21 बरस के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने अपने लिए सिडनी टेस्ट यादगार बना दिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस चौथे और आखिरी टेस्ट के दूसरे दिन पहली पारी में पंत ने शतक जड़ा। दिल्ली से रणजी खेलने वाले रुड़की के वाशिंदे ऋषभ पंत ऑस्ट्रेलिया में सेंचुरी ठोकने वाले एशिया के पहले विकेटकीपर बल्लेबाज बन गए।
साथ ही ऋषभ (नॉटआउट 159) ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसकी धरती पर टेस्ट मैच में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज बन गए। महज नौ टेस्ट के यंग क्रिकेट करियर में पंत का यह दूसरा शतक है।
इसके पहले ऋषभ पंत ने बेहद मुश्किल हालातों में इंग्लैंड के खिलाफ उसी के घर में अपना पहला शतक मारा था। ऋषभ की यह पारी दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स (169) के बाद किसी भी मेहमान टीम के विकेटकीपर द्वारा टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया में खेली दूसरी सबसे बड़ी पारी है। वह साथ ही टेस्ट मैचों में दो हाफ सेंचुरी भी जड़ चुके हैं।
इस बेहतरीन सेंचुरी पर उनके उस्ताद तारक सिन्हा से अमर उजाला से खास बातचीत की। तारक सिन्हा ने कहा, 'ऋषभ पंत को यह साबित करना था कि वह टेस्ट क्रिकेट के भी अच्छे बल्लेबाज हैं। ऋषभ को टीम इंडिया की जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी करने की थी और वह इसमें कामयाब रहे। उन्होंने पारी के शुरू में खुद पर संयम रखा। वह दरअसल अभी बहुत नौजवान हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने लिए आगे बहुत कामयाबियां हासिल करनी है।'
तारक सिन्हा बताते हैं, 'मेरी ऋषभ से 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन बात हुई थी। मैंने तब उन्हें चेताया था कि टीम इंडिया की टेस्ट टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए खुद पर कुछ अंकुश रख उसकी जरूरत के मुताबिक खेलना सीखना होगा। मैंने उनसे यही कहा था कि महज 30-40 रन की पारी खेलोगे तो टीम इंडिया में जगह गंवाने का खतरा है। मेरी सलाह पर ऋषभ ने गौर किया और नतीजा उनकी सिडनी टेस्ट में मैच की नजाकत के मुताबिक बेहतरीन नॉटआउट सेंचुरी के रूप में सभी के सामने है।’