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पृथ्वी शॉ के मामले में BCCI ने जताई आपत्ति, CoA के फैसलों पर उठाए सवाल
Fri, 09 Aug 2019 06:25 PM IST
Mukesh Jha
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: Mukesh Jha
Updated Fri, 09 Aug 2019 06:25 PM IST
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prithvi shaw
बीसीसीआई के वरिष्ठ सदस्यों ने बोर्ड के पृथ्वी शॉ के मामले में निपटने के तरीकों और सीओए के फैसलों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि पृथ्वी शॉ के डोपिंग टेस्ट में नाकाम रहने पर उनके मामले में ढीला रवैया अपनाने और प्रशासकों की समिति (सीओए) के नीतिगत फैसलों में अपनी सीमाओं को लांघने के कारण बीसीसीआई को राष्ट्रीय डोपिंगरोधी एजेंसी (नाडा) के अंतर्गत आने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनके मुताबिक बीसीसीआई सीईओ राहुल जौहरी समझौते पर हस्ताक्षर करने पर सहमत हो गए, जिससे देश की सबसे धनी खेल संस्था नाडा के अंतर्गत आ गई और वह राष्ट्रीय खेल महासंघ भी बन गया।
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बीसीसीआई के वरिष्ठ सदस्यों का मानना है कि सरकार के दबाव में किए गए इस फैसले से बोर्ड वित्तीय रूप से स्वतंत्र होने के बावजूद अपनी स्वायत्ता खो सकता है। बोर्ड के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई से कहा, 'सीईओ (राहुल जौहरी) या सीओए को को इस तरह के नीतिगत फैसले करने का अधिकार नहीं है।
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यह बीसीसीआई की संचालन संस्था का अधिकार है। वे किसी भी तरह का पत्र लिख सकते हैं क्योंकि वे प्रशासन चला रहे हैं और गलत फैसले को लागू कर सकते हैं। लेकिन इससे यह सही फैसला नहीं बन सकता।' उन्होंने सीईओ पर सरकार के आगे झुकने का आरोप लगाया।
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अधिकारी ने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीईओ ने अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सरकार को हावी होने का मौका दिया।' कार्यकारी समिति के एक पूर्व सदस्य का मानना है कि जिस तरह से शॉ के मामले से निबटा गया वह खेल मंत्रालय और नाडा के हाथों में खेलने जैसा था।
शॉ को टरबुटैलाइन के सेवन का दोषी पाए जाने के बाद आठ महीने के लिए प्रतिबंधित किया गया लेकिन यह सैंपल लेने और जांच प्रक्रिया में लगे समय से प्रभावी होगा। बीसीसीआई कानूनी समिति के एक पूर्व सदस्य का मानना है कि सीओए को खेल मंत्रालय की दबाव की रणनीति के आगे नहीं झुकना चाहिए था। मंत्रालय ने दक्षिण अफ्रीका ए और महिला टीमों के आगामी भारत दौरे के लिए वीजा संबंधी पत्र रोक दिया था।