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दूसरा पहलू: लंदन में बंद हुआ ‘इंडिया क्लब’, भारतीय संस्कृति की तमाम भूली-बिसरी यादें भी हुईं धूमिल
Mon, 21 Oct 2024 05:47 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
रमेश ठाकुर
रमेश ठाकुर
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 21 Oct 2024 05:47 AM IST
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लंदन स्थित द इंडिया क्लब
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
प्रवासियों के आने की राह देखने वाला लंदन स्थित ‘द इंडिया क्लब’ को शायद ही कोई भारतीय भुला पाए। वह हिंदुस्तान की आजादी के आंदोलनकारियों और राष्ट्रवादियों का मात्र गढ़ ही नहीं था, बल्कि हमारी स्मृतियों का भंडार था, जिसे अब बंद करने का निर्णय ले लिया गया है। यह क्लब प्रवासी भारतीयों को परदेश में अपनेपन का एहसास करवाती थी। क्लब के बंद होने से भारतीय संस्कृति की तमाम भूली-बिसरी यादें भी धूमिल हो गईं। इसे वर्ष 1951 में वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों ने स्थापित किया था। बीते 70 वर्षों से यह क्लब स्वतंत्रता की लड़ाई, सांस्कृतिक इतिहास और स्वादिष्ट भारतीय व्यंजनों का केंद्र बना हुआ था।
भारत से लंदन पहुंचने वाला कोई भी हिंदुस्तानी उस क्लब का दीदार करना नहीं भूलता था। पिछले वर्ष सितंबर-2023 में क्लब को बंद करने का निर्णय उसके मालिकों ने लिया था। हालांकि क्लब को उसके मालिक नहीं चलाते थे, बल्कि उसके प्रोपराइटर भारतीय मूल के यॉर्कर मार्क और उनकी बेटी फिरोजा किराए पर चलाते थे। बीते एकाध दशक से क्लब के मालिक लगातार किराया बढ़ाते जा रहे थे और क्लब को खाली करने का कानूनी नोटिस भी भिजवा रहे थे। हालांकि फिरोजा ने क्लब को बचाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। अंततः पिछले महीने मालिकों के पक्ष में ही फैसला सुना दिया गया।
क्लब में भारतीय परंपराओं और संस्कृतियों से जुड़ी बेशुमार निशानियां मौजूद हैं। वह टेबल-कुर्सी, जिस पर पंडित नेहरू आकर अक्सर तुलसी पत्ती की चाय पिया करते थे। उनके लिखे खत, उनके इस्तेमाल किए बर्तन इत्यादि भी क्लब में मौजूद हैं। क्लब में नेहरू, माउंटबेटन, वीके मेनन, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, दादाभाई नौरोजी के अलावा शशि थरूर, सुब्रमण्यम स्वामी जैसे मौजूदा पीढ़ी के अनगिनत नेताओं का आना-जाना हमेशा रहा। ब्रिटेन के कुछ कट्टरपंथी दशकों से इस क्लब को बंद करवाने की मांग कर रहे थे। क्लब मालिक वहां आलीशान होटल बनवाना चाहते हैं। क्लब में कुल 26 कमरे थे, भीतर एक बड़ा गार्डन और लॉन था। वहां एक साथ पांच सौ लोग समा सकते थे। क्लब पॉश इलाका ‘चेरिल क्रॉस के नजदीक भूखंड संख्या-143 के स्टैंड कॉन्टिनेंटल’ में स्थित है, जिसका कभी कृष्ण मेनन के नेतृत्व में इंडिया लीग के सदस्यों ने अपने करकमलों से श्रीगणेश किया था। आज उनकी आत्माएं भी रोती होंगी। उनकी तमाम यादें क्लब से जुड़ी थीं।