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कला भवन में एक दिन और दो नाटक, कहानी ऐसी खूब बजीं तालियां
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 11 Sep 2016 10:05 AM IST
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पंजाब कला भवन में नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ स्थित पंजाब कला भवन में एक दिन में दो नाटकों का मंचन किया गया, जिनकी कहानियां इतनी जबरदस्त थी कि खूब तालियां बजीं। थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन पंजाब कला भवन में गुलजार के नाटक खौफ और निर्मल वर्मा के सोलो प्ले धूप का टुकड़ा का मंचन किया गया। थिएटर फेस्टिवल का आयोजन सिटी एंटरटेनमेंट नटवर्क द्वारा किया गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत गुलजार के नाटक खौफ से हुई। इस नाटक में विभाजन के बाद दो धर्मों के बीच विरोध- प्रदर्शन के दौरान झुलसती इंसानियत को दिखाया गया है। नाटक में एक इंसान की कहानी का वर्णन किया गया है जो दंगे फसाद से बचता हुआ एक ट्रेन में चढ ़जाता है। डिब्बे में उसे एक व्यक्ति दिखाई देता है जिसे देखकर पहले वाले व्यक्ति को लगता है कि मानो वह उसे मारने आ रहा हो।
वह अपने आप को उस इंसान से बचाने के तरीके सोचता है। उसके मन में बार- बार एक ही ख्याल आता है कि अब उसका अंत निकट है। एक समय वह इतना भयभीत हो जाता है कि वह दूसरे व्यक्ति को ट्रेन से धक्का दे देता है। गिरते समय दूसरे व्यक्ति के मुंह से या अल्लाह शब्द निकलता है। यह सुनकर वह घबरा जाता है और सोचता है कि यह उसने क्या कर दिया?
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खौफ में आकर अपने ही धर्म के इंसान का कत्ल कर दिया? इस तरह इस नाटक में यह दिखाया गया कि कैसे मौत के खौफ ने एक इंसान को अपने ही मजहब के इंसान का कत्ल करने पर मजबूर कर दिया। नीतू शर्मा द्वारा निर्देशित 20 मिनट के इस सोलो एक्ट को गौरव शर्मा ने पेश किया।
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कार्यक्रम की शुरुआत गुलजार के नाटक खौफ से हुई। इस नाटक में विभाजन के बाद दो धर्मों के बीच विरोध- प्रदर्शन के दौरान झुलसती इंसानियत को दिखाया गया है। नाटक में एक इंसान की कहानी का वर्णन किया गया है जो दंगे फसाद से बचता हुआ एक ट्रेन में चढ ़जाता है। डिब्बे में उसे एक व्यक्ति दिखाई देता है जिसे देखकर पहले वाले व्यक्ति को लगता है कि मानो वह उसे मारने आ रहा हो।
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वह अपने आप को उस इंसान से बचाने के तरीके सोचता है। उसके मन में बार- बार एक ही ख्याल आता है कि अब उसका अंत निकट है। एक समय वह इतना भयभीत हो जाता है कि वह दूसरे व्यक्ति को ट्रेन से धक्का दे देता है। गिरते समय दूसरे व्यक्ति के मुंह से या अल्लाह शब्द निकलता है। यह सुनकर वह घबरा जाता है और सोचता है कि यह उसने क्या कर दिया?
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खौफ में आकर अपने ही धर्म के इंसान का कत्ल कर दिया? इस तरह इस नाटक में यह दिखाया गया कि कैसे मौत के खौफ ने एक इंसान को अपने ही मजहब के इंसान का कत्ल करने पर मजबूर कर दिया। नीतू शर्मा द्वारा निर्देशित 20 मिनट के इस सोलो एक्ट को गौरव शर्मा ने पेश किया।
पति-पत्नी के बीच दूरियों को दिखाता है धूप का टुकड़ा
पंजाब कला भवन में नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
गुलजार के नाटक के बाद नीतू शर्मा ने अपने निर्देशन में निर्मल वर्मा द्वारा के सोलो प्ले ‘धूप का टुकड़ा’ पेश किया। यह नाटक एक औरत पर के ंद्रित है जो अपने पति से रिश्ता खत्म कर एक पार्क में आकर बैठती है। इस दौरान वह उन दिनों को याद करती है जब 15 साल पहले उसकी शादी हुई थी। पति -पत्नी में प्यार था। हंसते थे, घूमते थे। लेकिन धीरे-धीरे उनमें दूरियां आ र्गइं।
पति काम के सिलसिले में पूरा दिन घर से बाहर रहता और रात को जब वह घर आता तो दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं होती। पति उसके साथ होकर भी न होने के बराबर था। अकेलेपन स वह इतनो तंग आ जाती है कि अपने पति से अलग होने का निर्णय ले लेती है और उसे तलाक देने के बारे में सोचती है।
फिर उसके मन में ख्याल आता है कि जब हम दोनों के बीच पहले ही इतनी दूरियां आ चुकी हैं तो एक वकील और कागज का टुकड़ा उन्हें क्या अलग करेगा? फिर वह सब कुछ छोड़कर उस पार्क में आकर बैठ जाती है जहां दोनों मिलते थे। दोनों नाटकों में संगीत तेजिंदर जोशी, सेट डिजाइन गोल्डी लांबा और लाइट डिजाइनिंग आशीष शर्मा ने की।
पति काम के सिलसिले में पूरा दिन घर से बाहर रहता और रात को जब वह घर आता तो दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं होती। पति उसके साथ होकर भी न होने के बराबर था। अकेलेपन स वह इतनो तंग आ जाती है कि अपने पति से अलग होने का निर्णय ले लेती है और उसे तलाक देने के बारे में सोचती है।
फिर उसके मन में ख्याल आता है कि जब हम दोनों के बीच पहले ही इतनी दूरियां आ चुकी हैं तो एक वकील और कागज का टुकड़ा उन्हें क्या अलग करेगा? फिर वह सब कुछ छोड़कर उस पार्क में आकर बैठ जाती है जहां दोनों मिलते थे। दोनों नाटकों में संगीत तेजिंदर जोशी, सेट डिजाइन गोल्डी लांबा और लाइट डिजाइनिंग आशीष शर्मा ने की।