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ढोल को पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड का चेयरमैन बनाने को हाईकोर्ट में चुनौती
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 17 Jan 2017 01:13 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड के चेयरमैन पद पर बलबीर सिंह ढोल की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार, पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड और चेयरमैन बलबीर सिंह ढोल को एक मार्च के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान याची एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने आरोप लगाया कि बोर्ड के एक्ट के अनुसार चेयरमैन पद पर सिर्फ उसी व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है, जोकि केंद्र या राज्य सरकार में कम से कम 15 वर्ष तक गजटेड पोस्ट पर तैनात रहा हो। सरकार ने ढोल को इस पद पर नियुक्त करने के लिए इस एक्ट में विधानसभा के विशेष सत्र में संशोधन कर पद की नई योग्यता का पैमाना बना दिया। संशोधन के अनुसार अब उस व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है, जोकि भारतीय प्रशासकीय सेवा या राज्य प्रशासकीय सेवा में कम से कम दस वर्ष तक सेवारत रहा हो।
इस नए संशोधन के तहत 23 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन के ठीक अगले ही दिन 24 दिसंबर को बलबीर सिंह ढोल को चेयरमैन के पद पर नियुक्त कर दिया गया। इतनी जल्दबाजी में यह नियुक्ति महज इसीलिए कर दी गई, क्योंकि अंदेशा था कि कभी भी चुनाव अचार संहिता लागू हो सकती है और फिर नियुक्ति नहीं की जा सकेगी।
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अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने इस पद पर नियुक्ति के लिए योग्य उम्मीदवारों के आवेदन तक नहीं मांगे। इतना ही नहीं जो संशोधन किया गया, उस लिहाज से भी यह नियुक्ति सही नहीं है। कारण यह है कि ढोल पीसीएस पद पर दस वर्ष तक कार्यरत नहीं रहे हैं। वह 23 दिसंबर 2014 को सेवानिवृत्त हो चुके थे। बाद में उन्हें दो वर्ष का एक्सटेंनशन दिया गया था। उनका कार्यकाल नौ वर्ष आठ महीनों का है। लिहाजा इसी आधार पर उनकी नियुक्ति रद्द किये जाने की हाईकोर्ट से मांग की गई है।
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हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान याची एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने आरोप लगाया कि बोर्ड के एक्ट के अनुसार चेयरमैन पद पर सिर्फ उसी व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है, जोकि केंद्र या राज्य सरकार में कम से कम 15 वर्ष तक गजटेड पोस्ट पर तैनात रहा हो। सरकार ने ढोल को इस पद पर नियुक्त करने के लिए इस एक्ट में विधानसभा के विशेष सत्र में संशोधन कर पद की नई योग्यता का पैमाना बना दिया। संशोधन के अनुसार अब उस व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है, जोकि भारतीय प्रशासकीय सेवा या राज्य प्रशासकीय सेवा में कम से कम दस वर्ष तक सेवारत रहा हो।
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इस नए संशोधन के तहत 23 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन के ठीक अगले ही दिन 24 दिसंबर को बलबीर सिंह ढोल को चेयरमैन के पद पर नियुक्त कर दिया गया। इतनी जल्दबाजी में यह नियुक्ति महज इसीलिए कर दी गई, क्योंकि अंदेशा था कि कभी भी चुनाव अचार संहिता लागू हो सकती है और फिर नियुक्ति नहीं की जा सकेगी।
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अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने इस पद पर नियुक्ति के लिए योग्य उम्मीदवारों के आवेदन तक नहीं मांगे। इतना ही नहीं जो संशोधन किया गया, उस लिहाज से भी यह नियुक्ति सही नहीं है। कारण यह है कि ढोल पीसीएस पद पर दस वर्ष तक कार्यरत नहीं रहे हैं। वह 23 दिसंबर 2014 को सेवानिवृत्त हो चुके थे। बाद में उन्हें दो वर्ष का एक्सटेंनशन दिया गया था। उनका कार्यकाल नौ वर्ष आठ महीनों का है। लिहाजा इसी आधार पर उनकी नियुक्ति रद्द किये जाने की हाईकोर्ट से मांग की गई है।