{"_id":"5cbfd518bdec224e4c205146","slug":"birthday-special-farewell-speech-of-sachin-tendulkar","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"B'Day Spcl: सचिन तेंदुलकर के विदाई भाषण में जब मास्टर-ब्लास्टर के साथ रोया था पूरा देश","category":{"title":"Cricket News","title_hn":"क्रिकेट न्यूज़","slug":"cricket-news"}}
B'Day Spcl: सचिन तेंदुलकर के विदाई भाषण में जब मास्टर-ब्लास्टर के साथ रोया था पूरा देश
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: अंशुल तलमले
Updated Wed, 24 Apr 2019 11:08 AM IST
विज्ञापन
1 of 15
सचिन तेंदुलकर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
जिस खिलाड़ी ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दी, आज वह 46 साल का हो गया है- सचिन रमेश तेंदुलकर। क्रिकेट को धर्म और सचिन को उसका भगवान बताने वाले करोड़ों फैंस के लिए आज का दिन किसी त्योहार से कम नहीं।
24 अप्रैल 1973 को मुंबई में जन्में सचिन का जन्म दिन में एक बजे मुंबई के शिवाजी पार्क राणाडे रोड स्थित निर्मल नर्सिंग होम में हुआ था। जब भी सचिन के बारे में बात होती है तो उनके खेल, रिकॉर्ड का ही जिक्र होता है, इसलिए आज हम उनकी फेयरवेल स्पीच की बात करेंगे, जिसने पूरी दुनिया की आंखें नम कर दी थी।
सचिन ने जिस मैदान से करियर की शुरुआत की थी उसी ग्राउंड पर अपने परिवार और घरेलू दर्शकों के बीच क्रिकेट छोड़ा।
मास्टर ब्लास्टर जब आखिरी बार मैदान पर उतरे तो उन्होंने 22 यार्ड की उस पिच को झुककर सलाम किया। सचिन की विदाई स्पीच में कहे गए एक-एक शब्द ने लोगों के दिल को छुआ था।
वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरा और आखिरी मैच खत्म होने के बाद रवि शास्त्री ने उनसे सवाल पूछने के बजाय, उन्हें ही माइक सौंप दिया। आगे सचिन का विदाई भाषण...
2 of 15
दोस्तों प्लीज बैठ जाइए, मैं और भावुक हो जाऊंगा। पूरी जिंदगी मैंने यहीं बिताई है, यह सोचना मुश्किल है कि मेरे इस शानदार सफर का अंत हो रहा है। यूं तो मैं पढ़कर बोलना पसंद नहीं करता, लेकिन आज मैंने एक लिस्ट तैयार की है कि मुझे किन लोगों का धन्यवाद करना है।
3 of 15
सबसे पहले मेरे पिता का नाम आता है, जिनकी मृत्यु 1999 में हो गई थी। उनकी सीख के बिना मैं आपके सामने खड़ा ना हो पाता। उन्होंने कहा था - अपने सपनों के पीछे भागो, राह मुश्किल होगी, लेकिन कभी हार मत मानना। आज मैं उनको बहुत मिस कर रहा हूं। मेरी मां, मुझे नहीं पता कि मेरे जैसे शैतान बच्चे को उन्होंने कैसे संभाला। मैंने जब से क्रिकेट शुरू किया है, तब से उन्होंने सिर्फ और सिर्फ प्रार्थना की है मेरे लिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 15
स्कूल घर से दूर होने की वजह से मैं चार साल तक अपने अंकल-आंटी के यहां रहा। उन्होंने मुझे अपने बेटे की तरह संभाला। मेरे बड़े भाई नितिन ज्यादा बोलना पसंद नहीं करते, लेकिन उन्होंने मुझे इतना जरूर कहा- 'मुझे पता है कि तुम जो भी करोगे, उसमें 100 प्रतिशत ही दोगे।' मेरा पहला बल्ला मेरे बहन सविता ने मुझे गिफ्ट किया था। जब मैं बल्लेबाजी कर रहा होता हूं तो वो आज भी मेरे लिए व्रत रखती हैं।
विज्ञापन
5 of 15
मेरा भाई अजीत, उनके बारे में मैं क्या कहूं। हमने इस सपने को साथ जिया था। उन्होंने मेरे लिए अपना करियर दांव पर लगा दिया। वो ही पहली बार मुझे मेरे पहले कोच रमाकांत आचरेकर के पास ले गए। पिछली रात भी मेरे विकेट को लेकर उन्होंने फोन पर मुझसे बात की। जब मैं नहीं खेल रहा होता हूं तब भी हम खेलने की तकनीक पर बात कर रहे होते हैं। अगर वो नहीं होते तो आज मैं क्रिकेटर ना होता।
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें क्रिकेट समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। क्रिकेट जगत की अन्य खबरें जैसे क्रिकेट मैच लाइव स्कोरकार्ड, टीम और प्लेयर्स की आईसीसी रैंकिंग आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।