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राजनीति में अहंकार

Sun, 16 Dec 2018 06:32 PM IST
Raman Singh तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Published by: Raman Singh Updated Sun, 16 Dec 2018 06:32 PM IST
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Ego in politics
तवलीन सिंह

राजनीति में घमंड सबसे खतरनाक चीज है। आज अगर राहुल गांधी ‘पप्पू’ न रहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की स्थिति में आ गए हैं, तो उसका मुख्य कारण यही है कि भारतीय जनता पार्टी के आला नेता घमंड का शिकार हो गए थे। हाल ही में हुए पांच राज्यों के चुनाव अभियान में वे इस तरह घूम रहे थे, जैसे जीती हुई बाजी खेल रहे हों।


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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जब भी पत्रकारों को संबोधित किया, तो वह इस तरह से पेश आए, जैसे कि उनको हराने वाला मैदान में कोई नहीं था। अमित शाह ने बार-बार कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा ‘प्रचंड बहुमत’ से जीतने वाली है। कांग्रेस-मुक्त भारत की बातें भाजपा नेता ऐसे करते रहे, जैसे कि ऐसा होने से इस देश का कल्याण हो जाएगा। जब भी वे राहुल गांधी का नाम लिया करते थे, तो ‘राहुल बाबा’ कहकर लेते थे, जैसे कि उनको गंभीरता से लेते ही न हों। लेकिन पिछले सप्ताह जब परिणाम आए, तो उन्हें कहीं छिपकर मुंह की खानी पड़ी।

उनसे सीख लेकर भाजपा के आम प्रवक्ता बदतमीजी पर उतर आए। एक प्रवक्ता ने तो टेलीविजन पर नेहरू-गांधी परिवार को ‘हिंदुस्तान के डकैत’ कहा। न यह राजनीति की भाषा है और न होनी चाहिए, क्योंकि इसका लाभ उनको मिलता है, जिनके बारे में ऐसे शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं। जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से भाजपा के प्रवक्ता ऐसी बातें कहते आए हैं। मेरा मानना है कि ऐसी बातें करके ही भाजपा ने राहुल गांधी को पप्पू से राजनेता बना दिया है।

राहुल गांधी इन चुनावों में मुख्य मुद्दा नहीं थे। मुख्य मुद्दे कुछ और ही थे, मुख्य पात्र भी और थे, लेकिन भाजपा के हर प्रचारक ने राहुल गांधी को मुद्दा बनाया। प्रधानमंत्री ने भी अपने हर भाषण में ‘नामदार’ और ‘कामदार’ की बातें कीं, बिना यह देखे कि ऐसा करने से वह बार-बार उस परिवार पर ध्यान आकर्षित कर रहे थे, जिस पर नामदार होने का आरोप लगा रहे थे।

सो चुनाव अभियान के समाप्त होने तक उन तीन राज्यों में, जिनमें चुनाव जीतना भाजपा के लिए अति महत्वपूर्ण था, राहुल गांधी का प्रचार भाजपा ने इतना किया कि जिस व्यक्ति के भाषण सुनकर हम कल तक हंसा करते थे, वह आज नरेंद्र मोदी के मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन गए हैं।

चुनाव अभियान शुरू होने से कुछ महीने पहले एक वरिष्ठ भाजपा नेता से मेरी भेंट हुई थी। मैं राजस्थान का दौरा करके आई थी, सो उनको मैंने बताने का प्रयास किया कि इस राज्य में वह हार सकते हैं। मैंने यह मानने का आधार भी उनको बताया। मैंने उन्हें कहा कि जिस परिवर्तन का वायदा मोदी ने 2014 में किया था, वह प्रशासनिक तौर से आया नहीं है और इसके न आने से जनता में आक्रोश दिखने लगा है।
 
ऐसा कहने के बाद मैंने उस राजनेता से पूछा कि क्या उनको पूरा विश्वास है कि अगले साल के लोकसभा चुनाव के बाद मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बन जाएंगे? उन्होंने हंसकर कहा कि उनको पूरा विश्वास इसलिए है, क्योंकि राहुल गांधी किसी हाल में नरेंद्र मोदी का मुकाबला नहीं कर सकेंगे। कल तक हम सब ऐसा सोच रहे थे, लेकिन अब हमें मानना पड़ेगा कि राहुल गांधी अगले वर्ष मोदी को चुनौती अवश्य दे पाएंगे। भाजपा के घमंड ने इनको पप्पू से राष्ट्रीय स्तर का राजनेता बनाया है। राजनेताओं में जब घमंड आ जाता है, तो वह उनको अंधा कर देता है,  सो वे इतनी गलतियां करने लगते हैं, जिनका उनको स्वयं एहसास नहीं रहता।

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