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नोबेल पुरस्कार: संघर्ष और प्रेम के बीच लफ्जों की लय... संभावनाएं तलाशता शाब्दिक संसार सदैव जीवित रहता है

Sat, 12 Oct 2024 05:06 AM IST
ज्योति भास्कर कृष्ण कुमार रत्तू, पूर्व उप महानिदेशक (दूरदर्शन)
कृष्ण कुमार रत्तू, पूर्व उप महानिदेशक (दूरदर्शन) Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 12 Oct 2024 05:06 AM IST
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सार
हान कांग को यह सम्मान उनके गहन काव्यात्मक गद्य तथा मानवीय जीवन की नाजुकता को उजागर करने वाले रचनात्मक प्रयासों के लिए दिया गया है।
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Nobel in Literature Han Kang message of eternity and search of possibilities in World of Words
दक्षिण कोरिया की युवा लेखिका हान कांग को मिला साहित्य का नोबेल - फोटो : X/@Nobel Prize 2024

विस्तार

इस बार साहित्य का नोबेल पुरस्कार दक्षिण कोरिया की युवा लेखिका हान कांग को देने की घोषणा हुई है। इससे यह भी पता चलता है कि साहित्य की दुनिया में भी नई आवाजें आ रही हैं, क्योंकि दक्षिण कोरिया की इस आवाज को तथा उसके साहित्य को मान्यता देना एक नई पुरवाई की तरह है, जो उसके समूचे साहित्य में भी दिखाई देती है।



दक्षिण कोरिया की 53 वर्षीय युवा लेखिका हान कांग ने जितना गंभीर साहित्य रचा है, उसकी मिसाल दुनिया भर की जुबानों में लिखे गए साहित्य में नहीं मिलती है। नोबेल स्वीडिश अकादमी ने कहा है कि लेखिका हान कांग को यह सम्मान उनके गहन काव्यात्मक गद्य के लिए तथा उस गद्य की ऐतिहासिक प्रासंगिकता और मानवीय जीवन की नाजुकता को उजागर करने वाले रचनात्मक प्रयासों के लिए दिया गया है।


दक्षिण कोरिया में 27 नवंबर, 1970 को जन्मी हान कांग की पुस्तक वेजिटेरियन को 2016 में बुकर इंटरनेशनल प्राइज भी मिल चुका है, जो दिमागी बीमारियों के बारे में है। कांग ने अपनी पढ़ाई जॉनसन विश्वविद्यालय से की है। अपने साहित्यिक सफर की शुरुआत 1993 में उन्होंने कविताओं की किताब विंटर इंश्योर के साथ की थी। उनका पहला कथा संग्रह लव आप येशुई 1995 में प्रकाशित हुआ। 1998 में उसकी अनेक किताबें आईं, जिनमें ब्रेथ फाइटिंग, ग्रीक लेसन, ह्यूमन एक्ट्स, व्हाइट बुक एंड वे इत्यादि शामिल थीं। इन किताबों ने दुनिया भर में बसे हुए पाठकों के प्यार के साथ-साथ अन्य विधाओं पर उनकी लेखनी को एक नया स्वरूप बख्शा है।

वेजिटेरियन, योर कोल्ड हैंड, संग सॉन्ग, ब्रेथ फाइटिंग आदि पुस्तकों ने दुनिया भर में धूम मचाई। उनका ऐतिहासिक बायोग्राफिकल उपन्यास व्हाइट बुक पढ़ते हुए लगता है कि यह समकालीन कहानी का एक बेहतरीन नमूना है, जिसके बारे में स्वीडिश अकादमी ने भी जिक्र किया है।

दुनिया भर में उनकी लिखी पुस्तकें अनुवाद के जरिये अनेक भाषाओं में पढ़ी जाती हैं। उनकी बेहद चर्चित पुस्तकों में वेजिटेरियन वह पुस्तक है, जिसका जिक्र बार-बार होता है। हान ने इसे जिस तरह से जिंदगी तथा मानवीय मूल्यों की नई व्याख्या करते हुए अपनी विशिष्ट शैली में रचा है, वह सचमुच अद्भुत है। वह अभिभूत कर देने वाले शब्दों की जादूगर हैं। विश्व साहित्य का एक बड़ा पाठक वर्ग उनकी रचनाओं को रुचि से पढ़ता है। हान के अनुसार, आज जिंदगी में सब कुछ बदल रहा है और दुनिया त्वरित गति से बदल रही है तथा साहित्य के लिए जगह घट रही है। इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया तथा डिजिटल मीडिया के प्रयोगों ने जिस तरह से किताबों की दुनिया बदली है, उससे दुनिया में साहित्य की भूमिका कैसी रहेगी, उस पर भी उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा है कि जब तक आदमी का वजूद इस दुनिया में रहेगा, वह अपने शब्दों के साथ जिंदगी की परिभाषाओं को ढूंढता रहेगा। चूंकि यह साहित्य में ही संभव है, इसीलिए साहित्य अमर है और रहेगा । उन्हें नोबेल मिलने से एक बात तो साफ है कि सच्चा, विवेकशील, निर्मल तथा जिंदगी की संभावनाओं को तलाशता हुआ शाब्दिक संसार सदैव जिंदा रहता है। उन्हें दुनिया भर के कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, परंतु उनके अनुसार, उनके लिए पाठकों का प्रेम सबसे बड़ा अवॉर्ड है।

-लेखक हिंदी, पंजाबी के लेखक, ब्रॉडकास्टर तथा दूरदर्शन के पूर्व उप महानिदेशक हैं।

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