स्मृति शेष: मैदान पर दिलेरी और बाहर विनम्रता के लिए मशहूर रहे चेतन, जानिए उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें
चेतन चौहान दुनिया से विदा जरूर हो गए हैं, लेकिन क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में जो उन्होंने छाप छोड़ी है, वह हमेशा अमिट रहेगी। मैदान पर उन्हें बहादुरी के लिए तो मैदान के बाहर उन्हें उनकी विनम्रता के लिए याद किया जाएगा।
1977 में सिडनी टेस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज थाॅमसन का बड़ी बहादुरी से सामना किया था। वह क्रिकेटर से राजनेता भले हो गए थे, लेकिन क्रिकेट उनके दिल से कभी नहीं निकला। चाहे लोकसभा का गलियारा हो या फिर फिरोजशाह कोटला में उनके केबिन में बात क्रिकेट की ही होती थी।
मैदान पर लंबा समय गुजारने के बाद भी चौहान चयनकर्ता, प्रशासक और मैनेजर के रूप में खेल से जुड़े रहे। डीडीसीए में वह उच्च पदों पर रहे।
गावस्कर-चौहान की है दूसरी सर्वश्रेष्ठ जोड़ी
भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सुनील गावस्कर और चेतन की ओपनिंग जोड़ी दूसरी सर्वश्रेष्ठ जोड़ी है। दोनों ने 59 पारियों में 53.75 की औसत से 3010 रन जोड़े। इनमें 1979 के ऐतिहासिक ओवल टेस्ट में निभाई गई 213 रनों की साझेदारी भी है। यह साझेदारी 438 रनों के रिकॉर्ड लक्ष्य का पीछा करते हुए की गई थी।
40 टेस्ट खेले पर नहीं जड़ पाए कोई शतक
चौहान के नाम एक अनचाहा रिकॉर्ड रहा। चालीस टेस्ट खेलने और दो हजार से ऊपर रन बनाने के बावजूद उन्होंने टेस्ट में कभी शतक नहीं बनाया। 1981 में एडिलेड टेस्ट में 97 पर आउट होकर महज तीन रन से चूक गए थे। मंकी गेट के लिए प्रसिद्ध 2007 के विवादित ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर भी चौहान भारतीय टीम के मैनेजर थे। उस दौरान भी वह टीम के साथ अडिग खड़े हो गए थे।
चेतन चौहान अंतरराष्ट्रीय कॅरिअर
प्रारूप मैच रन उच्चतम औसत 100/50
टेस्ट 40 2084 97 31.57 0/16
वनडे 07 153 46 21.85 0/0
...और थाॅमसन के बाउंसर झेले पर झुके नहीं चौहान
चौहान किस कदर दिलेर थे इसका उदाहरण एक बार गावस्कर ने कोटला में दिया था। उन्होंने बताया था कि 1977 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी टेस्ट में वह और चौहान जिन्हें हम प्यार से मास्टर कहकर पुकारते थे बल्लेबाजी कर रहे थे। उस समय ज्योफ थाॅमसन को दुनिया का सबसे तेज गेंदबाज माना जाता था।
थाॅमसन की एक गेंद को चौहान ने स्लैश किया और गेंद बाउंड्री पार चली गई। पवेलियन में बैठे सभी खिलाड़ी मास्टर कहकर चिल्लाने लगे। उन्हें देखकर चौहान भी हंसे। उनकी थाॅमसन से निगाह मिल गई। फिर क्या था थाॅमसन आग बबूला हो गए और उनका सिर फोड़ने की बात कही।
गावस्कर ने चौहान को समझाया कि कभी पेसर को गुस्सा मत दिलाना। तो चौहान बोले वह भी राजपूत हैं उससे नहीं डरते। इसके बाद थाॅमसन ने तेज और खतरनाक गेंदबाजी चौहान को की, लेकिन वह उनकी गेंदों को झेलते गए और उफ तक नहीं किया। जब 127 गेंद खेलकर 42 रन बनाने के बाद चौहान आउट हुए तो उन्हें अस्पताल जाना पड़ा। वहां उनके अंगूठे में फ्रैक्चर निकला।