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Ravindra Jadeja: पिता करते थे गार्ड की नौकरी, बेटे ने बदली किस्मत; इस तरह बने दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर
Sun, 19 Nov 2023 11:27 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 19 Nov 2023 11:27 AM IST
सार
साल 2009 में जडेजा की मां का सपना पूरा भी हो गया, जब उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में बतौर ऑलराउंडर चुना गया। जडेजा ने आठ फरवरी 2009 को श्रीलंका के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। तब धोनी टीम इंडिया के कप्तान थे।
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रवींद्र जडेजा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
विश्व कप 2023 के फाइनल में भारत का सामना ऑस्ट्रेलिया से है। इस विश्व कप के लिए जब भारतीय टीम चुनी गई थी तो उसमें बाएं हाथ के तीन स्पिनर थे। रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव और अक्षर पटेल इस टीम में शामिल थे। हालांकि, अक्षर चोट की वजह से बाहर हो गए और रविचंद्रन अश्विन की एंट्री हुई। हालांकि, जडेजा और कुलदीप का प्लेइंग-11 में खेलना लगभग तय था। हालांकि, विश्व कप शुरू होने से पहले आलोचकों ने तमाम बातें कही थीं कि दोनों बाएं हाथ के स्पिनर हैं और ये दोनों किस तरह टीम इंडिया की जीत में योगदान दे पाएंगे।
हालांकि, जडेजा और कुलदीप ने अपने प्रदर्शन से सभी को जवाब दिया। कुलदीप जहां बेहद किफायती रहे हैं, वहीं जडेजा ने विकेट निकलाने की अपनी क्षमता और लोअर ऑर्डर में कुछ महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं। जडेजा ने साबित किया कि क्यों वह इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स में गिने जाते हैं। हालांकि, जडेजा का सफर आसान नहीं रहा है। उन्हें निजी जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
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हालांकि, जडेजा और कुलदीप ने अपने प्रदर्शन से सभी को जवाब दिया। कुलदीप जहां बेहद किफायती रहे हैं, वहीं जडेजा ने विकेट निकलाने की अपनी क्षमता और लोअर ऑर्डर में कुछ महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं। जडेजा ने साबित किया कि क्यों वह इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स में गिने जाते हैं। हालांकि, जडेजा का सफर आसान नहीं रहा है। उन्हें निजी जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
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रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव
- फोटो : सोशल मीडिया
जडेजा का बचपन मुश्किलों में बीता। उनके पिता गार्ड की नौकरी करते थे और घर का खर्च चलाते थे। जडेजा ने 17 साल की उम्र में एक बेहद दर्दनाक सदमा भी झेला था। हालांकि, उन्होंने इससे हार नहीं मानी। वह 2008 में अंडर-19 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस सफर में उन्हें महेंद्र सिंह धोनी का भी खूब साथ मिला और उनके भरोसे और खुद की मेहनत से जडेजा दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर बन गए।
रवींद्र जडेजा
- फोटो : सोशल मीडिया
जडेजा का जन्म छह दिसंबर 1988 को गुजरात के जामनगर में हुआ था। उनके पिता अनिरुद्ध सिंह जडेजा भारतीय सेना में नौकरी करते थे। हालांकि, एक हादसे के दौरान उन्हें गंभीर चोट आई थी। इसके बाद उन्हें सेना की नौकरी छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद जडेजा के पिता एक निजी सिक्योरिटी कंपनी में गार्ड की नौकरी करने लगे। जडेजा की मां लता जडेजा भी वहीं नर्स का काम करती थीं। जडेजा को बचपन में काफी परेशानियां झेलनी पड़ीं। उन्हें क्रिकेट खेलने का बड़ा शौक था और वह क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता उन्हें सेना में अफसर बनाना चाहते थे। वहीं, मां लता जडेजा चाहती थीं कि जडेजा को जो बनने का मन हो वह बनें। जब जडेजा ने उन्हें बताया कि वह क्रिकेटर बनना चाहते हैं तो लता उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में खेलता देखना चाहती थीं। उनका सपना था कि बेटा भारत के लिए क्रिकेट खेले।
