{"_id":"62fb1f1f8217a35ca63af7c9","slug":"dharm-1660624671624","type":"blog","status":"publish","title_hn":"धर्म","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
धर्म
Fri, 30 Sep 2022 11:45 PM IST
Aviral Saini
अमर उजाला काव्य डेस्क - नयी दिल्ली
अमर उजाला काव्य डेस्क - नयी दिल्ली
Published by: Aviral Saini
Updated Fri, 30 Sep 2022 11:45 PM IST
विज्ञापन
जो नफरत फैलाते है लेकर नाम धर्म का,
उनसे बड़ा न करता कोई अधर्म,
वे नहीं समझते है इंसानियत का मर्म,
फिर भी न आती इन्हे शर्म।
नफरत की वजह से हो गए है वे बेशर्म,
भूल गए क्या है सत्कर्म क्या है कुकर्म,
भूल गए वे ये होता है अधर्म।
जीवन में नहीं करना चाहिए कोई गलत काम,
यही तो सिखाते है रहीम और राम,
न फैलाओ अशांति का पैगाम ,
फैलाओ शांति का पैगाम।
जीवन में करे अच्छे कर्म,
यही सिखाता है धर्म,
यही है इंसानियत का मर्म।
विज्ञापन
उनसे बड़ा न करता कोई अधर्म,
वे नहीं समझते है इंसानियत का मर्म,
फिर भी न आती इन्हे शर्म।
नफरत की वजह से हो गए है वे बेशर्म,
भूल गए क्या है सत्कर्म क्या है कुकर्म,
भूल गए वे ये होता है अधर्म।
जीवन में नहीं करना चाहिए कोई गलत काम,
यही तो सिखाते है रहीम और राम,
न फैलाओ अशांति का पैगाम ,
फैलाओ शांति का पैगाम।
जीवन में करे अच्छे कर्म,
यही सिखाता है धर्म,
यही है इंसानियत का मर्म।