लाल गेंद को लेकर कप्तान विराट कोहली के निशाने पर रहने वाली गेंद निर्माता कंपनी एसजी गुलाबी गेंद की सफलता से उत्साहित होकर इसमें कोई परिवर्तन नहीं करेगी। इंग्लैंड के खिलाफ अहमदाबाद के मोटेरा में 24 फरवरी से होने वाले दिन-रात्रि मैच में वही गेंद आजमाई जाएगी जो बांग्लादेश के खिलाफ ईडन गार्डन में हुए पहले पिंक टेस्ट में प्रयोग की गई थी। बीसीसीआई की मांग पर एसजी ने 36 गुलाबी गेंदें मोटेरा भेजी हैं।
15 माह पुरानी पिंक बॉल से ही बनेगा मोटेरा में माहौल, तब पहले डे-नाइट टेस्ट के लिए SG ने भेजी थी 36 गेंद
विराट ने की थी आलोचना
चेन्नई में पहला टेस्ट हारने के बाद कोहली ने एसजी लाल गेंद की आलोचना की थी, लेकिन दूसरे टेस्ट में गेंद को लेकर कोई विवाद सामने नहीं आया। एसजी के एमडी पारस आनंद साफ करते हैं कि पहले टेस्ट में कठोर पिच के चलते गेंद जल्द खराब हुई। दूसरे टेस्ट में पिच के चलते गेंद से कोई शिकायत नहीं मिली। गुलाबी गेंद पर उन्होंने कहा कि पिछली बार की तरह इंग्लिश लेदर से गेंद का निर्माण किया गया है। यह गेंद काफी सफल रही। यही कारण है कि इस बार कोई प्रयोग नहीं करते हुए कोलकाता जैसी गेंदे ही बनाई गई हैं।
पिच पर निर्भर करेगी गुलाबी गेंद की सफलता
बांग्लादेश के खिलाफ पिंक टेस्ट से पहले बीसीसीआई के पूर्व चीफ क्यूरेटर दलजीत सिंह ने कहा था कि गुलाबी गेंद की सफलता इसके गंदा नहीं होने पर निर्भर करेगी। अगर पिच पर घास है तो गेंद जल्द गंदी नहीं होगी। अगर घास नहीं हुई तो गेंद जल्द गंदी होगी। इसका बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को नुकसान होगा। फिलहाल पिच पर काफी घास है, जो मैच के नजदीक आते-आते और कटेगी।
तीन दिन में ही जीता था भारत
हिंदुस्तानी सरजमीं पर पहला डे-नाइट टेस्ट मैच 22 नवंबर 2019 को कोलकाता के ईडन गार्डेंस में खेला गया था। यह भारत और बांग्लादेश दोनों का ही पिंक बॉल से पहला मैच था। इशांत शर्मा गुलाबी गेंद से विकेट लेने वाले पहले भारतीय, रोहित शर्मा के नाम पहला छक्का-कैच दर्ज हुआ। दूसरे दिन कोहली के बल्ले से टेस्ट करियर का 27वां शतक निकला। भारत ने तीसरे ही दिन मुकाबला जीत लिया था। यह देश में नतीजा निकलने वाला सबसे छोटा टेस्ट मैच रहा था। गेंदों के लिहाज से भारत ने इससे पहले 2018 में अफगानिस्तान के खिलाफ सबसे जल्दी जीत हासिल की थी।