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Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   true devotee of lord shiva

भगवान शिव का सच्चा भक्त

Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
Yashwant Vyas
Yashwant Vyas Updated Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
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काशी विश्वनाथ मंदिर में विश्वनाथ जी की कृपा से अचानक एक दिन दिव्य थाल प्रकट हुआ। भगवान ने स्वप्न में पुजारी से कहा, यह दिव्य थाल शिवरात्रि के दिन मेरे विग्रह के सामने रख देना। जो सच्चा भक्त उस दिन पूजा के लिए आएगा, यह दिव्य थाल स्वतः ही उसके हाथ में चला जाएगा।
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काशी नरेश को इस भगवदादेश का पता चला, तो वह शिवरात्रि के दिन मंदिर के गर्भगृह के पास आसन पर बैठ गए। इस परीक्षा की बात चारों ओर फैल गई। बड़े-बड़े संत-महात्मा, विद्वान, ज्ञानी-ध्यानी भक्त विश्वनाथ जी के दर्शन को आने लगे। एक-एक कर दर्शनार्थी भगवान पर दूध बिल्वपत्र चढ़ाता और लौट जाता। थाल वहीं स्थिर रखा रहा।
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घंटों बीत जाने के बाद एक सीधा-सादा ग्रामीण गंगा स्नान करने के बाद हाथ में गंगाजल से भरा लोटा व बिल्वपत्र लिए आया। मंदिर के द्वार के पास उसने एक कोढ़ी को बैठे देखा। उस पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। शरीर से दुर्गंध आ रही थी। वह रो रहा था। ग्रामीण उस भक्त को देखते ही ठिठका और रुककर बोला, भैया, तुम घबराओ नहीं, मैं भगवान के दर्शन करके अभी आता हूं। तुम्हें अपने साथ गांव ले चलूंगा, तुम्हारा इलाज करूंगा, सेवा करूंगा। ग्रामीण जैसे ही मंदिर के अंदर पहुंचा कि वह दिव्य थाल उसके हाथों में आ गया। काशी नरेश उस सच्चे शिव भक्त को देखकर उसे नमन कर उठे।
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