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IPL 2022: श्रीलंका के पूर्व कप्तान ने कहा- श्रीलंकाई खिलाड़ी आईपीएल छोड़ें, यह देश के साथ खड़ा होने का समय
Tue, 12 Apr 2022 04:46 PM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Tue, 12 Apr 2022 04:46 PM IST
सार
श्रीलंका को विश्व कप जिताने वाले कप्तान अर्जुन राणातुंगा ने कहा है कि श्रीलंकाई खिलाड़ियों को आईपीएल छोड़ अपने देश का समर्थन करना चाहिए। आईपीएल में भानुका राजपक्षे, वनिंदू हसरंगा और दुष्मंता चमीरा जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।
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अर्जुन राणातुंगा
- फोटो : ANI
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विस्तार
पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर और मंत्री अर्जुन राणातुंगा ने श्रीलंका के खिलाड़ियों से अपील की है कि वो आर्थिक संकट के समय में आईपीएल छोड़ देश के साथ खड़े हों। श्रीलंका मौजूदा समय में मुश्किल आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वहां ईंधन और भोजन की भारी मात्रा में कमी है। इससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं। कोरोना महामारी के आने के बाद यहां की अर्थव्यवस्था लगातार गिरी है और अब पूरी तरह से चरमरा चुकी है।
राणातुंगा ने कहा "मुझे नहीं पता, लेकिन कई खिलाड़ी हैं, जो शान से आईपीएल में खेल रहे हैं और अपने देश के बारे में कुछ नहीं बोल रहे हैं। दुर्भाग्य से लोग सरकार के खिलाफ बोलने से डरते हैं। ये खिलाड़ी सरकार के अधीन आने वाले क्रिकेट बोर्ड के लिए काम करते हैं और अपनी नौकरी खोने से डर रहे हैं। अब उन्हें भी एक कदम उठाने की जरूरत है, क्योंकि कई युवा खिलाड़ी भी आगे आ चुके हैं और आंदोलन के समर्थन में अपनी बात कही है।"
गलत के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी
राणातुंगा ने आगे कहा कि जब कुछ गलत हो रहा है, तब आपके अंदर उसके खिलाफ बोलने का साहस होना चाहिए। ऐसे में अपने धंधे के बारे में नहीं सोचना चाहिए। लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं आंदोलन में क्यों नहीं शामिल हो रहा हूं। इसकी वजह यह है कि मैं पिछले 19 सालों से राजनीति में रहा हूं और इस आंदोलन में कोई राजनेता शामिल नहीं हैं। यह कोई राजनीति का मुद्दा नहीं है। अब कोई भी राजनीतिक पार्टी या राजनेता आंदोलन का हिस्सा नहीं बने हैं। यही इस देश के लोगों की सबसे बड़ी ताकत है।
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श्रीलंका के वनिंदू हसरंगा और भानुका राजपक्षे आंदोलन के समर्थन में बयान दे चुके हैं।
अर्जुन ने कहा मैं निश्चिंत हूं कि आप यह जानते हैं कि कौन से खिलाड़ी आईपीएल खेल रहे हैं। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, लेकिन मैं चाहता हूं कि वो एक हफ्ते के लिए अपना काम छोड़कर यहां आएं और आंदोलन का हिस्सा बनें।
कोरोनाकाल में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था खराब
कोरोना महामारी की वजह से पर्यटन उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था, जो श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देता है। श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की भी कमी है। इस वजह से ईंधन और खाद्य पदार्थ के आयात में समस्या आ रही है। मूलभूत चीजों की कमी के कारण श्रीलंका को मित्र राष्ट्रों से लोन लेना पड़ रहा है। आर्थिक हालातों की वजह से देश में बड़ा आंदोलन हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
वहीं राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने सोमवार को कहा था कि लोगों को संयम बनाए रखने की जरूरत है और सड़कों पर न उतरें ताकि सरकार स्थिति को काबू में कर सके।
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राणातुंगा ने कहा "मुझे नहीं पता, लेकिन कई खिलाड़ी हैं, जो शान से आईपीएल में खेल रहे हैं और अपने देश के बारे में कुछ नहीं बोल रहे हैं। दुर्भाग्य से लोग सरकार के खिलाफ बोलने से डरते हैं। ये खिलाड़ी सरकार के अधीन आने वाले क्रिकेट बोर्ड के लिए काम करते हैं और अपनी नौकरी खोने से डर रहे हैं। अब उन्हें भी एक कदम उठाने की जरूरत है, क्योंकि कई युवा खिलाड़ी भी आगे आ चुके हैं और आंदोलन के समर्थन में अपनी बात कही है।"
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गलत के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी
राणातुंगा ने आगे कहा कि जब कुछ गलत हो रहा है, तब आपके अंदर उसके खिलाफ बोलने का साहस होना चाहिए। ऐसे में अपने धंधे के बारे में नहीं सोचना चाहिए। लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं आंदोलन में क्यों नहीं शामिल हो रहा हूं। इसकी वजह यह है कि मैं पिछले 19 सालों से राजनीति में रहा हूं और इस आंदोलन में कोई राजनेता शामिल नहीं हैं। यह कोई राजनीति का मुद्दा नहीं है। अब कोई भी राजनीतिक पार्टी या राजनेता आंदोलन का हिस्सा नहीं बने हैं। यही इस देश के लोगों की सबसे बड़ी ताकत है।
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श्रीलंका के वनिंदू हसरंगा और भानुका राजपक्षे आंदोलन के समर्थन में बयान दे चुके हैं।
अर्जुन ने कहा मैं निश्चिंत हूं कि आप यह जानते हैं कि कौन से खिलाड़ी आईपीएल खेल रहे हैं। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, लेकिन मैं चाहता हूं कि वो एक हफ्ते के लिए अपना काम छोड़कर यहां आएं और आंदोलन का हिस्सा बनें।
कोरोनाकाल में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था खराब
कोरोना महामारी की वजह से पर्यटन उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था, जो श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देता है। श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की भी कमी है। इस वजह से ईंधन और खाद्य पदार्थ के आयात में समस्या आ रही है। मूलभूत चीजों की कमी के कारण श्रीलंका को मित्र राष्ट्रों से लोन लेना पड़ रहा है। आर्थिक हालातों की वजह से देश में बड़ा आंदोलन हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
वहीं राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने सोमवार को कहा था कि लोगों को संयम बनाए रखने की जरूरत है और सड़कों पर न उतरें ताकि सरकार स्थिति को काबू में कर सके।