे में पहली एजीएम में ही फैसला ले लिया था। वहीं, 13 राज्यों द्वारा सिफारिशें स्वीकार करने के मेल पर हमें दूसरी एजीएम में फैसला लेना था, लेकिन समय के अभाव के कारण मीटिंग का आयोजन नहीं हो सका।