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दर्द: इलाज की तलाश में 250 किमी के बाद थम गया जिंदगी का सफर, लोकगायक की बहन और नानी का आज होगा अंतिम संस्कार

Tue, 15 Jul 2025 09:57 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 15 Jul 2025 09:57 AM IST
सार

पिथौरागढ़ के धापा गांव में कुमाऊंनी लोकगायक गणेश मर्तोलिया की बहन और नानी की जंगली मशरूम खाने से मौत के बाद परिवार में शोक की लहर है।

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Uttarakhand News: Two died from eating wild mushrooms in pithoragarh
जंगली मशरूम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पिथौरागढ़ के धापा गांव में कुमाऊंनी लोकगायक गणेश मर्तोलिया की बहन और नानी की जंगली मशरूम खाने से मौत के बाद परिवार में शोक की लहर है। मुनस्यारी से हल्द्वानी तक तीन अस्पतालों में पहुंचने के बाद भी दोनों को नहीं बचाया जा सका।

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इस दौरान दोनों को करीब 250 किमी लंबा सफर तय करना पड़ा। इधर, कठघरिया में गणेश मर्तोलिया के आवास पर मृतक नानी और बहन के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। परिजनों का कहना कि मंगलवार को चित्रशिला घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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पंचाचूली देश कुमाऊंनी गाने से लोकप्रिय हो चुके एसबीआई में कार्यरत गणेश ने संधी आवाज में बताया कि उनकी बहन, नानी उनके साथ ही रहती थीं। उनके पिता जोहार में हैं। गर्मियों में नानी को दिक्कत होती थी इसलिए वह मई में चलीं गई। नानी काफी वृद्ध थीं इसलिए बहन को भी उनके साथ भेजा था। जानकारी न होने के कारण खेत में उगा जंगली मशरूम दोनों ने खा लिया था। उसके बाद रात में बहन का फोन आया कि तबीयत बिगड़ रही है जिसके बाद गांव के किसी रिश्तेदार को फोन कर उन्हें 14-15 किमी दूर मुनस्यारी अस्पताल में भिजवाया गया। इस दौरान उन्हें उल्टी-दस्त शुरू हो चुके थे लेकिन अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण 13 जुलाई की सुबह उन्हें डिस्चार्ज कर बहन को एंबुलेंस और नानी को एक निजी गाड़ी से पिथौरागढ़ अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां से भी बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं मिली तो दोनों को एंबुलेंस से हल्द्वानी लाने की तैयारी की गई लेकिन किसे पता था कि ऐसा हो जाएगा। दोष किसे दें समझ नहीं आता है। दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में आज भी स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो सकी हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार को पिता विजय मर्तोलिया के जोहार से आने के बाद दोनों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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पता करना मुश्किल कि कौन सा जहरीला मशरूम
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि एक अच्छी प्रजाति के मशरूम को लोग बिजनेस के लिए उचित तापमान पर उगाते हैं जो काफी महंगा आता है। दूसरा मशरूम जंगली कहलाता है जो कहीं भी उग जाता है। खासकर बरसात के मौसम में यह अधिकतर जगहों पर उगता हुआ देखा जा सकता है। इसमें भी कोई ज्यादा जहरीला होता है तो कोई कम। इसका पता लगाना बेहद मुश्किल है। इसे खाने से सिर दर्द, उल्टी और पेट खराब होता है। यह लीवर और गुर्दे को खराब कर देता है। बताया कि सुशीला तिवारी अस्पताल में जहरीला मशरूम खाने के साल भर में सात से आठ मामले आते हैं। इनमें कुछ लोग मशरूम ज्यादा जहरीला नहीं होने के कारण वच भी जाते हैं लेकिन लोगों को जंगली मशरूम को नहीं खाना चाहिए।

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