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रॉबर्ट फिको: स्लोवाकिया के चार बार के पीएम, विवादित शख्सियत लेकिन सियासत में उनके कद की अनदेखी करना मुश्किल

Tue, 21 May 2024 12:59 AM IST
निर्मल कांत एलेना क्रैपैस्का, स्लोवाकिया में स्थित मानवाधिकार संस्थान में कार्यक्रम निदेशक
एलेना क्रैपैस्का, स्लोवाकिया में स्थित मानवाधिकार संस्थान में कार्यक्रम निदेशक Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 21 May 2024 12:59 AM IST
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सार
स्लोवाकिया की राजनीति में फिको के कद की अनदेखी करना मुश्किल है। वह कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रह चुके हैं और स्मर पार्टी के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं, जो अपने शुरुआती दिनों में उदार वामपंथी पार्टी थी। वह 2006 से चार बार देश के प्रधानमंत्री रहे हैं।
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Slovakia PM Robert Fico's shooting incident: Politics is not a fight between good and evil
रॉबर्ट फिको - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको पर हुआ हमला स्लोवाकिया की राजनीति में दिख रहे उस विभाजन का चरम है, जो हर चुनाव, हर राजनीतिक रैली, हर अभियान और हर बयान के बाद गहराता जा रहा है। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप बेशक लगते रहे हों, लेकिन देश की राजनीति में उनके कद की अनदेखी करना मुश्किल है। दोपहर के तीन बजे थे और तभी मैंने एक ग्रुप चैट में यह संदेश पढ़ा- 'फिको को गोली मार दी।' मैंने खबर की पुष्टि करने की कोशिश की और फिर जो भी जानकारियां मुझे मिलती गई, मैं अपने दोस्तों और परिवार को भेजती रही। परेशानी यह थी कि घटना की जी कर पूरी जानकारी कहीं से मिल नहीं रही थी, जबकि हेडलाइंस पक्के तौर पर घोषणा कर रही थीं कि, 'हैंडलोवा में सरकारी बैठक के बाद रॉबर्ट फिको को गोली मार दी गई।'


 
इसमें संदेह नहीं कि स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको एक विवादित शख्सियत रहे हैं। लेकिन मुझे भरोसा नहीं हो पा रहा था कि उस दोपहर वाकई उन्हें कई बार गोली मारी गई होगी? अस्पताल में सर्जरी के बाद अगले दो दिन तक उनकी हालत गंभीर, लेकिन स्थिर बनी रही। दरअसल, स्लोवाकिया की राजनीति इस कदर ध्रुवीकृत हो चुकी है कि बयानबाजी तो छोड़िए, आए-दिन हिंसा की खबरें आम हो गई हैं। पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और यहां तक कि महिलाओं को भी ऑनलाइन धमकाया जा रहा है। 2016 में ऑफिस से अपने घर जाते वक्त मुझ पर भी हमला किया गया था। 2022 में एक बार के बाहर दो लोगों पर घातक हमला किया गया, जो राजनीति से प्रेरित था।


हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो पूर्व मंत्रियों में हाथा-पाई की नौबत आ गई। हालांकि ज्यादातर मामलों में ये नफरतपूर्ण बयानबाजी इंटरनेट तक ही सीमित है और अब तो यह सामान्य बात महसूस होने लगी है। कानून निर्माता, कार्यकर्ता और पत्रकार इसे सार्वजनिक जीवन में भाग लेने की कीमत मानते हैं। हम खुद को आश्वस्त करते रहते हैं कि जो लोग ऑनलाइन धमकी भरे संदेश भेजते हैं, वे असल जिंदगी में अमूमन ऐसा नहीं करते। जाहिर है कि इस माहौल का असर राजनीति पर भी पड़ा है। देश की प्रगतिशील पूर्व राष्ट्रपति जुजाना कैपुतोवा, जो नागरिक अधिकारों की वकील भी हैं, स्पष्ट करती हैं कि उन्हें और उनके परिवार को मिल रही मौत की धमकियों की वजह से ही उन्होंने दोबारा चुनाव न लड़ने का निश्चय किया था। लेकिन अब हालात बद से बदतर हो रहे हैं। अब किसी ने प्रधानमंत्री को गोली मार दी है। पीछे मुड़कर देखें, तो यही लगता है कि नफरती बयानबाजी अनिवार्य रूप से, धीरे-धीरे हिंसा पर उतर आई है और हम इस खतरनाक क्षण में इंतजार कर रहे हैं कि आगे क्या होगा। मुमकिन है कि सरकार की तरफ से कठोर कार्रवाई की जाएगी, और सबकुछ बदतर होता जाएगा। या फिर हम ठंडे दिमाग से उठेंगे, अपने खंडित देश के टुकड़ों को उठाएंगे और उन्हें वापस जोड़ने की कोशिश करेंगे।

स्लोवाकिया की राजनीति में फिको के कद की अनदेखी करना मुश्किल है। वह कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रह चुके हैं और स्मर पार्टी के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं, जो अपने शुरुआती दिनों में उदार वामपंथी पार्टी थी। वह 2006 से चार बार देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। मुख्यधारा की मीडिया के साथ उनके संबंध पिछले काफी समय से खराब होने लगे थे। उन पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं और 2016 में तो उनके भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने उनके और उनके उपप्रधानमंत्री के इस्तीफे की नाकामयाब मांग भी की। लेकिन 2018 में जब पत्रकार जान कुसिएक और उनकी मंगेतर की उनके अपार्टमेंट में उस वक्त गोली मार कर हत्या कर दी गई, जब वह राजनीतिक भ्रष्टाचार के एक मामले की तफ्तीश कर रहे थे, तो इस घटना ने स्लोवाकिया की राजनीति को विभाजित कर दिया। तब उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे थे, और उस वक्त वे कामयाब भी हो गए थे। इसके बाद जनता मोटे तौर पर दो खेमों में बंटी रही। एक फिको के पक्ष में और दूसरे विपक्ष में। जो फिको के समर्थन में से ही उन्होंने दोबारा चुनाव न लड़ने का निश्चय किया था। लेकिन अब हालात बद से बदतर हो रहे हैं। अब किसी ने प्रधानमंत्री को गोली मार दी है। पीछे मुड़कर देखें, तो यही लगता है कि नफरती बयानबाजी अनिवार्य रूप से, धीरे-धीरे हिंसा पर उतर आई है और हम इस खतरनाक क्षण में इंतजार कर रहे हैं कि आगे क्या होगा। मुमकिन है कि सरकार की तरफ से कठोर कार्रवाई की जाएगी, और सबकुछ बदतर होता जाएगा। या फिर हम ठंडे दिमाग से उठेंगे, अपने खंडित देश के टुकड़ों को उठाएंगे और उन्हें वापस जोड़ने की कोशिश करेंगे।

स्लोवाकिया की राजनीति में फिको के कद की अनदेखी करना मुश्किल है। वह कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रह चुके हैं और स्मर पार्टी के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं, जो अपने शुरुआती दिनों में उदार वामपंथी पार्टी थी। वह 2006 से चार बार देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। मुख्यधारा की मीडिया के साथ उनके संबंध पिछले काफी समय से खराब होने लगे थे। उन पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं और 2016 में तो उनके भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने उनके और उनके उपप्रधानमंत्री के इस्तीफे की नाकामयाब मांग भी की। लेकिन 2018 में जब पत्रकार जान कुसिएक और उनकी मंगेतर की उनके अपार्टमेंट में उस वक्त गोली मार कर हत्या कर दी गई, जब वह राजनीतिक भ्रष्टाचार के एक मामले की तफ्तीश कर रहे थे, तो इस घटना ने स्लोवाकिया की राजनीति को विभाजित कर दिया। तब उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे थे, और उस वक्त वे कामयाब भी हो गए थे। इसके बाद जनता मोटे तौर पर दो खेमों में बंटी रही। एक फिको के पक्ष में और दूसरे विपक्ष में। जो फिको के समर्थन में थे, वे कामकाजी वर्ग के और राष्ट्रवादी थे और जो उनके विरोध में थे, वे ज्यादातर उदारवादी अभिजात्य वर्ग से थे।

