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शेयर बाजार का खेल: ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट से पहले फ्यूचर्स स्टॉक और ऑयल कॉन्ट्रैक्ट्स के धड़ाधड़ सौदे
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पश्चिम एशिया संघर्ष में शेयर बाजार का खेल
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अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
सोमवार 23 मार्च, 2026 की सुबह, ठीक 6:49 बजे (अमेरिका का ईस्टर्न टाइम)। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज। 60 सेकंड के भीतर ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई के 6,200 कांट्रैक्ट्स की खरीद-बिक्री। पिछले पांच दिनों का दैनिक औसत 700 कांट्रैक्ट। बाजार की भाषा में कहीं ऐसा कोई ‘पब्लिक ट्रिगर’ नहीं था, जो इतने बड़े सौदों की वजह बनता। 21 मार्च को डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी कि अगर 48 घंटे में होर्मुज नहीं खुला, तो ईरान के पावर प्लांट्स उड़ा देंगे। सोमवार के इन कांट्रैक्ट्स के वक्त ब्रेंट की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर थी। फिर, ठीक 16 मिनट बाद, ट्रंप का ट्रुथ सोशल पोस्ट आया-अमेरिका और तेहरान के बीच ‘अच्छी बातचीत’ चल रही है। बाजार पलट गया। ब्रेंट, स्टॉक बढ़े, बॉन्ड ईल्ड पिघली।23 मार्च को ट्रंप का पोस्ट आने से करीब पांच मिनट पहले, 1.5 अरब डॉलर के एसएंडपी 500 फ्यूचर्स खरीदे गए और उसी समय 19.2 करोड़ डॉलर के ऑयल कॉन्ट्रैक्ट्स बेचे गए। क्लासिक ‘पेयर्ड ट्रेड’। जिसने यह ट्रेड किया, उसे पहले से पता था कि क्या आने वाला है। उसने स्टॉक फ्यूचर्स खरीदे और ऑयल को शॉर्ट किया, यानी बेचा। मिनटों में दोनों तरफ से बड़ा मुनाफा। करीब 40 अरब डॉलर का खेल! किसी को तो पता था कि ट्रंप ईरान से अच्छी बातचीत का पोस्ट करने वाले हैं। यह आज की बात नहीं है। आइए, टाइम मशीन में बैठिए। चलते हैं करीब दो सौ साल पीछे। अपने जैसों से मिलने, जो उस वक्त भी इसी तरह ठगे गए थे। अंत में आपको कुछ ऐसा भी पता चलेगा, जिसके बाद शेयर बाजारों को समझने का आपका दंभ धुंआ-धुआं हो जाएगा।
हम लंदन में उतर रहे हैं। साल है-1815। नेपोलियन बोनापार्ट और ब्रिटेन के बीच वाटरलू की जंग अंतिम चरण में है। उस आदमी को देखिए, जो एक्सचेंज के दरवाजे से अंदर आया है। पहचाना? नाथन मेयर रोथ्सचाइल्ड। वह उस खंभे के पास खड़े होकर ब्रिटेन के बॉन्ड बेच रहा है। बाकी ट्रेडर्स उसे बेचते देखकर घबरा गए हैं। अगर रोथ्सचाइल्ड बेच रहा है, तो जरूर कुछ बुरा हुआ है। ब्रिटेन जंग हार रहा है। बाजार गिरने लगा। डर अपने चरम पर है। सबने मान लिया कि ब्रिटेन हार गया है। अब रोथ्सचाइल्ड के एजेंट खरीदना शुरू करते हैं-चुपचाप, सस्ते दामों पर। दरअसल, बाजार को यह बाद में पता चलेगा कि रोथ्सचाइल्ड के पास अपना खुद का सूचना नेटवर्क है-घोड़ों, नावों और एजेंटों का। उसे लंदन में सम्राट से पहले खबर मिल गई है कि नेपोलियन बोनापार्ट जंग हार गया है। अब आधिकारिक खबर आ गई कि ब्रिटेन जीत गया है। बाजार तेजी से ऊपर जा रहा है। रोथ्सचाइल्ड को भारी मुनाफा हुआ है। यह सिर्फ किस्मत नहीं है। यह पूरी रणनीति है-पहले जानकारी, फिर बाजार की दिशा बदलना, और अंत में सही समय पर उल्टा दांव। इस एक घटना के बाद यूरोप के वित्तीय जगत में रोथ्सचाइल्ड का सूरज चमकने लगा है। मगर रोथ्सचाइल्ड ऐसा करने वाले अकेले नहीं हैं।
