समय के साथ पूरी दुनिया में बदलता गया क्रिकेट का रंग
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समय के साथ पूरी दुनिया में क्रिकेट बदलता गया है, तो क्रिकेट की जर्सी का रंग भी। इन रंगों पर बहसें भी हुईं, राजनीति का आरोप भी लगा, लेकिन क्रिकेट का रंग आज भी हिंदुस्तान में सर चढ़कर बोल रहा है। आजकल हर ओर टीम इंडिया और उसके स्पोर्ट्स स्प्रिट की बात हो रही है।
करोड़ों लोगों की नजर वर्ल्ड कप क्रिकेट पर है। लेकिन, इन सबके बीच जैसे ही टीम इंडिया की जर्सी ब्लू से ऑरेंज हुई, चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। बहसों का दौर शुरू हो गया। लोगों का क्या है, वे तो हर चर्चा में कूदना अपनी महारथ समझते हैं। राजनेता, खिलाड़ियों के साथ आम लोगों के दिलचस्प बयानों से लोगों को दो-चार होना पड़ा।
असल में, भारत क्रिकेट प्रेमियों को देश है। यहां क्रिकेट की दीवानगी इस कदर है कि बच्चे से लेकर बूढ़े तक इसके जबरा फैन हैं। आलम यह है कि वे पसंदीदा चीजें भी क्रिकेट के आगे गौण हैं। हम कह सकते हैं कि क्रिकेट खेलना, क्रिकेट देखना, क्रिकेट सराहना, क्रिकेट सलाह से लेकर क्रिकेट व क्रिकेटर की गॉसिप में मशगूल रहना भारतीयों का दूसरा धर्म है।
यहीं तक नहीं सिमटी है क्रिकेट दीवानगी। भारतीय क्रिकेट जर्सी को लेकर भी उतावले रहते हैं। कुछ क्रिकेट फैन्स तो भारतीय टीम की नीली जर्सी की कॉपी को अपने वार्डरोब में जगह देते हैं। और कुछ तो कॉपी जर्सी को मन्नत कबूलते हुए कम से कम वर्ल्ड कप तक रोजाना पहनते हैं।
भारतीय टीम की जर्सी को लेकर भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का अजब-गजब जुनून है। हाल ही में आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 के महासंग्राम के बीच भारत में टीम इंडिया की नारंगी जर्सी को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। कई लोगों ने इसे राजनीति से जोड़कर भी देखा।
असल में बदलाव का कारण रहा नीला रंग, क्योंकि इंग्लैंड और भारत दोनों क्रिकेट टीमों की जर्सी का रंग नीला है। इस कारण भारतीय टीम को इंग्लैंड टीम के साथ खेलने के लिए जर्सी का रंग बदलना पड़ा। भारतीय टीम की नारंगी जर्सी का मोदी मैजिक से कुछ लेना देना नहीं है। इस बाबत आईसीसी का कहना है कि जर्सी के रंग के विकल्प के लिए बीसीसीआई को कई सारे विकल्प दिए गए थे।
बीसीसीआई ने वही रंग चुना, जो जर्सी के रंग के साथ बेहतर लगा। बदलाव की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि इंग्लैंड की टीम भी भारतीय टीम की तरह नीली जर्सी पहनती है। बीसीसीआई ने कहा कि टीम इंडिया की जर्सी का नया डिजाइन भारत की पुरानी टी-20 जर्सी से लिया गया है, जिसमें नारंगी रंग था।
नई जर्सी को अमेरिका में बैठे डिजानर ने डिजाइन किया है, जिसमें कोई नया रंग इस्तेमाल नहीं किया गया। जर्सी को डिजाइन करने के दौरान इसका भी ध्यान रखा गया कि टीम इंडिया के खिलाड़ियों को पहचानने में क्रिकेट प्रेमियों को कोई दिक्कत न आए।
मसलन 1980 के वर्ल्ड कप में भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी में नीले रंग की कई बौछारें थीं, जिसमें लाइट ब्लू से लेकर ऑक्सफोर्ड ब्लू रंग शुमार थे। साल 2019 के वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ लीग गेम से पहले ऑरेंज अवे किट को लॉन्च किया गया था।
किक्रेट में रंग
ऑस्ट्रेलिया ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रंगीन कपड़े पेश किए। 1985 में क्रिकेट की विश्व चैंपियनशिप में, भारत ने जर्सी में हल्के नीले और पीले रंग के संयोजन को अपनाया। यही रंगों का संयोजन आने वाले वर्षों में मानक रहा। यह किट, फैन्स और प्रायोजकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा। किट में दो महत्वपूर्ण चीजें जुड़ी-टीम और खिलाड़ी के नाम
ऑक्सफोर्ड ब्लू का संक्रमण
आज भी क्रिकेट प्रेमियों के लिए 1992 का विश्व कप किट सुपरहिट है। भारत ने ऑक्सफोर्ड ब्लू पर कब्जा किया, जबकि इंग्लैंड ने हल्के नीले रंग की जर्सी पहनी थी। नीले रंग की गहरे रंग की छाया दक्षिण अफ्रीका के दौरे के लिए बाद में, नीले और पीले रंग की धारियों के साथ हृदय की रेखाओं की तरह रही। इस श्रृंखला ने भारतीय प्रशंसकों को कई दिल तोड़ने वाले क्षण दिए।
