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PSL: पाकिस्तान सुपर लीग के कारण घाटे में पीसीबी, फ्रेंचाइजियों के लिए केंद्रीय पूल में हिस्सेदारी से नुकसान
Sun, 24 Dec 2023 03:38 PM IST
रोहित राज
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लाहौर
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लाहौर
Published by: रोहित राज
Updated Sun, 24 Dec 2023 03:38 PM IST
सार
महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में वित्तीय मॉडल और पीएसएल से जुड़े मामलों पर चिंता व्यक्त की गई है और इन मामलों की गहन जांच की भी सिफारिश की गई है। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि आम धारणा के विपरीत लीग के वित्तीय मॉडल के साथ छेड़छाड़ के बाद बोर्ड को पीएसएल से घाटा हो रहा है।
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पाकिस्तान सुपर लीग
- फोटो : PSL
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विस्तार
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को छह फ्रेंचाइजी से वित्तीय साझेदारी मॉडल और अन्य विसंगतियों के कारण पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) से करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस जानकारी पाकिस्तान के महालेखा परीक्षक के कार्यालय की एक ऑडिट रिपोर्ट से सामने आई है। पाकिस्तानी मीडिया में आई ऑडिट रिपोर्ट के विवरण से संकेत मिले हैं कि पीसीबी ने यह धारणा बनाने की पूरी कोशिश की कि एक वित्तीय ब्रांड के रूप में पीएसएल के साथ सब कुछ ठीक है।
महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में वित्तीय मॉडल और पीएसएल से जुड़े मामलों पर चिंता व्यक्त की गई है और इन मामलों की गहन जांच की भी सिफारिश की गई है। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि आम धारणा के विपरीत लीग के वित्तीय मॉडल के साथ छेड़छाड़ के बाद बोर्ड को पीएसएल से घाटा हो रहा है। यह घाटा पीएसएल के राजस्व के केंद्रीय पूल से जुड़ी लाभ साझा करने की व्यवस्था में बदलाव के कारण हुआ है।
2025 में ही हो सकता है संशोधन
गौरतलब है कि पीसीबी और फ्रेंचाइजियों के बीच 10 साल के समझौते के तहत कोई भी संशोधन 2025 में 10 साल पूरे होने के बाद ही किया जा सकता है। महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीसीबी को लीग के पांचवें संस्करण से नुकसान उठाना पड़ा जहां मीडिया अधिकारों में फ्रेंचाइजी की हिस्सेदारी 80 फीसदी तक बढ़ गई जिससे बोर्ड का हिस्सा केवल 20 फीसदी रह गया।
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पीसीबी को हुआ बड़ा नुकसान
इसी तरह प्रायोजन अधिकारों को विभाजित किया गया जिसमें 40 फीसदी हिस्सा फ्रेंचाइजी को और 60 फीसदी बोर्ड को दिया गया। यहां तक कि टिकटों की बिक्री में भी 90 फीसदी हिस्सा फ्रेंचाइजी को दिया गया और केवल 10 फीसदी पीसीबी के हिस्से में आया। रिपोर्ट के अनुसार इसके परिणामस्वरूप पीसीबी को 81 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का नुकसान हुआ। पीएसएल के छठे टूर्नामेंट में यह वित्तीय नुकसान बढ़कर 82 करोड़ 70 लाख पाकिस्तानी रुपए हो गया। लाभ साझेदारी इसी तरह से फ्रेंचाइजियों के पक्ष में होने पर ऑडिट रिपोर्ट में सातवें से 12वें टूर्नामेंट तक बोर्ड को एक हजार 75 करोड़ 10 लाख पाकिस्तानी रुपए के संभावित नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
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महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में वित्तीय मॉडल और पीएसएल से जुड़े मामलों पर चिंता व्यक्त की गई है और इन मामलों की गहन जांच की भी सिफारिश की गई है। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि आम धारणा के विपरीत लीग के वित्तीय मॉडल के साथ छेड़छाड़ के बाद बोर्ड को पीएसएल से घाटा हो रहा है। यह घाटा पीएसएल के राजस्व के केंद्रीय पूल से जुड़ी लाभ साझा करने की व्यवस्था में बदलाव के कारण हुआ है।
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2025 में ही हो सकता है संशोधन
गौरतलब है कि पीसीबी और फ्रेंचाइजियों के बीच 10 साल के समझौते के तहत कोई भी संशोधन 2025 में 10 साल पूरे होने के बाद ही किया जा सकता है। महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीसीबी को लीग के पांचवें संस्करण से नुकसान उठाना पड़ा जहां मीडिया अधिकारों में फ्रेंचाइजी की हिस्सेदारी 80 फीसदी तक बढ़ गई जिससे बोर्ड का हिस्सा केवल 20 फीसदी रह गया।
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पीसीबी को हुआ बड़ा नुकसान
इसी तरह प्रायोजन अधिकारों को विभाजित किया गया जिसमें 40 फीसदी हिस्सा फ्रेंचाइजी को और 60 फीसदी बोर्ड को दिया गया। यहां तक कि टिकटों की बिक्री में भी 90 फीसदी हिस्सा फ्रेंचाइजी को दिया गया और केवल 10 फीसदी पीसीबी के हिस्से में आया। रिपोर्ट के अनुसार इसके परिणामस्वरूप पीसीबी को 81 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का नुकसान हुआ। पीएसएल के छठे टूर्नामेंट में यह वित्तीय नुकसान बढ़कर 82 करोड़ 70 लाख पाकिस्तानी रुपए हो गया। लाभ साझेदारी इसी तरह से फ्रेंचाइजियों के पक्ष में होने पर ऑडिट रिपोर्ट में सातवें से 12वें टूर्नामेंट तक बोर्ड को एक हजार 75 करोड़ 10 लाख पाकिस्तानी रुपए के संभावित नुकसान का अनुमान लगाया गया है।