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CoA ने बीसीसीआई पदाधिकारियों के कतरे पर, छीने कामकाजी अधिकार
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Mar 2018 09:03 PM IST
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Vinod Rai
प्रशासकों की समिति (सीओए) और बीसीसीआई पदाधिकारियों के बीच चल रही तनातनी ने खराब रूप धारण कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट में सौंपी गई अपनी सातवीं स्टेटस रिपोर्ट में बोर्ड के तीनों पदाधिकारियों कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना, कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी और ट्रेजरॉर अनिरुद्ध चौधरी को पदों से हटाए जाने की सिफारिश के बाद सीओए चेयरमैन विनोद राय ने इन तीनों के पर कतर दिए हैं। राय ने बृहस्पतिवार को दो और 30 जनवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आदेश को आधार बना तीनों पदाधिकारियों की शक्तियों में भारी कटौती कर दी है। वहीं सीईओ राहुल जौहरी की शक्तियां बढ़ गई हैं।
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अब तीनों ही पदाधिकारियों को अपना और अपने कर्मियों का यात्रा खर्च लेने के लिए सीओए की मंजूरी लेनी होगी। यही नहीं किसी भी सब कमेटी की बैठक बिना सीओए की मंजूरी के नहीं होगी। किसी भी अनुबंध या नियुक्ति पर अगर कार्यवाहक सचिव ने पांच दिन के अंदर हस्ताक्षर नहीं किए तो सीओए की मंजूरी से सीईओ के हस्ताक्षर पर इसे मंजूरी दे दी जाएगी।
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इस आदेश के साथ ही भारतीय क्रिकेटरों के मोटे वार्षिक अनुबंध का रास्ता साफ हो गया है। सचिव अमिताभ चौधरी को अंधेरे में रख तैयार होने वाले इस अनुबंध पर उन्होंने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। नए आदेश के तहत अब चौधरी के हस्ताक्षर का मतलब नहीं रह जाएगा। 25 लाख रुपये के ऊपर के पेमेंट पर भी चौधरी ने हस्ताक्षर नहीं किए तो इसे सीओए की मंजूरी से पास कर दिया जाएगा। साथ ही सीओए ने इन तीनों पदाधिकारियों की बाहरी कानूनी सलाहों का भुगतान करने पर भी रोक लगा दी है।
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आदेश में सबसे बड़ा झटका यह दिया गया है कि पदाधिकारियों की ओर किया गया कोई भी संवाद या लिए गए फैसले की जानकारी सीओए को दी जाएगी। अगर पदाधिकारी ऐसा नहीं करते हैं तो बोर्ड के कर्मी लिए गए फैसलों की कॉपी उन्हें भेजेंगे। बिना सीओए की मंजूरी के इन फैसलों का मतलब नहीं रह जाएगा।
वहीं सीओए के इस आदेश पर बीसीसीआई के पदाधिकारियों की त्योरियां चढ़ गई हैं। बोर्ड के एक पदाधिकारी का कहना है कि सोसायटी एक्ट के तहत बिना उनके हस्ताक्षर के कोई भी अनुबंध या पेमेंट नहीं हो सकता है। वे इस संबंध में कानूनी सलाह भी ले रहे हैं। हो सकता है कि उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में हलफनामा भी दाखिल किया जाए।