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मुद्दा: हादसों का एक्सप्रेस-वे... एक दशक के आंकड़े दिखा रहे भयावह तस्वीर

Subhash Chandra Kushwaha सुभाष चंद्र कुशवाहा
Updated Mon, 29 Dec 2025 12:32 PM IST
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सार
यमुना एक्सप्रेस-वे पर दिसंबर २०२५ में हुआ हादसा भयानक था, लेकिन पिछले एक दशक के आंकड़े अधिक भयावह तस्वीर पेश करते हैं।
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Yamuna expressway in Uttar Pradesh road of accidents data of decade reveals terrifying picture
यमुना एक्सप्रेसवे पर आए दिन हो रहे हादसे - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी

विस्तार

उत्तर प्रदेश का यमुना एक्सप्रेस-वे (ग्रेटर नोएडा–आगरा) देश के सबसे तेज और आधुनिक हाईवे नेटवर्क में गिना जाता है। 165 किलोमीटर लंबा यह हाईवे 2012 में खोला गया था। देश की राजधानी की ओर यात्रा के लिए इसे बेहतर कनेक्टिविटी का प्रतीक बनाया गया था, लेकिन जनता को बेहतर प्रशिक्षण और शिक्षण व्यवस्था के बिना इस एक्सप्रेस-वे पर चलने की जो सहूलियत दी गई, वह कम जोखिम भरी नहीं कही जा सकती। आज लापरवाह वाहन चालकों की वजह से यह एक्सप्रेस-वे कभी-कभी खतरनाक एक्सप्रेस-वे में बदलता दिखाई देता है।



हाल ही में हुए भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। इस एक्सप्रेस-वे पर 2012 से 2023 तक हुए हादसों के आंकड़े बताते हैं कि कुल 7,625 सड़क दुर्घटनाओं में 1,320 लोग मारे गए और 11,168 घायल हुए।


यानी हर साल औसतन 110 मौतें और दर्जनों गंभीर चोटें इस मात्र 165 किमोमीटर मार्ग पर देखी गईं। दिसंबर, 2025 के हादसे में एकसाथ आठ बसों और तीन कारों के बीच भीषण टक्कर हुई, जिनमें कम से कम 13 लोगों की मौत और 70 से अधिक लोग घायल हुए।

कुछ रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 19 तक बताई गई है, क्योंकि अधिकांश शव पहचानने योग्य नहीं थे। इन आंकड़ों से पता चलता है कि एक्सप्रेस-वे अब भी जीवन और मौत के बीच का बेहद संवेदनशील और खतरनाक मार्ग बना हुआ है। उत्तरी भारत में जाड़े के मौसम में कोहरा और कम दृश्यता की समस्या बढ़ जाती है। घना कोहरा और तेज गति, एक्सप्रेस-वे के लिए जोखिम भरा होता है। दिसंबर, 2025 का हादसा भी इसी कारण हुआ। ड्राइवरों के सामने दृश्यता लगभग शून्य थी। दो कार चालकों ने अपनी गाड़ियों को बीच में ही रोककर झगड़ना शुरू कर दिया और उसके बाद, एक के बाद एक टक्कर होती गई। टक्कर के बाद बसों में आग फैली और भीषण विनाश हुआ।

यमुना एक्सप्रेस-वे के आंकड़े भयावह हैं। आरटीआई से प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि नींद, थकान और ड्राइविंग के दौरान झपकी आने की वजह से 2012–2023 के बीच कुल 3,364 हादसे हुए और इनमें लगभग 522 मौतें हुईं। कई अन्य रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि ‘प्रति चार दिनों में एक मौत’ का औसत इसी वजह से हुआ। तेज रफ्तार के कारण 1,302 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 197 मौतें दर्ज की गईं। लापरवाही और ट्रैफिक सेंस की कमी की वजह से भी कई दुर्घटनाएं हुई हैं।

सड़क पर चलने वालों और वाहन चलाने वालों—दोनों की लापरवाही और अज्ञानता हादसों को बढ़ा रही हैं। उपरोक्त अवधि में एक्सप्रेस-वे पर पैदल चलने वालों की वजह से 103 दुर्घटनाओं में 39 मौतें हुई हैं। इनमें 2023 में सर्वाधिक मौतें हुई थीं। हम एक्सप्रेस-वे पर कैसे चलें, इस विषय पर प्रशिक्षण की आवश्यकता है। अधिकांश चालकों को उचित लेन में चलने की जानकारी नहीं होती या वे गलत लेन में गाड़ी चलाते हैं, नतीजतन हादसों की आशंका बढ़ जाती है। विशेष परिस्थितियों में अपने वाहन कहां पार्क करें, इस संबंध में भी प्रशिक्षण जरूरी है।

दिसंबर, 2025 की दुर्घटना सड़क सुरक्षा के पूरे प्रबंधन को बेहतर बनाने पर जोर देती है। हाईवे या एक्सप्रेस-वे पर वाहनों को रोकने की जगह निर्धारित होनी चाहिए। बीच में वाहनों को रोकने पर सख्त जुर्माने का प्रावधान किया जाना चाहिए, जिसे सीसीटीवी की निगरानी से वसूला जा सकता है। गति सीमा के उल्लंघन को कैमरों की निगरानी से नियंत्रित किया जाना चाहिए। दुर्घटना होने के बाद, दुर्घटना स्थल पर एंबुलेंस, क्रेन और फायर ब्रिगेड की सहायता शीघ्र उपलब्ध हो सके, इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए।

एक्सप्रेस-वे पर सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़कों की डिजाइन, कैट आई और रेडियम रिफ्लेक्टर की व्यवस्था बेहतर की जानी चाहिए। लेन में चलने के लिए जागरूकता बढ़ाने के साथ प्रशिक्षण दिया जाना भी जरूरी है और उचित लेन में न चलने पर सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए। एक्सप्रेस-वे की निगरानी के लिए प्रशिक्षित हाईवे पुलिस बल की तैनाती होनी चाहिए, जो नियमित रूप से गश्त लगाते रहें। चालकों पर निगरानी हेतु बीच-बीच में भौतिक रूप से चेंकिंग की जानी चाहिए।

कुल मिलाकर, एक्सप्रेस-वे पर सड़क दुर्घटनाओं से निजात पाने का एकमात्र रास्ता जनसामान्य को उचित प्रशिक्षण, सख्त नियम, उन्नत निगरानी, ड्राइवर शिक्षा और मौसम-आधारित संभावित अलर्ट सिस्टम है—तभी यह एक्सप्रेस-वे सुरक्षित जीवन मार्ग बन सकता है।

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