टाइम मशीन बढ़ रही है-1870 की तरफ। हम प्रशिया होते हुए फिर लंदन लौट रहे हैं। यूरोप में युद्ध चल रहा है। फ्रांस के दूसरे और आखिरी सम्राट नेपालियन थर्ड की सेना प्रशिया से भिड़ी हुई है। सेडान के आसपास जंग चल रही है। लंदन में किसी को ठीक-ठीक नहीं पता कि मैदान में क्या हो रहा है। सूचनाएं तीन-चार घंटे देरी से आ रही हैं। ये तीन घंटे लंदन के बाजारों में करोड़ों के फैसले तय करते हैं। सभी जानते हैं कि पेरिस संकट में है, पर संकट कितना गहरा है, यह कोई नहीं जानता। एक्सचेंज में अफवाहों का तूफान है। एक खबर आती है कि फ्रांस बढ़त में है, दूसरी तुरंत उसे काट देती है। बाजार बिना किसी ठोस आधार के ऊपर-नीचे झूल रहा है। फ्रांस के सरकारी बॉन्ड का हाल देखिए। इस वक्त इन्हें रेंट्स कहा जाता है। ये कई हफ्तों से गिर रहे हैं। दूसरी तरफ, प्रशिया के वॉर बॉन्ड, जो कुछ खास बैंकिंग घरानों के जरिये जारी किए गए हैं, मजबूत हो रहे हैं। लंदन के बॉन्ड मार्केट में हर आदमी एक ही धुंध को पढ़ने की कोशिश कर रहा है, पर किसी के पास साफ तस्वीर नहीं है। अब सावधान हो जाइए। एक्सचेंज से कुछ ही दूरी पर एक काउंटिंग हाउस में दरवाजा खुलता है। एक दूत अंदर आया। वह पूरी रात घोड़ा दौड़ाकर बेल्जियम बॉर्डर से यहां पहुंचा है। उसके पास जो संदेश है, वह बाजार में किसी के पास नहीं है। यह संदेश आया है गेर्सन वॉन ब्लेइक्रोडर के नेटवर्क से। यह यहूदी जर्मन बैंकर नेटवर्क ओटो वॉन बिस्मार्क की पूंजी संभालता है। वही बिस्मार्क, जो बाद में जर्मनी के पहले चांसलर होंगे। घुड़सवार ने बताया कि सेडान की जंग एक तबाही है। फ्रांस की सेना टूट चुकी है। सम्राट नेपोलियन थर्ड गिरफ्तार हो गए हैं। फ्रांसीसी साम्राज्य का पतन शुरू हो गया है। अब जरा बाजार वापस चलिए और उस किरदार पर निगाह जमाइए, जिसे ‘प्रशिया समर्थक कमीशन एजेंट’ कहा जाता है। असली नाम किसी को नहीं पता। न आगे इतिहास में दर्ज होगा। आप देख रहे हैं कि वह एजेंट धीरे-धीरे कई ब्रोकरों के जरिये प्रशिया के वॉर बॉन्ड खरीद रहा है। दूसरी तरफ, वह दूसरे एजेंट्स के जरिये फ्रांस के बॉन्ड को शॉर्ट कर रहा है, यानी गिरावट पर दांव लगा रहा है। यह क्या! करीब 90 मिनट के भीतर उसने प्रशिया के अधिकांश बॉन्ड खरीद लिए और फ्रांस के रेंट्स को बेच डाला है। इधर बाजार के अन्य ब्रोकर इस पर बहस कर रहे हैं कि क्या प्रशिया ने म्यूज नदी पार भी की है या नहीं।
लंदन में सुबह का सूरज निकला है। आधिकारिक टेलीग्राफ से फ्रांस के हारने की खबर आ गई। एक्सचेंज फट पड़ा। फ्रांसीसी बॉन्ड कुछ ही घंटों में 15 पॉइंट और गिर गए। प्रशिया के बॉन्ड तेजी से उछले हैं। जो लोग अभी तक असमंजस में थे, वे अब भाग रहे हैं-कोई बेच रहा है, कोई खरीद रहा है। पर जिन लोगों ने पहले ही खेल खेल लिया, वे अब गिनती कर रहे हैं। यह एक व्यक्ति की जीत नहीं है। एक सिंडिकेट है, जिसने बहुत भारी मुनाफा कमाया है।
आगे बढ़ने से पहले आप यह जान लीजिए कि इस पैसे का क्या हुआ। इस पैसे से बिस्मार्क के नए जर्मन साम्राज्य को कर्ज दिया गया। उद्योगों को फंड मिला। यूरोप की शक्ति-संरचना ही बदल गई। यह सिर्फ एक ट्रेड नहीं, एक राष्ट्र निर्माण का वित्तीय इंजन था। वाटरलू की जंग ने एक परिवार को अमीर बनाया था, लेकिन सेडान की जंग पर हुए बाजारी खेल ने एक देश बना दिया। मगर सफर अभी पूरा नहीं हुआ है। टाइम मशीन के हेडफोन पर किस्सा सुनिए। वर्ष 2001 के सितंबर में पांच दिनों में अमेरिकी बाजार में एक अजीब पैटर्न नजर आया। अमेरिकन एयरलाइंस और यूनाइटेड एयरलाइंस के शेयरों पर पुट ऑप्शंस की मात्रा अचानक बढ़ गई। 10 सितंबर को यह सामान्य से कई गुना ज्यादा हो गई है। फिर आया 11 सितंबर, यानी 9/11, जांच हुई। आधिकारिक रिपोर्ट ने कहा कि यह सब सामान्य था। कोई ठोस सबूत नहीं मिला कि किसी को पहले से जानकारी थी।
पर सवाल अब तक खत्म नहीं हुए हैं। सच्चाई क्या है, यह शायद कभी पूरी तरह पता न चले। आपको हैरत होनी ही चाहिए। इसके बाद भी अगर आप मुतमइन हैं कि बाजार के हर मोड़ को अच्छी तरह से जानते हैं, तो आपकी खुशफहमी को सलाम! फिर मिलते हैं अगले सफर पर...