पार्क में खेलते वक्त बदली थी शुभमन की किस्मत, पूर्व क्रिकेटर ने 11 साल की उम्र में पहचानी थी प्रतिभा
- पार्क में खेलते देख अंडर-19 कैंप में बुलाकर नई गेंद से चार तेज गेंदबाजों का कराया था सामना
- घावरी और पिता लखविंदर को स्टार्क की उछलती गेंदों का आसानी से सामना करते देख नहीं हुआ आश्चर्य
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करसन घावरी हों या फिर उनके पिता लखविंदर गिल, दोनों को कोई हैरानी नहीं हुई जब मिचेल स्टार्क की उछलती हुई गेंदों पर बिछाए गए जाल को शुभमन गिल ने आसानी से तोड़ दिया। दोनों के मुंह से छूटते ही निकलता है शुभमन का सबसे मजबूत पक्ष ही उछलती छोटी गेंदों पर पुल और हुक शॉट लगाना है। घावरी तो यहां तक कह डालते हैं कि ब्रायन लारा, रिकी पोंटिंग और विराट कोहली की तरह फ्रंट फुट पर हुक और पुल शॉट लगाने की अद्भुत कला गिल में है, जो सिर्फ भगवान की देन है।
पीसीए को बोला लड़के को टीम में शामिल करो
घावरी यूं ही गिल की प्रतिभा के कायल नहीं हैं। पूर्व खब्बू तेज गेंदबाज और हरफनमौला घावरी को आज भी 10 साल पहले चंडीगढ़ में लगाया गया अंडर-19 तेज गेंदबाजों का वह कैंप याद है जहां 11 साल के गिल ने उन्हें सम्मोहित कर दिया था। घावरी अमर उजाला से खुलासा करते हैं कि वह कैंप के बाद पास ही स्थित पार्क में घूम रहे थे। वहां उन्होंने एक बच्चे को बल्लेबाजी करते देखा तो वह रुक गए। घावरी ने पास में बैठे शख्स से पूछा यह लड़का अच्छी बल्लेबाजी कर रहा है, कहां का है? शख्स ने बताया यह मेरा बेटा है मेरा नाम लखविंदर और बेटे का नाम शुभमन है। जब उसकी 11 साल उम्र बताई तो वह हैरान रह गए। उन्होंने शुभमन को अपने कैंप में आने के लिए कहा। वहां उन्होंने चार गेंदबाजों को सीमेंट के मैटिंग विकेट पर नई गेंद से गेंदबाजी करने को कहा। कोई गेंद हेलमेट पर आ रही थी कोई सीने पर लेकिन वह उनका सामना निर्भीकता से कर रहा था। कैंप खत्म होने के बाद वह पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के एक पदाधिकारी से मिले। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में यहां एक लड़का आया है। उसकी उम्र 11 साल है लेकिन उसे राज्य की अंडर-14 टीम में डाला जा सकता है। उसके बाद शुभमन को टीम में शामिल कर लिया गया।
नहीं होगी ऑस्ट्रेलिया में दिक्कत
घावरी यहां तक कहते हैं कि जिस तरह से वह उछलती गेंदों को हवा में नहीं जमीन पर खेलता है उसे ऑस्ट्रेलिया में दिक्कत नहीं आने वाली है। सिर्फ उसे पिच पर समय बिताने की कला सीखनी होगी। उसके पास स्ट्रोक्स की भरमार है। वह देश के लिए लंबे समय तक खेलने जा रहा है।
मेहनत उस दिन छोड़ना जब क्रिकेट छोड़नी हो
तीन साल की उम्र से शुभमन को खिला रहे लखविंदर के मुताबिक उसके अच्छे पुल, हुक शॉट की वजह बचपन में सीमेंट की पिच पर प्लास्टिक की गेंद से खेलना है। वह उसे सीमेंट की पिच पर लगातार उछलती गेंदें डालते थे। जो अब उसकी इन स्ट्रोक की आदत में बदल गई है।
लखविंदर के मुताबिक शुभमन जिस दिन पहला टेस्ट खेलने जा रहे थे तब उन्होंने उनसे यही कहा था कि उन्हें बिना किसी दबाव के अपना प्राकृतिक खेल खेलना है। इसके बाद उन्होंने गुरुद्वारे जाकर प्रभु का धन्यवाद किया। वह शुभमन से हमेशा एक बात कहते हैं कि अपनी मेहनत उसी दिन छोड़ना जिस दिन क्रिकेट छोड़नी हो। उसने इस मूल मंत्र को बांधकर रखा है।