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जब लड़कियां भागती हैं तो बदलता समय और इतिहास, चाहे साक्षी हो या हिमादास
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हिमा दास
- फोटो : social media
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लड़कियां घर से भागती हैं और सवालों के घेरे में हर दूसरी लड़की खड़ी कर दी जाती है। भागना जरूरी होता है फिर वह प्रेम हो या सपना। साक्षी हो या हिमादास। दोनों भागी थी। फर्क था तो मंजिल और उद्देश्य का। एक प्रेमी के प्रेम को पाने के लिए भागी, एक पूरे विश्व के प्रेम को अपना बनाने के लिए।
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प्रेम दोनों का था एक नितांत निजी तो दूसरा सपनों और अपनों का था। वैसे प्रेम में भागना भी सपनों के लिए भागना है। यह संघर्ष है सपनों को जीने का। लड़कियों को महज ज़िम्मेदारी मान हस्तगत किए जाने के प्रति विद्रोह का। उसका भागना है जीवनसाथी के चयन के लिए। भागना है उन सपनों के लिए जिसको उसने बुना है अपने बेहतर भविष्य के लिए। और हां, बयान है उसका कि उसके इन सपनों पर नितांत उसका अधिकार है ना कि किसी और का, ना ही परिवार का।
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साक्षी मिश्रा और अजितेश
- फोटो : ani
हिमा भी भागी है। रेस के मैदान में चौथी पंक्ति में खड़ी हिमा मानो तथाकथित समाज व्यवस्था के चौथे पायदान पर खड़ी थी। हिमा का भागना सिर्फ सपनों के लिए भागना ही नहीं था। हिमा ने जब भागना शुरू किया मंजिल की तरफ बढ़ता उसका एक-एक कदम तथाकथित व्यवस्था के प्रति विद्रोह था। अंत मे पहली पंक्ति पर खड़े हो कर 6 स्वर्ण पदकों केa साथ हिमा ने मानो एक संदेश दे दिया हो अब बहुत हो चुका। पायदान में नीचे-ऊपर से कुछ फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है सपने देखने से और उस सपने के लिए भागने से।
मंजिल पर फतह हासिल करने से। उसका भागना इतिहास को बदलने का था कि जब-जब लड़कियां भागती है तब-तब बदलता है समय और इतिहास। बदलती है सोच की लड़कियों का भागना नहीं होता है सिर्फ सामाजिक लांछन। बल्कि लड़कियाँ जब भागती है तो इतिहास बनाती है। कुछ प्रेम में भागकर तो कुछ सपनों के लिए भागकर। वैसे दोनों के भागने में सपनों के लिए भागना है। फैसला तुम्हारा है। तुम किसके लिए भागना चाहती हो।
मंजिल पर फतह हासिल करने से। उसका भागना इतिहास को बदलने का था कि जब-जब लड़कियां भागती है तब-तब बदलता है समय और इतिहास। बदलती है सोच की लड़कियों का भागना नहीं होता है सिर्फ सामाजिक लांछन। बल्कि लड़कियाँ जब भागती है तो इतिहास बनाती है। कुछ प्रेम में भागकर तो कुछ सपनों के लिए भागकर। वैसे दोनों के भागने में सपनों के लिए भागना है। फैसला तुम्हारा है। तुम किसके लिए भागना चाहती हो।
हिमा दास
सुनो लड़कियों भागो अपने सपनों के लिए अपनों के लिए। जिनसे तुम्हारा वजूद है। उस वजूद को साबित करने के लिए भागों। तुम बेहतर कर सकती हो, जी सकती हो बेहतर जिन्दगी। अपने भागने का अहसास कराओं कि लड़की है तभी तो कुछ करने के जज्बे के साथ भागी है। भागो अपने सपनों के लिए क्योंकि तुम्हारे सपने तुम्हारे अपने हैं। जिनके लिए तुम्हें ही भागना होगा। नहीं भागोगी तो जकड़ दी जाओगी बंधनों में।
