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दूसरा पहलू: नाइजीरिया, टीवी धारावाहिक और छोटा परिवार... हिल चुका है स्थानीय लोगों का प्रचलित भरोसा

Mon, 04 Nov 2024 04:28 AM IST
शुभम कुमार रुथ मैक्लीन
रुथ मैक्लीन Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 04 Nov 2024 04:28 AM IST
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सार
दूसरा पहलू: उत्तरी नाइजीरिया के कई परिवार अपना पसंदीदा धारावाहिक गिदान बादामसी देखने समय से पहले बैठ जाते हैं।धारावाहिक के मुख्य पात्र की 20 पत्नियां और अनगिनत बच्चों की वजह से नाइजीरिया में बहस छिड़ गई है कि ज्यादा बच्चे होना अच्छा नहीं।
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Nigeria, TV serials and small families, the popular trust of the local people has been shaken
नाइजीरिया, टीवी धारावाहिक और छोटा परिवार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूरे अफ्रीका में जन्म दर समान नहीं है। उत्तरी और दक्षिणी अफ्रीका में जन्म दर में काफी कमी आई है, लेकिन शेष अफ्रीका में जन्म दर अब भी ऊंची ही है। लोगों की सोच है कि बच्चे ज्यादा होने पर लोगों का बुढ़ापा आराम से कटता है।


उत्तरी नाइजीरिया के कई परिवार अपना पसंदीदा टीवी धारावाहिक गिदान बादामसी देखने समय से पहले बैठ जाते हैं। पिछले साल भी नाइजीरिया के दूसरे सबसे बड़े शहर कानो में ज्यादातर लोग इस धारावाहिक की बात कर रहे थे। इसका मुख्य पात्र लगातार तलाक लेने वाला एक धनी आदमी है, जिसकी 20 पत्नियां थीं और बच्चे इतने थे कि वह उनकी गिनती भी नहीं कर पाता था। 


धारावाहिक ने बदल दी सोंच
संख्या ज्यादा होने से बच्चों और उनकी मांओं की दुर्गति थी। इस धारावाहिक ने नाइजीरिया में एक नई बहस छेड़ दी है कि ज्यादा बच्चे होना अच्छा नहीं। गौर करने की बात है कि जब विकसित दुनिया में कम होती जन्म दर बड़ी चिंता का कारण है, तब तेज जन्मदर के कारण अफ्रीका के भविष्य को सबसे संभावनापूर्ण बताया जा रहा है, क्योंकि आने वाले वर्षों में वहां युवा आबादी सबसे अधिक होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या वृद्धि से अफ्रीका को कई सारी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा।

अफ्रीका में बच्चों का अनुपात ज्यादा
दूसरे महादेशों की तुलना में अफ्रीका की महिलाएं ज्यादा बच्चे जनती हैं। नाइजीरिया में औसतन एक औरत के पांच बच्चे होते हैं, जबकि अमेरिका और यूरोप में यह संख्या 1.5 है, तो चीन में और भी कम।  इसका मतलब यह नहीं है कि अफ्रीका में जन्म दर बढ़ ही रही है। शिक्षा व जागरूकता से दुनिया भर में जन्म दर में जिस तरह कमी आई है, उसका असर कमोबेश अफ्रीका पर भी पड़ा है। और गिदान बादामसी जैसे धारावाहिक के कारण नाइजीरिया जैसे देशों में जनसंख्या नियंत्रण पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।

हालांकि पूरे अफ्रीका में जन्म दर समान नहीं है। उत्तरी और दक्षिणी अफ्रीका में जन्म दर में काफी कमी आई है, लेकिन शेष अफ्रीका में जन्म दर अब भी ऊंची ही है। अगर नाइजीरिया की ही बात करें, तो कानो जैसे शहर में, जहां के ज्यादातर लोग धार्मिक और परंपरावादी हैं, बड़े परिवार को सुखी माना जाता रहा है। लोगों की सोच है कि बच्चे ज्यादा होने पर लोगों का बुढ़ापा आराम से कटता है। 

बेटे की लालच भी बड़ा कारण
ऐसे ही, जिन परिवारों में सिर्फ बेटियां होती हैं, वहां बेटा पैदा करने की इच्छा भी अक्सर जनसंख्या बढ़ाने में योगदान करती है। लेकिन शिक्षा, आर्थिक समृद्धि, और अब इस लोकप्रिय धारावाहिक के कारण इस शहर में भी लोगों की सोच बदल रही है। अनेक लोगों को लगने लगा है कि ज्यादा बच्चों का पालन-पोषण कठिन काम है, क्योंकि आज के दौर में हर बच्चे को स्कूल भेजना ही पड़ता है। कुल मिलाकर, एक धारावाहिक ने नाइजीरिया के लोगों के प्रचलित विश्वास को हिला दिया है।
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