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Mohammed Shami: यूपी के शमी क्यों गए बंगाल, विश्व कप से पहले कैसे की खास तैयारी? जानें उनके कोच ने क्या कहा

Sat, 18 Nov 2023 04:29 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शक्तिराज सिंह Updated Sat, 18 Nov 2023 04:29 PM IST
सार

बदरुद्दीन के अनुसार शमी बचपन से क्रिकेट से जुड़े हुए हैं। वह करीब 13-14 साल की उम्र में कोच बदरुद्दीन के पास आए थे। गांव में वह बचपन से ही क्रिकेट खेलते थे। उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई अपने गांव के आसपास ही की। 

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Mohammed Shami Coach Badruddin narrated his story of becoming a world Class bowler Amroha to Bengal
मोहम्मद शमी अपने कोच के साथ - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वनडे विश्व कप 2023 में मोहम्मद शमी भारत के सबसे बड़े खिलाड़ी रहे हैं। शमी ने शानदार प्रदर्शन किया है और इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। सेमीफाइनल में उन्होंने सात विकेट अपने नाम किए और टीम इंडिया को फाइनल में पहुंचाया। शमी को उनकी मेहनत का फल इस विश्व कप में मिला है और वह मौजूदा समय पर दुनिया के सबसे बेहतरीन तेज गेंदबाज लग रहे हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने कई वर्षों तक मेहनत की है। शमी के कोच ने एक इंटरव्यू में उनके संघर्ष और सफलता के बारे में बताया है। 
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मोहम्मद शमी के कोच बदरुद्दीन ने बताया कि शमी को यूपी में मौका नहीं मिल पाया था। अंडर-19 में ट्रायल बेस क्रिकेट थी। इस वजह से उस समय बहुत सारे बच्चों को मौका नहीं मिल पाता था और बंगाल में आसानी से खिलाड़ी टीम में आ सकते थे। उनके कोच को पता था की शमी इतना अच्छा कर रहा है। मैच में जरूर परफॉर्म करेगा। इस वजह से शमी को वहां भेजा गया। शुरूआत में उनके पिता इतनी दूर भेजने में थोड़ा सा हिचकिचा रहे थे, लेकिन जब कोच ने उनको भरोसा दिलाया है कि वहां से शमी को अच्छा कुछ मिलेगा तो उन्होंने उनको भेजा। शमी अगर वहां नहीं जाते तो शायद यहां तक नहीं पहुंचते। शमी ने वहां जाकर भी बहुत ज्यादा मेहनत की और उनकी मेहनत का नतीजा सबको दिख रहा है।
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बचपन से क्रिकेट खेल रहे हैं शमी
बदरुद्दीन के अनुसार शमी बचपन से क्रिकेट से जुड़े हुए हैं। वह करीब 13-14 साल की उम्र में कोच बदरुद्दीन के पास आए थे। गांव में वह बचपन से ही क्रिकेट खेलते थे। उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई अपने गांव के आसपास ही की। इसके बाद हिंदू कॉलेज में एडमिशन लिया। जब बाद में वो खेलने लगे तो हिंदू कॉलेज की यूनिवर्सिटी में भी रहे। 
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शमी शुरुआत से ही गेंदबाज बनना चाहते थे। वह कोच के पास भी बॉलिंग के लिए प्रैक्टिस करने आए थे। हालांकि, उन्हें बल्लेबाजी का शौक था, लेकिन बॉलिंग के अलावा दूसरी प्रैक्टिस नहीं करते हैं। कभी-कभी एक आध दिन बैटिंग कर लिया करते थे, लेकिन अलग से कभी बैटिंग प्रैक्टिस नहीं की। वह हमेशा से ही शांत स्वभाव के इंसान रहे हैं, जो अपने काम से काम रखता है। क्रिकेट के अलावा किसी भी दूसरी चीज में उनकी रुचि नहीं रही है। 

पिता ने बनाया क्रिकेटर
शमी की सफलता में सबसे बड़ा योगदान उनके पिता का है। उन्हें ही क्रिकेट का शौक था। वो जो नहीं कर सके वो अपने बेटे से उम्मीद रखी थी उन्होंने और उनके बेटे ने उनको करके दिया। क्योंकि गांव में भी बहुत ज्यादा परेशानी होती है। लेकिन शहर में ही उस समय परेशानी होती थी, तब ऐसे भी माता-पिता होते थे, जो कहते थे कि बच्चे का करियर खराब कर रहे हैं, क्रिकेट खिला रहे हैं, गांव में तो और ज्यादा होती होगी, लेकिन उन्होंने कभी इस चीज पर ध्यान नहीं दिया और हमेशा बेटे के साथ खड़े रहे। 

शमी के कोच के अनुसार उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह अपने गेम पर फोकस करते हैं और सबसे बड़ी चीज ये है की और कहीं ध्यान नहीं देते। उनको लगता है की ये यही मेरा करियर है और इसी से मुझे सब कुछ मुझे मिल रहा है तो उसमें पूरा ध्यान देते हैं और ये अच्छी चीज है।

शमी के गांव में स्टेडियम बनना सुखद
शमी के कोच को जब बताया गया कि उनके गांव में स्टेडियम बनाने की बात हो रही है तो उन्होंने कहा "बहुत अच्छी बात है ये। देखिये अगर सरकार कुछ कर रही है तो बहुत बढ़िया बात है और वहां पे इसकी बहुत ज्यादा सख्त जरूरत है। वहां पर ग्राउंड नहीं है, आसपास के बच्चे मुरादाबाद आते हैं फिर वो प्रैक्टिस करने के लिए दिल्ली-नोएडा जाते हैं, अब तो वहां पे एक स्टेडियम होगा तो बच्चों को बहुत फायदा होगा। मुझे बेनतीजा खुशी है और आसपास के लोगों के लिए भी यह अच्छी बात है। कुछ लोग होंगे जिनको बहुत दूर जाना पड़ता था, उन्हें अब वहीं पे सब कुछ मिलेगा।


फाइनल मैच को लेकर शमी के कोच ने कहा "देखिये फाइनल मैच है और फाइनल हमेशा फाइनल होता है। तो देखना यही है कि भाई अब तक जैसा हम करते आए हैं और ये हमारी जो टीम है, बहुत जबरदस्त परफॉर्म कर रही है, वही हमें करना है और एक्स्ट्रा कुछ करने की कोशिश नहीं करनी है। मुझे शमी से यही उम्मीद है की वह एक स्पेल और बढ़िया डाले। जैसा अभी तक उसने किया है और भारत फाइनल जीते।
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