ravindra jadeja
- फोटो : सोशल मीडिया
हालांकि, यह सफर आसान नहीं था। जडेजा ने इसके बाद सौराष्ट्र में एक क्रिकेट अकादमी ज्वाइन की। वहां वह क्रिकेट सीखने लगे। हालांकि, जब जडेजा 17 साल के हुए (2005) तो उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी मां लता का एक हादसे के दौरान निधन हो गया। मां के निधन का सदमा जडेजा बर्दाश्त नहीं कर सके। उन्होंने क्रिकेट से दूरी बनानी शुरू कर दी। इस मुश्किल हालाता में जडेजा को उनकी बहन नैना ने संभाला। बहन ने उन्हें दोबारा क्रिकेट पर ध्यान देने के लिए कहा और उन्हें प्रोत्साहित किया। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बहन नैना नर्स का काम करने लगीं।
रवींद्र जडेजा
- फोटो : सोशल मीडिया
इसके बाद जडेजा ने दोबारा से प्रैक्टिस शुरू कर दी। उन्हें इस सफर में कोच महेंद्र सिंह चौहान का साथ मिला। दोनों की मेहनत रंग लाई और जडेजा का चयन सौराष्ट्र की जूनियर टीम में हो गया। वहां उन्होंने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का दिल जीता। सौराष्ट्र की टीम में शानदार प्रदर्शन का इनाम जडेजा को 2006 में मिला। मां के निधन के एक साल बाद ही उनका चयन अंडर-19 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में हो गया। उस टीम की कप्तानी रोहित शर्मा ही कर रहे थे। जडेजा का प्रदर्शन बल्ले से भले ही कुछ खास न रहा हो, लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने ठीक ठाक प्रदर्शन किया। चार मैचों में उन्होंने चार विकेट लिए। 16 रन देकर तीन विकेट उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी रही।
रवींद्र जडेजा
- फोटो : instagram
साल 2008 में जडेजा एक बार फिर जडेजा को अंडर-19 विश्व कप खेलने का मौका मिला। तब कप्तान विराट कोहली थे, वहीं जडेजा उपकप्तान बनाए गए। जो काम जडेजा 2006 विश्व कप में नहीं कर पाए थे, वह उन्होंने 2008 के टूर्नामेंट में कर दिखाया। उसमें उन्होंने छह मैचों में 10 विकेट लिए। 23 रन देकर तीन विकेट उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी रही। इससे ज्यादा जडेजा ने अपनी फील्डिंग और फिटनेस से सभी का ध्यान खींचा। जडेजा समेत तमाम खिलाड़ियों के प्रदर्शन की बदौलत टीम इंडिया ने खिताब जीता। जडेजा ने जो सपना देखा था वह पूरा होने की राह पर था, लेकिन उन्हें इस बात का अफसोस था कि उनके साथ मां नहीं हैं।
रवींद्र जडेजा
- फोटो : instagram
साल 2009 में जडेजा की मां का सपना पूरा भी हो गया, जब उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में बतौर ऑलराउंडर चुना गया। जडेजा ने आठ फरवरी 2009 को श्रीलंका के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। तब धोनी टीम इंडिया के कप्तान थे। यह एक वनडे मुकाबला था। इसके बाद 10 फरवरी 2009 को ही जडेजा ने टी20 डेब्यू किया। टेस्ट डेब्यू जड्डू ने 2012 में इंग्लैंड के खिलाफ किया था। शुरुआत में जडेजा का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। हालांकि, 2012 में जडेजा को आईपीएल की टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने खरीदा और इसके बाद से उनकी किस्मत बदल गई। प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहने पर धोनी पर तमाम आरोप लगे थे और फेवरेटिज्म का आरोप लगा। आलोचकों का कहना था कि जडेजा प्रदर्शन नहीं करते थे और पता नहीं क्यों टीम में हैं।
रवींद्र जडेजा
- फोटो : IPL/BCCI
