22 गज की पट्टी पर 24 साल तक करोड़ों हिंदुस्तानियों की उम्मीदों का बोझ लेकर दौड़ने वाले सचिन तेंदुलकर का आज 47वां जन्मदिन है। 24 अप्रैल 1973 को मुंबई में जन्मे इस खिलाड़ी ने बेहद कम उम्र में ही टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर लिया। 16 साल की छोटी सी उम्र में 1989 की पाकिस्तान सीरीज के दौरान भारत के लिए पहला मैच खेला। सियालकोट के चौथे टेस्ट के दौरान वकार यूनिस की एक छोटी गेंद उनकी नाक पर लगी और खून बहने लगा, लेकिन सचिन ने मैदान से बाहर जाने से इनकार कर दिया। वो कहते हैं, 'मैं नहीं चाहता कि किसी को भी ये लगे कि मैं डर गया था।'
वैसे तो सचिन का जन्म ही क्रिकेट के खेल में महान बनने के लिए हुआ था, लेकिन 1994 में न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच ने उनकी क्रिकेटीय जिंदगी को बदल कर रख दिया। ये पहला मौका था जब सचिन बतौर ओपनर टीम इंडिया के लिए खेलने उतरे। भारत के नियमित सलामी बल्लेबाज नवजोत सिंह सिद्धू चोटिल थे और सचिन ने ओपनिंग के लिए अपना हाथ उठाया।
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सचिन और सौरव के साथ अजहर
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वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की किताब टीम लोकतंत्र की माने तो सचिन कोच अजीत वाडेकर और कप्तान अजहर के पास गए और उनसे एक मौका मांगा। उन्होंने कहा कि अगर मैं फेल हो गया तो दोबारा ऐसा नहीं कहूंगा। तेंदुलकर की जिंदगी बदलने में पू्र्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन का बड़ा योगदान था।
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बतौर ओपनर सचिन का डेब्यू
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साल 1989 से 1994 तक वह वन-डे में एक भी शतक नहीं लगा पाए थे। हालांकि, इस मैच में सचिन शतक बनाने से चूक गए थे। तेंदुलकर ने 15 चौके और दो छक्के की मदद से 49 गेंदों पर 82 रन की अर्धशतकीय पारी खेली। उस दिन मैच के पहले 15 ओवर्स में नियमों के मुताबिक 30 गज के घेरे के बाहर मात्र दो फिल्डर्स के होने की शर्त का सचिन ने भरपूर फायदा उठाया।
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बतौर ओपनर सचिन का डेब्यू मैच
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सचिन का क्रिकेट खेलने का प्राकृतिक तरीका उन्हें इस छोटे फॉर्मेट के लिए मुफीद बना रहा था। टेस्ट क्रिकेट में सचिन थोड़ा आराम से, बिना रिस्क लिए। बिना पारी की शुरुआत में गेंद हवा में मारे खेलते थे, लेकिन वन-डे में उन्हें पहली ही बॉल से आसपास के फिल्डर्स के सिर के ऊपर मारने का लाइसेंस मिला हुआ था।