फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   saas bahu relationship and problems in hindi saas bahu ki ladai kaise khatam kare

सास बहू के प्रेम और स्नेहपूर्ण संबंधों से बचेंगे बिखरते परिवार

Tue, 02 Jul 2019 04:29 PM IST
Veena Nagpal वीना नागपाल
Updated Tue, 02 Jul 2019 04:29 PM IST
विज्ञापन
saas bahu relationship and problems in hindi saas bahu ki ladai kaise khatam kare
सास बहू के संबंधों को लेकर परिवारों में अक्सर तनाव रहता है। - फोटो : Social Media

पलंग पर वृद्ध सास का शरीर अंतिम सांस ले रहा था, लेकिन अंतिम सांस ही नहीं आ रही थी। अशक्त शरीर से प्राण या आत्मा निकलने को आतुर थी, लेकिन मुक्त नहीं हो पा रही थी। बेटा और बहू दोनों पास ही बैठे थे। अन्य प्रियजन भी आ गए थे। बहू धीरे-धीरे सासू मां के शरीर पर हाथ फेर रही थी, जिससे कि आखिरी समय में भी मां को यही लगे कि वह परिवार की आदरणीय व सम्मानित है।

विज्ञापन


उस अंतिम समय में बहू ने पूछा- मां! मैं आपके लिए क्या करुं जिससे आप उस शारीरिक कष्ट से मुक्त हो जाओ? 

सासू मां बहुत धीमी आवाज में कहा- नही! तुम नही कर सकती।

बहू ने फिर कहा- मां साहिब कहो तो सही! क्या मैंने आपकी कोई इच्छा पूरी करने में किसी प्रकार की कमी रखी है! 

तब सासू मां ने कहा- तो मुझे एक वचन दे। ईश्वर से मांग कि अगले जन्म में तू मेरी सास बने और मैं तेरी बहू बनूं। फिर मैं तेरी उतनी सेवा करूं जैसे कि तूने इस जन्म में मेरी की है। यह कहते-कहते सास के प्राण मुक्त हो गए।
विज्ञापन


प्रसिद्ध जैनाचार्य श्री विजयरत्न सुंदर सूरीश्वर महाराज प्राय: परिवार में परस्पर सामंजस्य, सहनशीलता और परस्पर सहिष्णुता को लेकर हीं प्रवचन करते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि जिस तरह परिवार आज टूट रहे हैं और बिखर रहे हैं ऐसा नहीं होना चाहिए। परिवार में संबंध मजबूत हों, सब एक दूसरे का सहयोग करें और सहनशीलता बरतें।

विज्ञापन
विज्ञापन

saas bahu relationship and problems in hindi saas bahu ki ladai kaise khatam kare
सास बहू का परस्पर रिश्ता किसी भी परिवार का मूल आधार है। - फोटो : फाइल फोटो

सास बहू का परस्पर रिश्ता किसी भी परिवार का मूल आधार है। आधे से अधिक परिवार इसलिए टूट रहे हैं क्योंकि सास ने बहू को बेटी और बहू ने सास को मां मानने से इंकार कर दिया है। सास को बहू पराये घर से आई लगती है और बहू को ससुराल पराया लगता रहता है। बाकी कसर टीवी पर दिखाए जाने वाले सीरियलों ने पूरी कर दी है।

घर-घर की कहानी दिखाकर यही बताने और सिद्ध करने की कोशिश की गई है कि घर-परिवार की महिलाओं में परस्पर विवाद होते हीं रहते हैं। द्वेष और ईर्ष्या से भरी परिवार की महिलाएं एक दूसरे की टांग खींचती रहती हैं। इतना ही नहीं बल्कि घर के पुरुष भी इसी में लिप्त हैं।

दरअसल, सहनशीलता और परस्पर सहयोग की बात तो परिवार में दिखाई ही नहीं देती। ऐसे परिवार का चित्रण न तो मनोरंजक हो सकता है और न ही कोई सकारात्मक संदेश देता है। लेकिन महिलाओं ने इसे जी भरकर देखा क्योंकि वह शायद मानती हैं कि सास-बहू और परिवार की अन्य महिलाओं के बीच मधुर संबंध हो ही नहीं सकते। परिवार में शांति व सव्यवहार का माहौल इस कटु व्यवहार से कैसे संभव है। महिलाएं अब यही चाहती हैं कि यदि सुख व शांति पाना है तो परिवार से अलग होकर ही इसे पाया जा सकता है।

घर-घर की कहानी निर्मात्री एकता कपूर द्वारा निर्मित सीरियल की तरह न होकर बल्कि जैनाचार्य श्री विजयरत्न सूरीश्वर द्वारा वर्णित उस घटना की तरह होना चाहिए जिसमें सास अपनी बहू की सेवा से इतनी अभिभूत है और उसके प्रति इतनी कृतज्ञ है कि वह उसकी सेवा से उऋण होना चाहती है।

यही वह प्रेम, स्नेह और त्याग है जो परिवारों को जोड़ता है और उनमें शांति लाता है। भारतीय समाज में अभी भी कुछ परिवार आदर्श हैं। वह संयुक्त परिवार है और पश्चिम वाले उन्हें देखकर अभिभूत हो जाते हैं। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed