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9 भारतीय क्रिकेटर्स ने की थी IPL में फिक्सिंग, क्या इस मांग से बेनकाब होंगे दागी चेहरे?

Fri, 02 Nov 2018 02:02 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 02 Nov 2018 02:02 PM IST
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coa asked supreme court to allow probe against nine indian players mentioned in sealed envelop
csk ipl

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की प्रशासकों की समिति (सीओए) ने सुप्रीम कोर्ट से 9 भारतीय क्रिकेटर्स के नाम का खुलासा करने को कहा है, जिनके नाम मैच और स्पॉट फिक्सिंग के संदेह में जस्टिस मुद्गल समिति द्वारा बंद लिफाफे में जमा किए गए थे। 2013 इंडियन प्रीमियर लीग भ्रष्टाचार मामले में जांच करते हुए जस्टिस मुद्गल समिति ने यह लिफाफा सौंपा था।

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सीओए का मानना है कि 9 क्रिकेटर्स के नाम बीसीसीआई की भ्रष्टाचार इकाई को जांच के लिए भेजे जाए, जिससे अन्य खिलाड़ियों को कड़ा संदेश जाए और यह जांच एक निवारक के रूप में काम करे।
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जस्टिस मुद्गल समिति ने 2014 में सुप्रीम कोर्ट को लिफाफे में 13 नाम सौंपे थे, लेकिन अब तक सिर्फ चार नामों का खुलासा हुआ है। राजस्थान रॉयल्स के सह मालिक राज कुंद्रा, चेन्नई सुपरकिंग्स के टीम प्रिंसिपल गुरुनाथ मय्यपन, बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन और आईपीएल के सीओओ सुंदर रमन का नाम इस लिस्ट में सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक कुंद्रा और मय्यपन पर बीसीसीआई ने आजीवन प्रतिबंध लगाया जबकि श्रीनिवासन और रमन को क्लीन चिट मिली।
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रिपोर्ट में कहा गया कि आईपीएल भ्रष्टाचार मामले के प्रमुख जांचकर्ता बीबी मिश्रा ने अखबार से इस साल बातचीत में कहा था कि शीर्ष भारतीय खिलाड़ी और बुकी के बीच संदेहास्पद लिंक का पता चला था, लेकिन वह जांच पूरी नहीं कर सके क्योंकि यह उनके कार्यक्षेत्र से बाहर था। उनके पास समय की भी कमी थी। मिश्रा के हवाले से कहा गया, खिलाड़ियों के खिलाफ कई आरोप लगे हैं। एक नहीं बल्कि 9 खिलाड़ियों के खिलाफ। हमने जितनी जांच की, उसमें से चार का नाम सार्वजनिक किया गया। 

एसीयू जरूर लोकपाल को करे रिपोर्ट

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vinod rai

सीओए का मानना है कि बीसीसीआई के नए संविधान में एसीयू या उसके रिपोर्ट करने के ढांचे पर कोई विशेष प्रावधान नहीं है। यह तय करने के लिए कि एसीयू के सदस्य स्वतंत्र होकर काम करने में सक्षम है, सीओए का मानना है कि एसीयू के हेड को लोकपाल को रिपोर्ट करना चाहिए।

इसके मुताबिक एसीयू जो जांच करेगा वह बीसीसीआई के बजाय लोकपाल को अपनी रिपोर्ट जमा करे ताकि स्वतंत्र एक्शन लिया जा सके। एसीयू को कार्य में स्वतंत्रता देने से लोकपाल के पास भी बीसीसीआई संविधान के तहत प्रभावशाली जांच कर सकेगा।

श्रीनिवासन जब बीसीसीआई अध्यक्ष थे तब पूर्व शीर्ष पुलिस रवि सावनी उनको रिपोर्ट देते थे। सावनी को मय्यपन, कुंद्रा, श्रीसंथ, अंकित चव्हाण, अजित चंदीला, सिद्धार्थ त्रिवेदी और हरमीत सिंह पर फिक्सिंग के आरोपों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। बोर्ड ने क्रिकेटर्स को सजा दी, लेकिन आईपीएल के मालिक को क्लीन चिट दी। उन्होंने इसका कारण दिया कि मुंबई पुलिस से किसी प्रकार का सबूत नहीं मिला। 

सीओए चाहता है कि क्रिकेट में भ्रष्टाचार गतिविधियों का अपराधिकरण हो जैसे बीसीसीआई के खिलाड़ियों पर अधिकार क्षेत्र है, अधिकारियों से मेल खाता है लेकिन भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्य करना शक्तिहीन है।

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