बीसीसीआई ने छत्तीसगढ़ की टीम पर लगाई सदस्यता की मुहर
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सर्वसम्मति से यह फैसला भी किया है कि जस्टिस लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने में आ रही 'कठिनाइयों और असंगतियों' को लेकर वह उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल करेगी। विशेष आम बैठक (एसजीएम) में शुक्रवार को बोर्ड ने यह फैसला किया।
जस्टिस लोढ़ा समिति ने बीसीसीआई के ढांचे में व्यापक बदलाव की सिफारिश की है। इन सिफारिशों में बोर्ड के पदाधिकारियों का कार्यकाल सीमित करने, उच्चतम आयु 70 वर्ष करने, एक राज्य से एक वोट करने, एक व्यक्ति एक पद और मंत्रियों एवं सरकारी अधिकारियों के पदाधिकारी बनने पर रोक और मैचों के प्रसारण के दौरान विज्ञापन का समय सीमित करने के सुझाव दिए हैं।
बीसीसीआई ने बैठक के बाद एक विजप्ति में बताया, "सदस्यों ने बोर्ड के मानद सचिव अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई की ओर से उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया है। इसमें बताया जाएगा कि माननीय जस्टिस लोढ़ा कमेटी के सुझावों को लागू करने में क्या दिक्कतें और असंगतियां हैं।"
बीसीसीआई अपनी राज्य इकाइयों को भी कह चुकी है कि वह सिफारिशों को लागू करने में आ रही मुश्किलों को लेकर अलग से हलफनामा दाखिल कर सकती हैं। सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन सिफारिशों को लेकर दो तरीके से प्रभावित हो रही है। पहला तो एक राज्य एक वोट के आधार पर उसके वोटिंग अधिकार पर असर पड़ रहा है और दूसरे यदि पदाधिकारियों की उच्चतम आयु 70 वर्ष करने की सिफारिश लागू होती है तो उसके अध्यक्ष निरंजन शाह को पद छोड़ने की जरूरत पड़ेगी।
सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एससीए) प्रमुख निरंजन शाह ने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल करेंगे। कार्यकारी समिति ने इसके अलावा अध्यक्ष और सचिव को एक एजेंसी नियुक्त करने का अधिकार भी दिया है जो बोर्ड के सीईओ और सीएफओ के लिए सही उम्मीदवार की तलाश करे। जैसा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने सिफारिश की है।
बीसीसीआई के लिए इसलिए बढ़ रही हैं मुश्किलें
माना जा रहा है कि हलफनामे में जिन सिफारिशों का जिक्र हो सकता है उनमें एक राज्य, एक वोट का मुद्दा हो सकता है जिससे क्रिकेट के पारंपरिक पावरहाउस मुंबई, बड़ौदा को वोटिंग अधिकार गंवाना पड़ सकता है।
पदाधिकारियों की उच्चतम आयु 70 साल करने की बात और दो पदों के बीच तीन साल का कूलिंग पीरियड भी बीसीसीआई के लिए चिंता का सबब बन रहा है।
एक व्यक्ति-एक पद की सिफारिश के कारण कोई पदाधिकारी राज्य इकाई और बीसीसीआई में एक साथ पद नहीं संभाल पाएगा। ऐसे में सचिव अनुराग ठाकुर, कोषाध्यक्ष अनिर्द्ध चौधरी प्रभावित होते हैं। सबसे अहम मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान विज्ञापन ब्रेक सिर्फ लंच और चायकाल तक करने की सिफारिश से भी बोर्ड चिंतित है क्योंकि इससे उसके राजस्व में 1500 करोड़ की कटौती हो सकती है।
जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने ऑफ सीजन के दौरान क्रिकेट स्टेडियमों में अन्य खेलों के आयोजन की सिफारिश की है जिसे बीसीसीआई व्यवहारिक रूप से संभव नहीं मानता।
छत्तीसगढ़ की टीम को बोर्ड की पूर्ण सदस्यता
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार को मुंबई में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ को पूर्ण सदस्यता प्रदान कर दी। अब छत्तीसगढ़ बीसीसीआई से संबद्धित 28वीं इकाई बन गया है और उसकी टीम घरेलू क्रिकेट रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लेगी।
बीसीसीआई ने कहा कि सदस्यों ने बोर्ड की एफिलेशन कमेटी की सिफारियों को सदस्यों ने मंजूरी प्रदान कर दी है। अब छत्तीसगढ़ की टीम बीसीसीआई के टूर्नामेंटों में सेंट्रल जोन का हिस्सा होगी।
इस बीच बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के सचिव मृत्युंजय तिवारी को बोर्ड ने कार्यकारी समिति की बैठक में शामिल होने की अनुमति प्रदान की जबकि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (सीएबी) के सचिव आदित्य वर्मा को बैठक के लिए निमंत्रण नहीं दिया गया था।