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लोन पर ली गाड़ियों की जबरन जब्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?: चोलामंडलम फाइनेंस पर ₹10 लाख का जुर्माना

Wed, 16 Sep 2026 08:10 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Wed, 16 Sep 2026 08:10 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने वित्तपोषित वाहनों की जब्ती को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक से कहा है कि वह बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के बीच अपने नियमों का वास्तविक रूप से पालन सुनिश्चित करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्ज की वसूली के लिए वाहन जब्त करने की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए।

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Vehicle Repossession Rules: Supreme Court Directs RBI to Ban Forced Seizure of Financed Vehicles by Banks NBFC
Supreme Court On Financed Vehicles Seizure - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सख्त निर्देश दिया है कि वह गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और शेड्यूल कमर्शियल बैंकों के लिए बनाए गए वाहन जब्ती नियमों को कड़ाई से लागू कराए। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी कर्जदार की वित्तपोषित गाड़ी को केवल "कानूनी तरीकों" से ही जब्त किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संस्थान लोन डिफॉल्ट होने पर भी बल प्रयोग, धोखाधड़ी या मनमाने रवैये का इस्तेमाल करके गाड़ी पर कब्जा नहीं कर सकते। 
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सुप्रीम कोर्ट ने चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी पर क्या जुर्माना लगाया है?

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने 'चोलामंडलम इन्वेस्टमेन्ट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड' से जुड़े एक मामले में यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
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शीर्ष अदालत ने चोलामंडलम फाइनेंस को ये निर्देश दिए:
  • लोन अकाउंट्स बंद करना: पीड़ित ट्रक मालिक के लोन खातों को तुरंत बंद करने का आदेश दिया।
  • बिक्री राशि का रिफंड: जब्त वाहन की नीलामी से प्राप्त 4.5 लाख रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ ग्राहक को वापस लौटाई जाए।
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  • मुआवजा: अनधिकृत जब्ती के कारण हुई मानसिक परेशानी और आजीविका के नुकसान के लिए 10 लाख रुपये का जुर्माना (मुआवजा) देने का आदेश दिया।
  • कानूनी खर्च: इसके साथ ही याचिकाकर्ता को 50,000 रुपये का मुकदमा खर्च देने का निर्देश भी जारी किया गया।

 

लोन न चुकाने पर गाड़ी जब्त करने को लेकर अदालत की क्या टिप्पणी थी?

न्यायमूर्ति नरसिम्हा द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि हालांकि फाइनेंसर के पास लोन एग्रीमेंट के तहत वाहन का कब्जा लेने का अधिकार होता है। ताकि वह छोटे ट्रांसपोर्टरों और ट्रक ऑपरेटरों को बिना किसी पारंपरिक गारंटी के ऋण दे सके। लेकिन, इस अधिकार का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर ही होना चाहिए। 
अदालत ने टिप्पणी की:
"यदि इस तरह की शर्तों को बिना किसी जांच के छोड़ दिया जाए, तो इन्हें चोरी-छिपे, बलपूर्वक या रात के अंधेरे में संपत्ति जब्त करने का 'असीमित लाइसेंस' मान लिया जाएगा। इससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाली सुविधा उस वर्ग के उत्पीड़न का साधन बन जाएगी, जिसकी सेवा के लिए इसे बनाया गया था।"

 

रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या चिंता जताई?

अदालत ने कहा कि बैंकों और एनबीएफसी (NBFCs) के लिए आरबीआई के मास्टर सर्कुलर, दिशानिर्देश और स्पष्टीकरण केवल "कागजों पर" ही मौजूद हैं और इन्हें धरातल पर लागू करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया:
  • कड़ाई से पालन: आरबीआई को यह सुनिश्चित करना होगा कि बैंक और एनबीएफसी इन नियमों का वास्तविक रूप से अनुपालन करें। ताकि किसी नागरिक को रात के अंधेरे में बिना किसी नोटिस के उसकी आजीविका से बेदखल न किया जाए।
  • रिकवरी एजेंटों पर लगाम: फाइनेंसर या रिकवरी एजेंट ग्राहकों को डरा-धमका नहीं सकते, अजीब समय पर परेशान नहीं कर सकते या गुंडों के जरिए गाड़ी पर जबरन कब्जा नहीं कर सकते।
  • कानूनी प्रक्रिया: लोन एग्रीमेंट में कानूनी रूप से मान्य जब्ती प्रावधान होने चाहिए जिनमें नोटिस अवधि, कब्जा लेने की कानूनी प्रक्रिया, अंतिम भुगतान का अवसर और नीलामी प्रक्रिया का स्पष्ट जिक्र हो।

 

यह पूरा मामला क्या था जिसने सुप्रीम कोर्ट तक का रुख किया?

  • यह मामला हरि दत्ता शर्मा नामक व्यक्ति का है, जिन्होंने चोलामंडलम से कमर्शियल वाहन लोन लेकर 'टाटा SFC 407' ट्रक खरीदा था। उन्होंने 10.40 लाख रुपये का लोन लिया था।
  • लोन की किस्तों में चूक होने के बाद, फाइनेंस कंपनी ने अप्रैल 2023 में ट्रक को जब्त कर लिया। पीड़ित का आरोप था कि 9 अप्रैल 2023 की रात को करीब 1 बजे चार अज्ञात लोगों ने वाहन के स्टीयरिंग का लॉक तोड़ा और बिना कोई लिखित नोटिस दिए गाड़ी लेकर चले गए। बाद में कंपनी ने ग्राहक को सूचित किया कि वाहन को 31 अगस्त 2023 को 4.5 लाख रुपये में बेच दिया गया है और 5.71 लाख रुपये का बकाया चुकाने की मांग की।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसने खरीदार की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने पाया कि लोन एग्रीमेंट की 7 दिन की नोटिस वाली शर्त भी आरबीआई गाइडलाइंस और इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट, 1872 के सिद्धांतों के खिलाफ थी।
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