रूपक: जिंदगी को अर्थ देने वाले हर शोर में आवाज नहीं होती
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विस्तार
बीते 18 दिसंबर को देश के मशहूर फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी ने दिल्ली में अपना पहला हाई ज्वेलरी शो पेश किया, जो बेहद भव्य था, जिसमें फैशन व लाइफस्टाइल क्षेत्र के देशभर के दिग्गज खास ड्रेस कोड के साथ शामिल हुए। शो में शामिल हर मॉडल ने इतने ज्यादा आभूषण पहने थे कि किसी एक आभूषण पर गौर करना नामुमकिन लग रहा था। यही रूपक इंगित करता है कि जब अति होती है, तो चीजें धुंधली दिखने लगती हैं। साल 2023 की इस रूपक से ज्यादा सटीक व्याख्या नहीं हो सकती, जो सही मायनों में अतियों का वर्ष रहा। दिखावटी शादियों से लेकर सामाजिक मुद्दों के बजाय खुद लोगों के आकर्षण का केंद्र बनने की चाह रखने वाले इंस्टाग्रामर, अत्यधिक यात्राएं, फैशन व फिल्मों का प्रमोशन, नए लॉन्च, बड़े डिस्काउंट और रेड कार्पेट वाली ड्रेसिंग, जो फैशन को दुस्साहस से जोड़ती है, यह सब कुछ 2023 में दिखा। ध्यान आकर्षित करने की वह तड़प भी दिखी, जिसने चीजों को बनाया कम, बिगाड़ा ज्यादा।
बॉलीवुड सितारों को लेकर देश के लोगों का स्थायी जुनून चरम को छूता तब दिखा, जब सीमेंट से लेकर गाय का चारा, बीमा पॉलिसी, टायर, पान मसाला और सैनिटाइजर तक हर चीज फिल्म स्टारों द्वारा प्रचारित हो रही हों। सारा कॉन्टेंट फिल्मी शादियों से ही मिल रहा है, मानों सारे महत्वपूर्ण, वास्तविक और क्रांतिकारी विषय, जो प्रयोगों की सुई हिलाने की ताकत रखते थे, अपना अस्तित्व खो चुके हों। 2022 में हमने भौतिक और मनोवैज्ञानिक तौर पर महामारी की गंभीर निराशा से वापसी शुरू कर दी थी। लेकिन वर्तमान साल बाजार और दिमाग, दोनों अतियों के शिकार रहे। हालांकि, महामारी और उसके बाद जलवायु में बदलाव से बढ़ती दुविधाएं हमें सरल और सार्थक ढंग से और स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग के साथ जिंदगी बिताने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। 2023 ने इस उम्मीद को हवा जरूर दी है।
दुनिया का मेला
अप्रैल महीने में मुंबई में एनएमएसीसी (नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर) के लॉन्च के मौके पर आयोजित भव्य समारोह में तमाम वैश्विक हस्तियों, फिल्मी सितारों, सीईओ, लक्जरी ब्रांड्स के बिजनेस प्रमुखों ने भारतीय परिधानों में शिरकत की। उल्लेखनीय है कि भारतीय फैशन अब स्थानीय प्रयोगों से ऊपर जा चुका है। बुनाई, कपड़े और कढ़ाई में यह बेशक भारतीय हो सकता है, लेकिन इसकी कल्पना अब वैश्विक ग्राहकों की पसंद-नापसंद के आधार पर की जा रही है।
साल 2023 की शुरुआत कुछ भावनात्मक रही। कार्तिकी गोंसाल्वेस की एक ताजगी से भरी फिल्म द एलिफेंट व्हिसपरर्स को ऑस्कर के लिए चुना गया। ट्राॅफी स्वीकारते वक्त कार्तिकी ने राहुल मिश्रा द्वारा डिजाइन किए गए परिधान पहने थे, जिनमें जंगल की कढ़ाई की गई थी, जबकि उनके साथ मौजूद फिल्म की निर्माता गुनीत मोंगा ने हाथियों की आकृति वाली साड़ी पहनी हुई थी।
एनएमएसीसी समारोह के सोशल मीडिया पर देश में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कार्यक्रम बनने से पहले फ्रांसीसी लक्जरी ब्रांड डायर ने मुंबई में ऐतिहासिक गेटवे ऑफ इंडिया पर अपना ऑटम-विंटर कलेक्शन प्रस्तुत किया। इस दौरान मुंबई के चाणक्य स्कूल ऑफ क्राफ्ट का सम्मान भी किया गया, जो पिछले कई वर्षों से डायर ब्रांड के लिए कढ़ाई का काम कर रहा है। ब्रांड की कला निदेशक मारिया ग्राजिया चिउरी भारतीय शिल्प कौशल की तारीफ करते हुए और संस्थान के कारीगरों को धन्यवाद कहते हुए इसके योगदान को भी स्वीकार किया।
