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IND vs SL: बुमराह की अनुपस्थिति से घेरे में आया BCCI सीओई, कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; क्या तालमेल की है कमी?
Mon, 03 Aug 2026 08:26 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Mon, 03 Aug 2026 08:26 PM IST
सार
भारतीय क्रिकेट में चोट प्रबंधन और खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) की खेल विज्ञान एवं चिकित्सा टीम तथा भारतीय पुरुष सीनियर चयन समिति के बीच तालमेल की कमी के कारण जसप्रीत बुमराह श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। इससे चयनकर्ता नाराज बताए जा रहे हैं।
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जसप्रीत बुमराह
- फोटो : IANS
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विस्तार
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यानी सीओई की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज से जसप्रीत बुमराह के बाहर होने और उनके चयन को लेकर चयनकर्ताओं और सीओई की स्पोर्ट्स साइंस व मेडिकल टीम के बीच तालमेल की भारी कमी खुलकर सामने आ गई है।
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बुमराह की अनुपस्थिति से चयनकर्ता नाराज
हाल ही में राष्ट्रीय चयन समिति को यह भरोसा दिलाया गया था कि जसप्रीत बुमराह 15 अगस्त से शुरू हो रही श्रीलंका सीरीज के लिए उपलब्ध रहेंगे, लेकिन बाद में यह अहसास हुआ कि उनकी चोट उम्मीद से ज्यादा गंभीर है। खिलाड़ियों की चोट प्रबंधन व्यवस्था पर चर्चा के लिए सोमवार को वीवीएस लक्ष्मण सहित सीओई के शीर्ष अधिकारियों और चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर के बीच वर्चुअल (ऑनलाइन) बैठक हुई।
खेल में चोट लगना आम बात है, लेकिन आधुनिक सुविधाओं से लैस बंगलूरू स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर की स्पोर्ट्स साइंस टीम का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है। नितिन पटेल के जाने के बाद से बीसीसीआई में स्पोर्ट्स साइंस का कोई आधिकारिक प्रमुख नहीं है और इस रिक्त पद के कारण विभाग का हालिया कामकाज सवालों के घेरे में है। फिलहाल बंगलूरू सेंटर की कमान अंतरिम स्पोर्ट्स साइंस प्रमुख धनंजय केरा के हाथों में है, लेकिन खिलाड़ियों की रिकवरी के समय और 'रिटर्न टू प्ले' प्रोटोकॉल के पालन को लेकर उनकी साख और कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
हाल ही में राष्ट्रीय चयन समिति को यह भरोसा दिलाया गया था कि जसप्रीत बुमराह 15 अगस्त से शुरू हो रही श्रीलंका सीरीज के लिए उपलब्ध रहेंगे, लेकिन बाद में यह अहसास हुआ कि उनकी चोट उम्मीद से ज्यादा गंभीर है। खिलाड़ियों की चोट प्रबंधन व्यवस्था पर चर्चा के लिए सोमवार को वीवीएस लक्ष्मण सहित सीओई के शीर्ष अधिकारियों और चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर के बीच वर्चुअल (ऑनलाइन) बैठक हुई।
खेल में चोट लगना आम बात है, लेकिन आधुनिक सुविधाओं से लैस बंगलूरू स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर की स्पोर्ट्स साइंस टीम का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है। नितिन पटेल के जाने के बाद से बीसीसीआई में स्पोर्ट्स साइंस का कोई आधिकारिक प्रमुख नहीं है और इस रिक्त पद के कारण विभाग का हालिया कामकाज सवालों के घेरे में है। फिलहाल बंगलूरू सेंटर की कमान अंतरिम स्पोर्ट्स साइंस प्रमुख धनंजय केरा के हाथों में है, लेकिन खिलाड़ियों की रिकवरी के समय और 'रिटर्न टू प्ले' प्रोटोकॉल के पालन को लेकर उनकी साख और कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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हर्षित-नीतीश का मामला भी चर्चा का विषय
हर्षित राणा का मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि स्पोर्ट्स साइंस टीम ने उन्हें कैसे फिट घोषित कर दिया जबकि वह स्पष्ट रूप से ओवरवेट थे, जिसके कारण उनकी हैमस्ट्रिंग की चोट फिर से उभर आई। इसके अलावा वाशिंगटन सुंदर की फिटनेस भी लगातार चिंता का विषय रही है, क्योंकि उन्हें बार-बार हैमस्ट्रिंग की समस्याएं हुई हैं। यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या नीतीश कुमार रेड्डी को अपनी गेंदबाजी की गति बढ़ाने के लिए स्वतंत्र रूप से काम करने की हरी झंडी सीओई और बीसीसीआई से मिली थी, जिससे उनकी चोट पर असर पड़ा।
