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डोपिंग को कानूनी दायरे में लाने की तैयारी, कोच-डॉक्टर भी होंगे शामिल
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Fri, 28 Apr 2017 08:54 AM IST
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डोपिंग
- फोटो : Google Plus
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खेल मंत्रालय और नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने डोपिंग को कानून के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खेल मंत्री विजय गोयल ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि कोशिश की जा रही है कि डोपिंग को बढ़ावा देने वाले डॉक्टरों, बिना डॉक्टरी सलाह के स्टेरायड देने वाली दवा की दुकानों और कोचे को भी दंडनीय अपराध के दायरे में रखा जाए। हालांकि डोपिंग पर कानून का ड्राफ्ट तैयार करने को आयोजित सेमिनार में पूर्व खिलाड़ी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वाडा कोड के दायरे में रहकर ही डोपिंग पर लगाम कसी जाए।
डोपिंग पर कानून को लेकर खेल मंत्रालय ने अपना समर्थन जताया है। खेल मंत्री का कहना है कि वाडा कोड 2015 को लागू करने और देश में बढ़ रहे डोपिंग के मामलों पर लगाम लगाने को यह कानून जरूरी है। खेल सचिव इंजेती श्रीनिवास और नाडा के महानिदेशक नवीन अग्रवाल ने भी डोपिंग के कानून को लेकर वकालत की है। हालांकि अग्रवाल ने साफ कर दिया है कि जो भी फैसला होगा आम राय और हित धारकों के विचारों के बाद ही लिया जाएगा।
वहीं सेमिनार में आए दिग्गज हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार ने अपना विचार रखा कि एथलीटों को कानून के दायरे में लाना ठीक नहीं है। वाडा कोड पहले से ही कड़े हैं। उन्हीं को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। एनसीबी के अतिरिक्त निदेशक आरपी सिंह ने कहा कि एक खिलाड़ी का कैरियर ज्यादा लंबा नहीं होता है। डोपिंग में फंसने पर उस पर चार साल का प्रतिबंध लगता है। इतना बड़ा प्रतिबंध लगने का मतलब खिलाड़ी का कैरियर खत्म होना है। फिर देश में कानूनों की भरमार है। जो कानून हैं उसी के दायरे में रहकर डोपिंग पर लगाम कसी जाए तो अच्छा रहेगा।
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डोपिंग पर कानून को लेकर खेल मंत्रालय ने अपना समर्थन जताया है। खेल मंत्री का कहना है कि वाडा कोड 2015 को लागू करने और देश में बढ़ रहे डोपिंग के मामलों पर लगाम लगाने को यह कानून जरूरी है। खेल सचिव इंजेती श्रीनिवास और नाडा के महानिदेशक नवीन अग्रवाल ने भी डोपिंग के कानून को लेकर वकालत की है। हालांकि अग्रवाल ने साफ कर दिया है कि जो भी फैसला होगा आम राय और हित धारकों के विचारों के बाद ही लिया जाएगा।
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वहीं सेमिनार में आए दिग्गज हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार ने अपना विचार रखा कि एथलीटों को कानून के दायरे में लाना ठीक नहीं है। वाडा कोड पहले से ही कड़े हैं। उन्हीं को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। एनसीबी के अतिरिक्त निदेशक आरपी सिंह ने कहा कि एक खिलाड़ी का कैरियर ज्यादा लंबा नहीं होता है। डोपिंग में फंसने पर उस पर चार साल का प्रतिबंध लगता है। इतना बड़ा प्रतिबंध लगने का मतलब खिलाड़ी का कैरियर खत्म होना है। फिर देश में कानूनों की भरमार है। जो कानून हैं उसी के दायरे में रहकर डोपिंग पर लगाम कसी जाए तो अच्छा रहेगा।
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