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B'day Special: परिवार बनाना चाहता था टीचर, बन गए पहलवान
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 03 Nov 2016 12:33 AM IST
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Yogeshwar dutt
- फोटो : अमर उजाला
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भारत में क्रिकेट से इतर अन्य खेलों के चुनिंदा खिलाड़ी ही अपनी वैश्विक पहचान बना सके हैं। उनमें से एक नाम लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त का है। हरियाणा के गोहाना कस्बे में 2 नबंबर 1982 को जन्मे योगेश्वर का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहां अधिकांश लोग शिक्षक थे। योगेश्वर के माता पिता भी शिक्षक थे। इसलिए सभी चाहते थे कि योगेश्वर भी बड़ा होकर शिक्षक बने। लेकिन योगेश्वर की पसंद कुछ और ही थी।
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योगेश्वर दत्त
- फोटो : getty
योगेश्वर को बचपन से ही पहलवानी का शौक था। महज 8 साल की उम्र से ही उन्होंने कुश्ती की शुरुआत कर दी थी। योगेश्वर अपने गांव केबलराज पहलवान से बेहद प्रभावित थे। साल 1992 में योगेश्वर ने स्कूल चैंपियनशिप का खिताब जीता। इसके बाद उनके परिवार ने उनका सपोर्ट करना शुरु किया। दो साल बाद 1994 में उन्होंने पोलैंड में हुए इंटर स्कूल कैडेट गेम्स में हिस्सा लिया और स्वर्ण पदक हासिल किया।
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योगेश्वर दत्त
- फोटो : pti
इसके बाद अपने करियर को नई दिशा देने के लिए योगेश्वर ने दिल्ली का रुख किया। दिल्ली आकर उन्होंने छत्रसाल स्टेडियम में अभ्यास करना शुरू किया। इसके लिए वे वहीं रहने लगे। इस दौरान उन्होंने अपनी ग्रजुएशन भी पूरी की। साल 2006 में उनके पिता की मौत से उन्हें तगड़ा झटका लगा। इसी साल उनके पैर में भी चोट लगीष इस कारण उन्हें काफी समय तक कुश्ती से दूर रहना पड़ा।
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योेगेश्वर दत्त
- फोटो : getty
2008 के एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर योगेश्वर ने बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। लेकिन ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में हारकर वह पदक की दौड़ से बाहर हो गए।2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने एक बार फिर स्वर्ण पदक हासिल किया। यह गोल्ड मेडल इसलिए भी महत्वपूर्ण था कि यह कारनाम उन्होंने घुटने के चोटिल होने के बावजूद किया था।
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योेगेश्वर दत्त
- फोटो : getty
2012 का लंदन ओलंपिक उस बेहतरीन पलों का गवाह बना जब योगेश्वर दत्त ने कांस्य पदक हासिल किया। और ओलंपिक में के़डी जाधव और सुशील कुमार के बाद कांस्य पदक हासिल करने वाले तीसरे भारतीय पहलवान बने। ओलंपिक पदक जीतने के बाद योगेश्वर को 2012 में देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया।