बीसीसीआई की ओर से पृथ्वी शॉ पर पिछली तिथि से लगाए गए आठ माह के प्रतिबंध फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वाडा यूं ही नहीं उस पर नाडा के संरक्षण में आने का दबाव बना रहा है। शॉ के फैसले में कई ऐसे तथ्य हैं जिन पर सवाल उठाए जा सकते हैं।
इस फैसले को चुनौती देने का अधिकार या तो आईसीसी को है या फिर खुद वाडा को। आईसीसी का तो इस फैसले को चुनौती देना मुश्किल है, लेकिन देखना होगा वाडा इस बार अपनी शक्तियों का प्रयोग करता है या नहीं।
नहीं किया टेस्ट रिपोर्ट मिलने की तिथि का खुलासा
शॉ के फैसले में संदेह की सबसे बड़ी वजह 22 फरवरी को सैंपल लेने के बाद 16 जुलाई को प्रोविजनल प्रतिबंध लगाना है। बीसीसीआई ने आईडीटीएम को सैंपल लेने के अधिकार दे रखे हैं, जबकि टेस्टिंग एनडीटीएल में कराई जाती है।
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पृथ्वी शॉ
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सूत्र बताते हैं कि आईपीएल, रणजी ट्रॉफी और मुश्ताक अली ट्रॉफी में टेस्टिंग के लिए बोर्ड एनडीटीएल से 48 घंटे में रिपोर्ट दिए जाने की राशि देता है। अगर ऐसा है तो फिर बोर्ड को पृथ्वी शॉ की रिपोर्ट भी दो दिन या हद से हद एक सप्ताह के अंदर मिल गई होगी, लेकिन आर्डर में बोर्ड ने कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि उन्हें एनडीटीएल से कब रिपोर्ट मिली।
ऑर्डर में यह भी लिखा गया है कि रिपोर्ट के बारे में शॉ को 16 जुलाई को बताया गया और 18 जुलाई को उन्होंने इसे अंजाने में की गई गलती बताते हुए रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। शॉ ने दवा का नाम भी नहीं बताया, बावजूद इसके बोर्ड ने उन्हें अंजाने में की गई गलती का लाभ देते हुए पिछली तिथि से प्रतिबंध लगाया।
वाडा फैसले को चुनौती देता है या नहीं
देखने वाली बात यह होगी कि वाडा इस फैसले को चुनौती देता है या नहीं। वाडा ने बीसीसीआई पर नाडा के संरक्षण में आने का दबाव बना रखा है, लेकिन आज तक उसने कभी बीसीसीआई के एंटीडोपिंग फैसले पर कोई अपील नहीं की है।