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धर्म

Fri, 30 Sep 2022 11:45 PM IST
Aviral Saini अमर उजाला काव्य डेस्क - नयी दिल्ली
अमर उजाला काव्य डेस्क - नयी दिल्ली Published by: Aviral Saini Updated Fri, 30 Sep 2022 11:45 PM IST
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जो नफरत फैलाते है लेकर नाम धर्म का,
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उनसे बड़ा न करता कोई अधर्म,
वे नहीं समझते है इंसानियत का मर्म,
फिर भी न आती इन्हे शर्म।
नफरत की वजह से हो गए है वे बेशर्म,
भूल गए क्या है सत्कर्म क्या है कुकर्म,
भूल गए वे ये होता है अधर्म।
जीवन में नहीं करना चाहिए कोई गलत काम,
यही तो सिखाते है रहीम और राम,
न फैलाओ अशांति का पैगाम ,
फैलाओ शांति का पैगाम।
जीवन में करे अच्छे कर्म,
यही सिखाता है धर्म,
यही है इंसानियत का मर्म।
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