पीली-नेवी ब्लू किट सचिन तेंदुलकर के पास शायद यह एक तरह की पीली-नेवी ब्लू किट कहीं संरक्षित है और एक अच्छी वजह के लिए भी। एक सलामी बल्लेबाज के रूप में अपनी पहली पारी में, उन्होंने 1994 में ऑकलैंड में 49 गेंदों पर 82 रन की शानदार पारी खेली थी।
लौटा डार्क ब्लू
डार्क ब्लू वापस आ गया था, 1995 में न्यूजीलैंड शताब्दी श्रृंखला के लिए, लेकिन शायद पहली बार भारतीय तिरंगे ने टीम की जर्सी में उपस्थिति दर्ज कराई। खिलाड़ियों ने अपनी आस्तीन पर एक विशाल अशोक चक्र पहना था।
1996 में किट
1996 के विश्व कप में आखिरी बार सभी टीमें किट में एक निश्चित डिजाइन के साथ निकलीं। भारत हल्के नीले रंग में वापस चला गया, टीम के नाम के नीचे एक पीले कॉलर और पतली पीली पट्टियों के साथ।
लाउड रंगों वाली किट
लाउड रंगों ने इस किट को 1997 के श्रीलंका दौरे से आंखों पर थोड़ा कठोर बना दिया। लेकिन रॉबिन सिंह ने कोई उपद्रव नहीं किया। उन्होंने यह पहनकर अपना एकमात्र एकदिवसीय शतक बनाया।
1998 में शारजाह का मैदान
एक श्रृंखला तेंदुलकर ने अपनी बनाई। हल्के नीले रंग की शर्ट, गहरे नीले रंग की पतलून, जिसमें भगवा और हरे रंग का झंडा दोनों तरफ प्रमुख था।
आज भी हिट
1999 के विश्व कप में भारत ने फिर से आसमानी नीला रंग पहना, जिसमें बड़े-बड़े आकार के बीसीसीआई के लोगो को शर्ट के ऊपर तिरछे तरीके से लगया था। यह डिजाइन अभी भी प्रतिकृति शर्ट के साथ काफी लोकप्रिय है।
लाइट ब्लू थी पसंद
साल 2000 और 2001 में भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी में नेवी ब्लू में मिक्स-मैच नहीं किया गया। कारण लाइट ब्लू पसंदीदा विकल्प था।
2002 में सरल किट
आईसीसी ने 2002 में आदेश दिया कि आधिकारिक टूर्नामेंट प्रायोजकों के प्रतिद्वंद्वियों को अपने लोगो को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है, इसलिए टीम किट को 2002 चैंपियंस ट्रॉफी के लिए फिर से तैयार करना पड़ा। टीम इंडिया की किट वास्तव में सरल लग रही थी।
सहारा इंडिया को नहीं मिली अनुमति
2003 के विश्व कप में एंबुश मार्केटिंग क्लॉज को भी नहीं बख्शा गया था। सहारा इंडिया को भारत की किट पर प्रदर्शित होने की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि इसके एयरलाइन विंग ने दक्षिण
अफ्रीकी एयरवेज के साथ मुख्य
प्रायोजकों में से एक के साथ संघर्ष किया था। टीम को सहारा की आवासीय परियोजना एंबी वैली को प्रदर्शित करने की अनुमति दी गई।
2004 में ऐतिहासिक जीत
ब्रशस्ट्रोक में तिरंगे के साथ यह हल्की नीली किट प्रायोजकों के नीचे तिरछे प्रदर्शित की गई थी, सहारा 2000 के दशक के मध्य में मुख्य आधार था। यहां भारतीय 2004 में पाकिस्तान में एक ऐतिहासिक श्रृंखला जीत का जश्न मनाते हैं।
तिरंगा और नीला रंग
2007 से विश्व टी-20 के दौरान सबसे यादगार रूप से जर्सी पर तिरंगे के साथ नीले रंग की एक हल्की छाया थी, जो केंद्र से दाहिने कंधे पर स्थानांतरित हो रही थी और एक चिकनी डिजाइन में नीचे गिर रही थी।
गहरे नीले को अलविदा
2009 की शुरुआत से, टीम ने गहरे नीले रंग को अलविदा करते हुए एक गहरे रंग की छाया को गले लगाने के लिए बोली लगाई। यह न्यूजीलैंड के दौरे से पहले
लिया गया था।
नीले में कई रंग
2011 के विश्व कप के लिए, नारंगी में टीम का नाम, केसरिया, सफेद और हरे रंग की एक पतली पट्टी के साथ।
कंटेम्पररी ब्लू किट
2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होम सीरीज के लिए किट के प्रयोजक नाइकी ने कंटेम्पररी ब्लू किट लॉन्च की, जिसे 100 फीसदी रीसाइकल पाॅलिस्टर से
बनाया गया था।
स्टार इंडिया
स्टार इंडिया 2014 में टीम का नया प्रायोजक बना। 2015 विश्व कप से आगे, खिलाड़ियों ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड की छत पर सोशियली रिस्पॉन्सिबल किट
का प्रदर्शन किया।
ओप्पो की एंट्री
नए प्रायोजक के रूप में ओप्पो की एंट्री हुई। नाइकी ने कुछ कदम आगे बढ़ते हुए नई सुविधाओं 4 डी क्विकनेस और जीरो डिस्ट्रैक्शन की शुरुआत की।
2019 में नीला और नारंगी
2019 विश्व कप से पहले अवे जर्सी का अनावरण किया गया। एजबेस्टन लीग खेल के लिए इंग्लैंड के आसमानी नीले रंग के साथ टकराव से बचने के लिए, नाइकी ने मुख्य रूप से नारंगी किट निकाली। सामने नीला, आस्तीन पर नारंगी और बाजुओं पर नारंगी रंग है।