सीओई के कामकाज पर नजर रखने वाले बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा, सबसे सुरक्षित विकल्प किसी खिलाड़ी को बाहर करना होता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सीओई की मौजूदा खेल विज्ञान टीम शीर्ष खिलाड़ियों को समय पर मैदान पर वापस लाने के लिए पर्याप्त प्रयास कर रही है। चयनकर्ताओं को भरोसा दिलाया गया था कि बुमराह कम से कम एक टेस्ट मैच के लिए उपलब्ध रहेंगे। अब उन्हें बताया गया है कि पैर की चोट से उबर रहे साई सुदर्शन नेट्स में 75 मिनट बल्लेबाजी कर रहे हैं और चोट से अच्छी वापसी के संकेत दे रहे हैं। लेकिन अगर बाद में यह बताया जाता है कि साई श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट तक फिट नहीं हो पाएंगे तो चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी।
हर्षित राणा का मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि स्पोर्ट्स साइंस टीम ने उन्हें कैसे फिट घोषित कर दिया जबकि वह स्पष्ट रूप से ओवरवेट थे, जिसके कारण उनकी हैमस्ट्रिंग की चोट फिर से उभर आई। इसके अलावा वाशिंगटन सुंदर की फिटनेस भी लगातार चिंता का विषय रही है, क्योंकि उन्हें बार-बार हैमस्ट्रिंग की समस्याएं हुई हैं। यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या नीतीश कुमार रेड्डी को अपनी गेंदबाजी की गति बढ़ाने के लिए स्वतंत्र रूप से काम करने की हरी झंडी सीओई और बीसीसीआई से मिली थी, जिससे उनकी चोट पर असर पड़ा।
सीओई के कामकाज पर नजर रखने वाले बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा, सबसे सुरक्षित विकल्प किसी खिलाड़ी को बाहर करना होता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सीओई की मौजूदा खेल विज्ञान टीम शीर्ष खिलाड़ियों को समय पर मैदान पर वापस लाने के लिए पर्याप्त प्रयास कर रही है। चयनकर्ताओं को भरोसा दिलाया गया था कि बुमराह कम से कम एक टेस्ट मैच के लिए उपलब्ध रहेंगे। अब उन्हें बताया गया है कि पैर की चोट से उबर रहे साई सुदर्शन नेट्स में 75 मिनट बल्लेबाजी कर रहे हैं और चोट से अच्छी वापसी के संकेत दे रहे हैं। लेकिन अगर बाद में यह बताया जाता है कि साई श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट तक फिट नहीं हो पाएंगे तो चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी।
फिजियो की भूमिका समीक्षा के दायरे में
इन सब के बीच, टीम इंडिया के फिजियो कमलेश जैन की भूमिका भी नए सिरे से परखी जा रही है। वह करीब पांच वर्षों से भारतीय टीम के साथ हैं और खिलाड़ियों के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। माना जा रहा है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर और अगरकर इस बैठक का इंतजार कर रहे हैं। बैठक में लक्ष्मण और बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया (समन्वयक के रूप में) भी शामिल होंगे। गंभीर के अगले तीन सप्ताह श्रीलंका में रहने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि समीक्षा बैठक आमने-सामने होगी या वर्चुअल माध्यम से होगी। यह सवाल भी उठ रहा है कि जुलाई में जब गंभीर और अगरकर दोनों भारत में उपलब्ध थे, तब यह बैठक क्यों नहीं की गई।
इन सब के बीच, टीम इंडिया के फिजियो कमलेश जैन की भूमिका भी नए सिरे से परखी जा रही है। वह करीब पांच वर्षों से भारतीय टीम के साथ हैं और खिलाड़ियों के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। माना जा रहा है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर और अगरकर इस बैठक का इंतजार कर रहे हैं। बैठक में लक्ष्मण और बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया (समन्वयक के रूप में) भी शामिल होंगे। गंभीर के अगले तीन सप्ताह श्रीलंका में रहने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि समीक्षा बैठक आमने-सामने होगी या वर्चुअल माध्यम से होगी। यह सवाल भी उठ रहा है कि जुलाई में जब गंभीर और अगरकर दोनों भारत में उपलब्ध थे, तब यह बैठक क्यों नहीं की गई।