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16 नवंबर तक भारत लाए जाएंगे फ्रांस में मिले गढ़वाली सैनिकों के अवशेष
ब्यूरो/अमर उजाला, लैंसडौन
Updated Mon, 13 Nov 2017 02:57 PM IST
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फ्रांस के रिचेबर्ग नामक स्थान पर खुदाई के दौरान दो गढ़वाली सैनिकों के अवशेष मिले है। सूचना पर फ्रांस सरकार द्वारा भारत को आमंत्रण दिए जाने के बाद गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों की टीम फ्रांस पहुंच गई है।
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सूत्रों के अनुसार लैंसडौन से सेना के दो अधिकारियों के साथ टीम दिल्ली में आवश्यक कागजी कार्रवाई निपटाने के बाद के फ्रांस के लिए रवाना हुई थी। अवशेषों की जांच के बाद सैनिकों की टीम अपने रणबांकुरों को रिचेबर्ग में ही श्रद्धांजलि देगी। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के रणबांकुरों के अवशेष लेकर फ्रांस से 16 नवंबर तक स्वदेश वापसी की संभावना जताई है।
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फ्रांस सरकार के प्रतिनिधि के अनुसार खुदाई के दौरान एक जर्मन, एक ब्रिटिश, और दो गढ़वाल सैनिकों के अवशेष मिले हैं। गढ़वाली सैनिकों के सोल्डर पर 39 लिखा है, जिससे समझा जा रहा है कि दोनों सैनिकों का 39 गढ़वाल राइफल्स से संबध रहा है। यह सभी अवशेष लेवेंट्री सैन्य कब्रिस्तान से 11 किमी. दूर उत्तर दिशा में पाए गए है।
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प्रथम विश्व युद्ध में गढ़वाली सेना का योगदान
प्रथम महायुद्ध में गढ़वाल की सेना ने अपनी अमिट छाप छोड़ी। जर्मन सैनिकों के बीच गढ़वाली सैनिकों की टोली तूफानी टुकड़ी के नाम से प्रसिद्ध थी। गढ़वाली ब्रिगेड 2/39 बटालियन 21 सितंबर 1914 को करांची से प्रस्थान कर 13 अक्तूबर को फ्रांस के बंदरगाह मार्सेल्स पहुंची और मोर्चे पर डट गई।
इस महायुद्ध में 23 नवंबर 1914 को जर्मन सेना के बमों की परवाह न करते हुए अपनी जान हथेली पर रखकर गढ़वाली सैनिकों ने 300 गज लंबी खाई पर कब्जा कर लिया था। इस युद्ध में अद्भुत वीरता के लिए नायक दरबान सिंह को ब्रिटिश सरकार द्वारा सर्वोच्च सम्मान विक्टोरिया क्रास से नवाजा गया।
10 मार्च 1915 के न्यू चैपल युद्ध में गढ़वाल राइफल्स के राइफलमैन गबर सिंह ने निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए वीरगति प्राप्त की। उन्हें मरणोपरांत विक्टोरिया क्रास से सम्मानित किया गया। इस युद्ध में विशिष्ट वीरता के लिए छह गढ़वाली सैनिकों को मिलिट्री क्रास से अलंकृत किया गया।