जो तुम्हारे सपनों से डरते हैं, उड़ान से पहले तुम्हारे पर काटने को तैयार बैठे हैं। तुम्हारे सपनों से डरे मां-बाप को तुम्हारा भागना हौसला देगा। उनकी हिम्मत उनके परिवेश व उससे उपजे तजुर्बे ने छीन ली है। फिर भी अपने भीतर हर बार, बार-बार भागने का हौसला करते हैं और हार को खुद में समेट लेते हैं। तुम्हें भागना है उन सिमटे-संकुचे मां-बाप के सपनों के लिए जो समाज के डर से डरे हैं। जो मार दिए जाते हैं या मर जाते है क्योंकि वह हमें सपने देखना और सपनों के साथ बड़ा होना सिखाते हैं।
जो तुम्हारे सपनों से डरते हैं, उड़ान से पहले तुम्हारे पर काटने को तैयार बैठे हैं। तुम्हारे सपनों से डरे मां-बाप को तुम्हारा भागना हौसला देगा। उनकी हिम्मत उनके परिवेश व उससे उपजे तजुर्बे ने छीन ली है। फिर भी अपने भीतर हर बार, बार-बार भागने का हौसला करते हैं और हार को खुद में समेट लेते हैं। तुम्हें भागना है उन सिमटे-संकुचे मां-बाप के सपनों के लिए जो समाज के डर से डरे हैं। जो मार दिए जाते हैं या मर जाते है क्योंकि वह हमें सपने देखना और सपनों के साथ बड़ा होना सिखाते हैं।
साक्षी मिश्रा
- फोटो : सोशल मीडिया
तुम्हें भागकर उनके डर को दूर करना है। मानती हूं आसान नहीं होता क्योंकि हर किसी की नजर तुम पर होती है। सवालों से भेदती नजरों में उपहास होता है तुम्हारा और तुम्हारे अस्तित्व का। देखों, भागी है! और एक दबाव तुम पर ही आता है हमेशा मर्यादा के नाम का। पर नहीं देखना अब तुम पीछे। यह युद्ध है तुम्हारे भीतर और बाहर का। जिससे तुम लड़ती हो, अपने भीतर रोती हो, चीखती हो, फिर खड़ी होती हो। क्योंकि तुम्हारे सपने सिर्फ सपने नहीं है। जिनके लिए तुम भागी हो। तुम्हारा भागना अब नितांत तुम्हारा नहीं रहा। हर उस लड़की का भागना है जो भागती तो सपनों के लिए है मगर समाज की नजर में एक परिचित-अपरिचित चेहरा उसके साथ जरुर भागा होगा, उसके भागने के उद्देश्य को उद्देश्यविहीन बना देता है। तुम्हें इतना भागना है कि तुम्हारे सपने तुम्हारे अपने बन जाए।
तुम्हें इतना भागना है कि सपनों से डरे मां-बाप फिर से सपना देखना शुरू कर दें। तुम्हें इतना भागना है कि तुम्हारा भागना स्वर्णिम इतिहास रच दे। तुझे इतना भागना है कि हिमादास बनकर तुम कह सको कि लड़कियों का भागना जरूरी होता है नहीं तो वह और उसके सपने दोनों मार दिए जाते हैं। तुम्हें इतना भागना है कि तुम्हारे सपने और तुम्हारी मेहनत किसी और लड़की के भीतर सपनों के पीछे भागने का जज्बा बन जाए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
तुम्हें इतना भागना है कि सपनों से डरे मां-बाप फिर से सपना देखना शुरू कर दें। तुम्हें इतना भागना है कि तुम्हारा भागना स्वर्णिम इतिहास रच दे। तुझे इतना भागना है कि हिमादास बनकर तुम कह सको कि लड़कियों का भागना जरूरी होता है नहीं तो वह और उसके सपने दोनों मार दिए जाते हैं। तुम्हें इतना भागना है कि तुम्हारे सपने और तुम्हारी मेहनत किसी और लड़की के भीतर सपनों के पीछे भागने का जज्बा बन जाए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।