साल बीतने के साथ भारतीय फैशन का आकार भी बढ़ता गया। अमेरिकी गायिका और रचनाकार बियॉन्से ने पूरी दुनिया के अपने दौरे में एक नहीं, बल्कि तीन बार गौरव गुप्ता द्वारा डिजाइन किए हुए परिधान पहने। गुप्ता द्वारा निर्मित जिन तीन पोशाकों को उन्होंने चुना, उसमें एक हल्के हरे रंग की साड़ी थी, जिसने काफी सुर्खियां भी बटोरी थीं। गौरव गुप्ता ने अपने ब्रांड के लिए इस महान क्षण को स्वीकारते हुए कहा, 'मैं एक भारतीय हूं और मेरे सभी कपड़े भारत में बने हैं, लेकिन मेरी रचनात्मक अभिव्यक्ति उदार है, जो किसी धारणा से बंधी न होकर, वैश्विक है। मेरी अभिव्यक्ति मुझे किसी एक देश से बांध कर नहीं रखती।' फैशन की दुनिया में यह वाकई गर्व का क्षण था।
फर्जी चिंताओं का कारोबार
फैब्रिक कला, फैशन व शिल्प किस तरह पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं, इस पर संवाद, आजादी की 75वीं सालगिरह पर भारत के विचार (आइडिया ऑफ इंडिया) को जाहिर करने वाले परिधानों की 'सूत्र-संतति' जैसी प्रदर्शनियां, रिसाइक्लिंग और सर्कुलर डिजाइन तेजी से नोटिस में आ रही हैं। लेकिन इन विचारों के समानांतर एक अलग किस्म का फर्जीवाड़ा भी दिख रहा है। हर दूसरा ब्रांड संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों द्वारा निर्धारित पैमानों पर ध्यान दिए बगैर स्थायित्वपूर्ण विकास की बात करता है।
दिलचस्प बात यह है कि जो डिजाइनर या ब्रांड फिल्मी सितारों को कपड़े पहनाने में असमर्थ रहते हैं, वे पर्यावरण की चिंता करते दिखने लगते हैं। लेकिन, अगर आप भारतीय शिल्प के सच्चे प्रशंसक हैं, तो आपको समझना चाहिए कि ग्रीन के नाम पर बेची जाने वाली हर चीज सतत विकास के विचार के अनुरूप नहीं होती। अपनी जिंदगी को अर्थ देने में जितना ज्यादा हम फिल्मी सितारों पर निर्भर होंगे, उतना ज्यादा हम वास्तविक उद्देश्यों से भटकते जाएंगे। सड़क सुरक्षा से लेकर नारीवाद और मानसिक स्वास्थ्य से लेकर मानव अधिकार तक सभी मुद्दे मशहूर हस्तियों ने हथिया लिए हैं।
इसके अलावा, यह भी समझना होगा कि भारत में निर्मित हर चीज वैश्विक मंच पर सराहना की पात्र बने, यह जरूरी नहीं। हर शोर में आवाज नहीं होती। (आवाज़ तो लक्ष्य को भेदती है, शोर सिर्फ ध्यान आकर्षित करता है ) उम्मीद है कि 2024 हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी द्वारा 2023 के लिए चुने गए शब्द Authentic (ऑथेन्टिक /प्रामाणिक) और मेरियम वेबस्टर डिक्शनरी द्वारा चुने गए वर्ष के शब्द Rizz (रिज़ /चमत्कार की क्षमता) के बीच फर्क को समझाएगा और यह भी कि दोनों को मिलाए बगैर अलग-अलग रहकर भी महत्व दिया जा सकता है।
...फैशन को यहां से देखो
यह मेरी निजी सोच हो सकती है, लेकिन गुजरे जमाने की अभिनेत्री जीनत अमान द्वारा, जो सत्तर के दशक की जेनी बेबी थीं, 2023 में एक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिये अपनी पुरानी प्रसिद्धि को नई जिंदगी देने की कोशिश करना, मेरे लिए निश्चित तौर पर साल की महत्वपूर्ण खबरों में से था। बाल सफेद हुए तो क्या, वह फिर भी गरिमापूर्ण और इस जमाने की दिखती हैं। अतीत के ग्लैमर से दूर उनका मुक्त, उत्साहित और यथार्थवादी अवतार हमें सिखाता है कि कैसे अपने आहार, कपड़ों और वजन पर ध्यान देकर हरदम परफेक्ट दिखा जा सकता है। जिस दूसरी सेलिब्रिटी ने मेरा ध्यान खींचा, वह है करीना कपूर खान। दो बच्चों की मां और कभी साइज जीरो वाली नायिका अपने शरीर और अपने काम को लेकर सबसे ज्यादा सहज रहने वालों में से हैं। उन्होंने एक रिपोर्टर से कहा, 'मुझे पिज्जा और वाइन पसंद है और मुझे चेहरे और पेट की झुर्रियों से फर्क नहीं पड़ता।' उनका अंदाज बताता है कि दूसरे क्या सोचते हैं, इसकी उन्हें तनिक भी परवाह नहीं। कोई आश्चर्य नहीं कि डिजायनर, अभिनेता और सौंदर्य उद्यमी मसाबा ने अपने ब्राइड अभियान के प्रचार के लिए करीना को चुना। मसाबा ने मुझे इसकी वजह यह बताई कि बेबो यानी करीना बेहद मस्तमौला है और यही उनकी खासियत है।
-('पाउडर रूम: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियन फैशन' की लेखिका और द वॉयस ऑफ फैशन की प्रधान संपादक हैं।)