गौतम गंभीर का नाम भारतीय क्रिकेटर्स के उन चुनिंदा सलामी बल्लेबाजों में लिया जाता हैं, जिन्होंने अपने अक्रामक खेल से विपक्षी पर हमेशा दबाव बनाया। 2007 टी-20 और 2011 विश्व कप फाइनल में अपनी पारी से टीम इंडिया का विजय तिलक करने वाला यह खिलाड़ी लंबे समय से टीम से बाहर चल रहा था।
टीम इंडिया के वो चार धुरंधर जिनकी कभी बोलती थी तूती, बाद में मजबूरन लेना पड़ा संन्यास
वीवीएस लक्ष्मण
क्रिकेट की दुनिया में वेरी वेरी स्पेशल लक्ष्मण नाम से मशहूर इस खिलाड़ी को भी फेयरवेल मैच नसीब नहीं हुआ था। कलाई के जादूगर के नाम से मशहूर इस खिलाड़ी ने हर उस नाजुक मौके पर टीम को हार से उबारा जब उनकी ओर उम्मीद से देखा गया।
टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए 8781 रन बनाने वाले इस खिलाड़ी ने अपना आखिरी टेस्ट मैच जनवरी 2012 में खेला था। लेकिन उसके बाद उन्हें टीम में जगह नहीं मिली। इसके बाद 18 अगस्त 2012 को इस खिलाड़ी ने भी बिना फेयरवेल मैच के क्रिकेट को अलविदा कह दिया।
राहुल द्रविड़
भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज की उपाधि मिलने के बावजूद राहुल द्रविड़ को टेस्ट क्रिकेट में फेयरवेल मैच नहीं मिला था। राहुल द्रविड़ को अगस्त 2011 में अचानक इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भारतीय टीम में जगह मिली थी। तभी द्रविड़ ने वनडे और टी-20 क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया था।
टेस्ट क्रिकेट अभी भी उनके पास था। मगर मार्च 2012 में बिना फेयरवेल मैच ही उन्होंने इस खेल से अगल होना उचित समझा। मौजूदा दौर में वे भारतीय अंडर-19 और 'ए' टीम को निखारने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
वीरेंद्र सहवाग
भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का बल्ला जब चलता था तो दुनिया भर के गेंदबाज पनाह मांगते थे। गेंदबाजों की रातों की नींद उड़ाने वाला यह विस्फोटक बल्लेबाज जिस तरह से फुस्स हुआ उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
भारत की ओर से टेस्ट में पहला तिहरा शतक बनाकर 'मुल्तान के सुल्तान' बने सहवाग ने अपना आखिरी वनडे और टेस्ट मैच 2013 में खेला था। लंबे समय से टीम में जगह नहीं मिल पाई तो आखिरकार दो साल बाद 20 अक्टूबर 2015 को क्रिकेट से संन्यास लिया।
जहीर खान
भारतीय तेज गेंदबाजी को एक मुकाम तक पहुंचाने वाले जहीर खान के दीवाने दुनिया भर में मिलेंगे। बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने लंबे समय तक विश्व क्रिकेट में राज किया। उनकी गेंदबाजी का ही कमाल था कि भारत 2011 वर्ल्ड कप अपने नाम कर पाया।
शानदार रिकॉर्ड्स होने के बावजूद इस वर्ल्ड कप विजेता खिलाड़ी को भी फेयरवेल मैच नसीब नहीं हुआ। जैक ने अपना आखिरी टेस्ट मैच 2014 और आखिरी वनडे 2012 में खेला था। जब उन्हें लगा कि अब वह टीम में वापसी नहीं कर पाएंगे तो उन्होंने 15 अक्टूबर 2015 को संन्यास लिया।