धीरे-धीरे जडेजा ने टीम में अपनी पैठ जमानी शुरू की और अपनी काबीलियत का लोहा मनवाया। 23 साल की उम्र में 2012 में जडेजा ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में तीन तिहरा शतक लगाया। ऐसा करने वाले वह दुनिया के आठवें और भारत के पहले खिलाड़ी बने। इसके बाद लोग उन्हें 'सर जडेजा' के नाम से बुलाना शुरू कर दिया। 2013 चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में जडेजा ने 25 गेंद में दो चौके और दो छक्के की मदद से 33 रन की नाबाद पारी खेली थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर 'सर जडेजा' की उपाधि काफी वायरल हुई थी। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में एक ट्वीट में रवींद्र को 'सर जडेजा' कहकर संबोधित किया था। पीएम ने लिखा था- आपका फैन कौन नहीं है सर जडेजा। समय के साथ जडेजा का नाम विश्व के दिग्गजों में शुमार हो गया।
Ravindra Jadeja
- फोटो : सोशल मीडिया
टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 200 विकेट लेने का रिकॉर्ड जडेजा के नाम है। उन्होंने महज 44 टेस्ट में ऐसा कर रंगना हेराथ का रिकॉर्ड तोड़ा। हेराथ ने 47 मैच में ऐसा किया था। जडेजा को 2015 में खराब फॉर्म की वजह से टीम से बाहर भी किया गया था, लेकिन कुछ महीने बाद घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने वापसी की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के अहम हिस्सा हैं। उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम का उपकप्तान भी नियुक्त किया जा चुका है। जडेजा ने अब तक 67 टेस्ट में 36.42 की औसत से 2804 रन बनाए हैं। इनमें तीन शतक और 19 अर्धशतक शामिल हैं। इसके अलावा 275 विकेट भी लिए हैं। टेस्ट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 42 रन देकर सात विकेट है।
रवींद्र जडेजा
- फोटो : सोशल मीडिया
196 वनडे में जडेजा ने 32.7 की औसत से 2747 रन बनाए हैं। इनमें 13 अर्धशतक शामिल हैं। इसके अलावा इस फॉर्मेट में उन्होंने 220 विकेट लिए हैं। 33 रन देकर पांच विकेट वनडे में उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी है। भारत के लिए 64 टी20 में जडेजा ने 124.52 के स्ट्राइक रेट से 457 रन बनाए हैं। इसके अलावा उन्होंने 51 विकेट लिए हैं। 15 रन देकर तीन विकेट उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी है। आईपीएल में जडेजा ने 226 मैचों में 128.62 के स्ट्राइक रेट से 2692 रन बनाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 152 विकेट लिए हैं। 16 रन देकर पांच विकेट उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी है।
रवींद्र जडेजा अपनी पत्नी और बेटी के साथ
- फोटो : सोशल मीडिया
2016 में हुई थी जडेजा और रिवाबा की शादी
रिवाबा और रवींद्र जडेजा की बहन नैना दोनों दोस्त थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2015 में एक बार नैना और रिवाबा घर पहुंचे तो रवींद्र भी मौजूद थे। ये रवींद्र और रिवाबा की पहली मुलाकात थी। नैना ने दोनों को एक-दूसरे से मिलवाया था। पहली मुलाकात में ही रवींद्र अपना दिल रिवाबा को दे बैठे थे। फिर क्या था... चट मंगनी और पट ब्याह। मुलाकात के करीब तीन महीने बाद ही दोनों की सगाई भी हो गई। दोनों ने 2016 में शादी कर ली। शादी के एक साल बाद ही रिवाबा ने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी का नाम निध्याना रखा है। रिवाबा को इस साल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जामनगर उत्तर विधानसभा सीट से टिकट दिया था। वह चुनाव भी जीत गईं। अब रिवाबा भाजपा की विधायक हैं।
रिवाबा और रवींद्र जडेजा की बहन नैना दोनों दोस्त थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2015 में एक बार नैना और रिवाबा घर पहुंचे तो रवींद्र भी मौजूद थे। ये रवींद्र और रिवाबा की पहली मुलाकात थी। नैना ने दोनों को एक-दूसरे से मिलवाया था। पहली मुलाकात में ही रवींद्र अपना दिल रिवाबा को दे बैठे थे। फिर क्या था... चट मंगनी और पट ब्याह। मुलाकात के करीब तीन महीने बाद ही दोनों की सगाई भी हो गई। दोनों ने 2016 में शादी कर ली। शादी के एक साल बाद ही रिवाबा ने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी का नाम निध्याना रखा है। रिवाबा को इस साल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जामनगर उत्तर विधानसभा सीट से टिकट दिया था। वह चुनाव भी जीत गईं। अब रिवाबा भाजपा की विधायक हैं।