जब फिको ने पिछली बार वापसी का प्रयास किया, तब उन्होंने दक्षिणपंथी विचारों का ही सहारा लिया था। हालांकि उनकी पार्टी अभी भी सोशल डेमोक्रेट के रूप में खुद को पेश करती है, और उन्होंने आसानी से जीत भी हासिल कर ली थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से देश का राजनीतिक माहौल एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गया है। फिको के पद संभालने के बाद से उनके गठबंधन ने सरकारी प्रसारक को बदलने की विवादास्पद कोशिशें कीं और यूरोपीय संघ की चेतावनियों और विरोध के बावजूद भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था को नष्ट कर दिया। अप्रैल में राष्ट्रपति चुनाव में, जिसमें कैपुतोवा ने हिस्सा नहीं लिया था, फिको के सहयोगी पीटर पेलेग्रिनी ने जीत हासिल की। वहां से देश सीधे यूरोपीय संघ के चुनाव के प्रचार अभियान में शामिल हो गया।

स्लोवाकिया की राजनीति में विभाजन दरअसल हर चुनाव, हर राजनीतिक रैली, हर अभियान और बयान के बाद गहराता जा रहा है। दुर्भाग्यवश यह नीति व मुद्दों के बारे में कम और अच्छाई व बुराई के बीच की चमत्कारिक लड़ाई के बारे में अधिक होता जा रहा है। इसमें कोई भी पक्ष कम नहीं है। पिछले वर्ष फिको के विरोधियों ने आरोप लगाया कि वे देश को माफिया के हवाले कर देंगे। कैपुतोवा ने भी फिको पर मुकदमा दायर कर दिया, क्योंकि उन्होंने कैपुतोवा को अमेरिका के हाथों की कठपुतली और जॉर्ज सोरोस समर्थक बताया था। लेकिन फिको के साथ ये जो घटना हुई, उससे पहले तक हम इन आरोपों-प्रत्यारोपों को सामान्य मानने लगे थे।

फिको पर हमले के कुछ घंटे बाद वीडियो फुटेज सामने आए और हमलावर की ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की गई। अब हर कोई इस हमले को राजनीतिक बता रहा है। एक वर्ग संदिग्ध व्यक्ति को एक प्रगतिशील उदारवादी बता रहा है। हालांकि वास्तविक उद्देश्य अभी अस्पष्ट हैं। सरकार में शामिल एक मंत्री का कहना है कि इस हमले का उद्देश्य राजनीतिक था, हालांकि संदिग्ध व्यक्ति किसी कट्टरपंथी समुदाय से जुड़ा हो, इसके पुख्ता प्रमाण नहीं मिलते। संदिग्ध व्यक्ति की पहचान जुराज सी के नाम से की गई है। हमले के बाद एक नेता ने पत्रकारों पर, तो स्मर के उपाध्यक्ष ने विपक्षी सांसदों पर आरोप लगाए। शुक्र है कि कई आवाजों ने एकता को बनाए रखने और नफरत के माहौल को बढ़ावा न देने की अपील की। इससे शायद हम यह समझ पाएं कि जब हम सार्वजनिक जीवन में अच्छाई बनाम बुराई की बात करते हैं, तो यह समझना भी हमारी जिम्मेदारी होती है कि कोई न कोई, कहीं न कहीं, हमारी बात पर यकीन पर कर रहा होता है। राजनीति अच्छाई और बुराई की लड़ाई नहीं होती।

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